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किरण बेदी क्‍यों चाहती हैं सरकारी दफ्तरों और आवासों में एयर प्यूरीफायर पर लग जाए प्रतिबंध

Delhi pollution: दिल्‍ली में ठंड बढ़ते ही प्रदूषण इतना बढ़ गया है कि लोगों का सांस लेना दूभर हो गया है। आलम ये है कि घर की चार-दीवारी में दम घुंट रहा है। हवा को शुद्ध बनाने के लिए दिल्‍ली के कार्यालयों के अलावा घर-घर में एयर प्‍यूरीफायर नजर आ रहा है। इसी बीच पूर्व आईपीएस अधिकारी किरण बेदी ने सरकारी दिल्‍ली के कार्यालयों और आवासों में एयर प्यूरीफायर लगाने पर प्रतिबंध लगाने की वकालत की है।

दरअसल, किरण बेदी ने 29 नवंबर 2025 को एक्‍स पर एक पोस्‍ट शेयर की उसमें उन्‍होंने मोदी सरकार से गुजारिश की है कि कि सरकारी अधिकारियों और सरकारी कार्यालयों में एयर प्‍यूरीफायर पर तुरंत प्रतिबंधन लगा दिया जाना चाहिए। जानिए आखिर किरण बेदी ने ऐसी डिमांड क्‍यों की है?

Delhi pollution

किरण बेदी ने लिखी ये पोस्‍ट

किरण बेदी ने दिल्ली की दमघोंटू हवा वाले माहौल को "सार्वजनिक-स्वास्थ्य आपातकाल" बताया है। उन्होंने 'X' पर एक पोस्ट में लिखा, "सरकारी खर्च पर सरकारी कार्यालयों और आवासों में एयर प्यूरीफायर लगाने पर प्रतिबंध क्यों नहीं लगाया जाना चाहिए?"

क्‍यों किरण बेदी ने की ये मांग

किरण बेदी ने तर्क दिया कि सरकारी अधिकारियों को वायु प्रदूषण के प्रभाव का सीधा अनुभव करना चाहिए, ताकि वे समस्या की गंभीरता को समझ सकें! उन्‍होंने लिखा, "वे प्रदूषित हवा में कैसे सांस लेंगे ताकि यह जान सकें कि क्या हो रहा है? इसके अलावा, यह उन्हें क्षेत्र में जाने और हॉटस्पॉट की जांच करने से रोकता है। हमें समाधान चाहिए, किसी को नुकसान पहुंचाने के लिए नहीं।"

वे जहरीली हवा की गंभीरता को कैसे समझ सकते हैं?

एक अन्य पोस्ट में बेदी ने सवाल उठाया कि जब सरकारी अधिकारी हर कदम पर प्यूरीफायर से सुरक्षित रहते हैं, तो वे जहरीली हवा की गंभीरता को कैसे समझ सकते हैं। बेदी के अनुसार, यह अलगाव अधिकारियों को बाहर की वास्तविक स्थिति को महसूस करने से रोकता है, जबकि नागरिक पीड़ित होते हैं। कई लोग सीने में जकड़न, बहती नाक, छींकने और खांसने से पीड़ित हैं। और यहां तक कि बुखार भी है.. ऊर्जा की कमी महसूस कर रहे हैं। सभी को स्वस्थ हवा चाहिए। यह एक अधिकार है।"

किरण बेदी ने राजधानी की बिगड़ती हवा को "सार्वजनिक-स्वास्थ्य आपातकाल" करार दिया। उन्होंने 'X' पर कहा, "शासन रिमोट-कंट्रोल नहीं हो सकता... इसे धूल में खड़ा होना चाहिए, वही हवा सांस लेनी चाहिए और तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए।"

2015 के विधानसभा चुनावों में भाजपा की मुख्यमंत्री पद की उम्मीदवार रहीं किरण बेदी की यह टिप्पणी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से व्यक्तिगत रूप से हस्तक्षेप करने और वायु प्रदूषण को कम करने के प्रयासों को निर्देशित करने की उनकी सार्वजनिक अपील के एक दिन बाद आई है। पीएम को भेजे अपने संदेश में बेदी ने पुडुचेरी में उपराज्यपाल के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान उनकी नेतृत्व शैली को याद किया।

दिल्‍ली में AQI "खराब" श्रेणी में दर्ज किया गया

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, शनिवार शाम 5 बजे राष्ट्रीय राजधानी में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) "खराब" श्रेणी में दर्ज किया गया। CPCB हवा को 'अच्छा' तब वर्गीकृत करता है जब AQI 50 या उससे कम होता है; 51 और 100 के बीच 'संतोषजनक'; 101 और 200 के बीच 'मध्यम'; 201 और 300 के बीच 'खराब'; 301 और 400 के बीच 'बहुत खराब'; और 400 से अधिक होने पर 'गंभीर' होता है।

अदालत ने BMC और MPCB को 15 दिसंबर तक पिछले साल वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए की गई कार्रवाइयों का विवरण देते हुए एक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। (पीटीआई इनपुट्स के साथ)

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