पैसा नहीं बनता, इसलिए आम लोगों की नहीं सुनती पुलिस: हाइकोर्ट
कोर्ट ने कहा कि आम लोगों की कोई आवाज नहीं है इसलिए पुलिस उन्हें नजरअंदाज करती है, क्योंकि उनसे ना तो पैसा कमाया जा सकता है और ना कोई बड़ा अधिकारी उनके लिए फोन करता है।
नई दिल्ली : दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को पुलिस की कार्यशैली और ईमानदारी पर बेहद कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि पुलिस गरीब लोगों की मदद नहीं करती क्योंकि उनसे कमाई नहीं होती है। कोर्ट ने कहा कि आम लोगों की कोई आवाज नहीं है इसलिए पुलिस उन्हें नजरअंदाज करती है, क्योंकि उनसे ना तो पैसा कमाया जा सकता है और ना कोई बड़ा अधिकारी उनके लिए फोन करता है।

हाइकोर्ट ने ये बेहद सख्त टिप्पणी एक महिला की याचिका की सुनवाई पर की जिसमें दो बच्चों की एक मां ने अदालत को बताया कि उसका पति और ससुराल वालों ने उसे प्रताड़ित किया और उसके बच्चों को जबरदस्ती ले गए जब उसने पुलिस के पास जाकर शिकायत की तो पुलिस ने कुछ नहीं किया और बात को टाल दिया। याचिका सुनते हुए कोर्ट ने संबंधित थाना प्रभारी को मामले में कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं।
न्यायमूर्ति विपिन सांघी और न्यायमूर्ति दीपा शर्मा की पीठ ने सुनवाई करते हुए कहा कि ये देश की बदकिस्मती है कि यहां गरीब, आम लोगों की कोई आवाज नहीं है. जब वे थाने जाते हैं, तो पुलिस उन्हें नजरअंदाज करती है, क्योंकि उनसे कोई धन नहीं कमाया जा सकता और कोई उच्च अधिकारी फोन करने नहीं जा रहा.'
महिला ने याचिका में बताया है कि उसे 15 अप्रैल को उसके ससुराल से निकाल दिया गया और वह अपनी मां के घर दिल्ली आ गई। चार दिन बाद उसका पति और ससुराल वाले उसकी मां के घर पर आये और उसके बच्चों को जबरदस्ती ले गए। महिला ने बताया कि उसने उत्तरी दिल्ली के एक थाने में जाकर पुलिस से मदद की गुहार लगाई लेकिन पुलिस ने उसे टरका दिया।
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