Delhi AQI: दिल्ली की 'जहरीली हवा' बढ़ा रही लंग कैंसर का खतरा, ऐसे हो रहा आपके फेफड़ों पर हमला

Air Quality Index: दिल्ली-एनसीआर में रहने वाले लगातार खराब हवा में सांस लेने के लिए मजबूर हैं। गुरुवार 21 अक्टूबर को भी राष्ट्रीय राजधानी की हवा खराब ही रही। आनंद विहार में एयर क्वालिटी इंडेक्स 383 मापा गया जो कि गंभीर कैटेगरी में है। वहीं दूसरे क्षेत्र भी 'बहुत खराब' स्थिति में हैं।

Deli Vehicle

अनुमान है कि आने वाले दिनों में हवा की दशा और खराब हो सकती है। इसकी वजह है कि आने वाले दिनों में फसलों की कटाई के साथ ही पराली जलाए जाने की घटनाएं बढ़ने वाली हैं। पंजाब में पराली जलाए जाने के अलावा उत्तर प्रदेश और हरियाणा भी राजधानी की हवा को खराब करने में अपनी भूमिका निभाते हैं। इसके साथ ही दिल्ली में बड़ी मात्रा में वाहन प्रदूषण फैलाने के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार हैं।

ऐसे में डॉक्टर शहर में रहने वालों को जहरीली हवा में सुरक्षा उपाय अपनाने की सलाह देते हैं क्योंकि दिल्ली की खराब हवा फेफड़ों के कैंसर में वृद्धि का कारण बन रही है।

आपको बता दें कि शहर की हवा को अच्छा तब माना जाता है जब एक्यूआई 50 से कम हो। वायुमंडल में मौजूद जिस हवा में हम सांस लेते हैं इस हवा में छोटे-छोटे कण भी मौजूद रहते हैं। एक्यूआई के जरिए इन कणों की मात्रा मापी जाती है।

खराब AQI है फेफड़ों के लिए खतरनाक
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि हवा में फैले हुए छोटे कणों की मौजूदगी के साथ सांस लेने से कैंसर हो सकता है। हवा में मौजूद छोटे कण सांस के रास्ते जाकर फेफड़ों में फंस सकते हैं। जहां इनके जमा होने से फेफड़ों की कोशिकाओं को नुकसान हो सकता है जिससे सूजन आ सकती है। यह फेफड़ों की कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से बढ़ने का कारण हो सकता है।

हालांकि फेफड़ों का कैंसर अधिकांश तौर पर 50 या उससे अधिक उम्र के लोगों में ही पाया जाता है लेकिन विशेषज्ञों ने कम उम्र के लोगों में इसे देखा है। खास तौर पर महिला रोग पुरुषों की तुलना में कम उम्र में इसके असर में आती हैं।

पिछले महीने ही फ्रांसिस क्रिक इंस्टीट्यूट और यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के वैज्ञानिकों ने एक पेपर जारी किया है कि कैसे वायु प्रदूषण धूम्रपान न करने वालों में फेफड़ों का कैंसर फैला सकता है।

Delhi

स्टडी क्या कहती है?

रिसर्च में कहा गया है कि हवा में वे कण जो जीवाश्म ईंधन के जलने से निकलते हैं, जलवायु परिवर्तन को तेज करते हैं। ये फेफड़ों की कोशिकाओं में एक महत्वपूर्ण और पहले से अनदेखे कैंसर पैदा करने वाले तंत्र के माध्यम से मनुष्य के स्वास्थ्य पर असर डाल रहे हैं। स्टडी में कहा गया हालांकि धूम्रपान की तुलना में वायु प्रदूषण से फेफड़ों के कैंसर का खतरा कम लेकिन सांस लेने के दौरान हम क्या ग्रहण करते हैं इसे हम नियंत्रित नहीं कर सकते।"

इसके अलावा, परिवर्तनों ने वायु प्रदूषण को अन्य स्वास्थ्य स्थितियों में योगदान करने के लिए दिखाया है, जैसे कि मूत्राशय कैंसर, फेफड़ों की बीमारियां, जिनमें अस्थमा और क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी), श्वसन संक्रमण और हृदय रोग शामिल हैं।

वायु प्रदूषण सिर्फ लंग कैंसर ही नहीं बल्कि अन्य बीमारियों के लिए भी जिम्मेदार हो रहा है जैसे मूत्राशय कैंसर, फेफड़ों की अन्य बीमारियां अस्थमा, सांस का संक्रमण और हृदयर रोग शामिल है।

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