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Turkman Gate हिंसा केस में बड़ा मोड़, दिल्ली हाईकोर्ट ने आरोपी की जमानत रद्द की, दोबारा सुनवाई का आदेश

Delhi Turkman Gate violence case: दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके में हाल ही में हुई हिंसा से जुड़े मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने आरोपी उबैदुल्लाह को दी गई जमानत को रद्द करते हुए ट्रायल कोर्ट को मामले पर दोबारा विचार करने का निर्देश दिया है।

अदालत ने साफ कहा कि जमानत देने का आदेश बेहद संक्षिप्त और बिना ठोस कारणों के पारित किया गया था, जिसे बरकरार नहीं रखा जा सकता।

Delhi Turkman Gate violence case

हाईकोर्ट ने क्यों उठाया सवाल (Delhi High Court Bail Order

न्यायमूर्ति प्रतीक जालान ने कहा कि अदालत किसी भी व्यक्ति की आज़ादी में दखल देने से पहले बेहद सतर्क रहती है, लेकिन यह मामला "असाधारण" है। कोर्ट के मुताबिक, जिस तरह से आरोपी को जमानत दी गई, उसमें न तो अभियोजन पक्ष की दलीलों पर ठीक से गौर किया गया और न ही जमानत से जुड़े जरूरी कानूनी पहलुओं का कोई प्राथमिक विश्लेषण सामने आया।

कब और कैसे हुई जमानत (Bail Granted To Accused)

ट्रायल कोर्ट ने 20 जनवरी को उबैदुल्लाह को जमानत दी थी। इसके खिलाफ याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने 21 जनवरी को ही इस आदेश पर असंतोष जताया और इसे "क्रिप्टिक और अनरीज़न्ड" यानी बिना ठोस वजहों वाला करार दिया। इसके बाद मामले को दोबारा सुनवाई के लिए सत्र न्यायालय को भेज दिया गया।

दोबारा सुनवाई का आदेश (Rehearing Of Bail Plea)

हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि जमानत याचिका पर 23 जनवरी को सुबह 10 बजे फिर से सुनवाई हो। अगर पहले जमानत देने वाले सत्र न्यायाधीश उपलब्ध नहीं होते हैं, तो प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज खुद सुनवाई करेंगी या किसी अन्य जज को मामला सौंपेंगी। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि दोबारा जमानत दी जाती है, तो उसी दिन मजिस्ट्रेट कोर्ट में जमानत बॉन्ड की जांच होगी।

अभियोजन पक्ष के क्या हैं आरोप (Prosecution Argument)

सरकारी वकील ने ट्रायल कोर्ट में सीसीटीवी फुटेज और सह-आरोपी के खुलासे का हवाला दिया था। अभियोजन का दावा है कि उबैदुल्लाह उस हिंसक भीड़ का हिस्सा था, जिसने पुलिस और एमसीडी कर्मचारियों पर पथराव किया, सरकारी काम में बाधा डाली और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया।

आरोपी का पक्ष क्या है (Defense Stand)

वहीं आरोपी के वकील ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि यह पूरा मामला एक तरह की "फिशिंग एक्सपेडिशन" है। उनका कहना है कि बिना ठोस सबूतों के उबैदुल्लाह को फंसाया जा रहा है।

हिंसा की पूरी पृष्ठभूमि (Turkman Gate Violence Background)

यह मामला 6 और 7 जनवरी की दरम्यानी रात का है, जब रामलीला मैदान इलाके में फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई चल रही थी। पुलिस के अनुसार, सोशल मीडिया पर अफवाह फैली कि तुर्कमान गेट के पास स्थित मस्जिद को तोड़ा जा रहा है। इसके बाद करीब 150 से 200 लोग मौके पर जमा हो गए और पुलिस तथा एमसीडी कर्मियों पर पत्थर और कांच की बोतलें फेंकी गईं। इस हिंसा में इलाके के एसएचओ समेत छह पुलिसकर्मी घायल हो गए थे।

अब आगे क्या (What Happens Next)

दिल्ली हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद अब सबकी नजरें ट्रायल कोर्ट की दोबारा सुनवाई पर टिकी हैं। यह देखना अहम होगा कि सत्र न्यायालय इस बार किन आधारों पर फैसला सुनाता है और क्या आरोपी को फिर से राहत मिलती है या नहीं।

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