OPINION: दिल्ली सरकार के शिक्षा मॉडल की US में चर्चा, EMC क्लास से मिलेगी अलग पहचान
दिल्ली सरकार के शिक्षा मॉडल को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल रही है। हाल ही यूएस ने आए शिक्षकों का एक दल दिल्ली की शिक्षा को लेकर आयोजित एक अहम कार्यक्रम में शामिल हुआ।
Delhi Government Education Model: पिछले एक दशक के भीतर दिल्ली की शिक्षा में कई अहम बदलाव देखे गए है। अरविंद केजारीवाल के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी की दिल्ली सरकार अपने दूसरे कार्यकाल में शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। अब दिल्ली के शिक्षा व्यवस्था का जिक्र दिल्ली ही बल्कि भारत के अन्य राज्यों को अलावा विदेशों में भी हो रही है। ऐसे में माना जा सकता है कि दिल्ली सरकार की ओर से शिक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर की गई पहल और क्रांतिकारी नीतियां रंग लाईं।
ये दावा यूं ही नहीं किया जाता कि आज दिल्ली सरकार की शिक्षा व्यवस्था की चर्चा विदेशों में होती है। दरअसल, इसके पीछे एक खास वजह है। दिल्ली की नई शिक्षा व्यवस्था को अगर क्रांतिकारी पहल कहें तो अतिशयोक्ति नहीं होनी चाहिए। क्योंकि नई व्यवस्था के तहत दिल्ली में शिक्षा के प्रति बच्चों का जुड़ाव बढ़ने के साथ प्राथमिक शिक्षा का स्तर भी मजबूत हुआ है। सरकार सिर्फ प्राथमिक या फिर जूनियर हाईस्कूल लेवल तक ही अपनी नीतियां सीमित नहीं रखी। बल्कि दिल्ली सरकार ने उच्च शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी बड़ी पहल की।

वर्तमान में दिल्ली के सरकार स्कूल दुनियाभर के शिक्षकों और शिक्षाविदों के लिए प्रेरणादायक बन चुके हैं। दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था को देखने हाल ही में 15 अमेरिकी शिक्षकों एक दल पूर्वी दिल्ली पहुंचा और पश्चिमी विनोद नगर इलाके में दिल्ली सरकार (Delhi Government) द्वारा संचालित राजकीय सर्वोदय कन्या बाल विद्यालय का दौरा किया। ये शिक्षक यूएस सरकार की ओर से चलाए जा रहे फुलब्राइट टीचर्स एक्सचेंज के फुलब्राइट टीचर्स फॉर ग्लोबल क्लासरूम कार्यक्रम का हिस्सा हैं। यूएस के कुछ शिक्षकों ने बच्चों के साथ गेम खेले और बच्चों के साथ बातचीत भी की।
दिल्ली सरकार की शिक्षा व्यवस्था को सुधारने की नीति के पीछे कई अहम वजह हैं। सरकार का ये मानना है कि ऐसे कई बच्चे हैं, जो महंगी शिक्षा के लिए समर्थ नहीं है। उन्हें सरकार निजी विद्यालयों से बेहतर और सस्ती शिक्षा उपलब्ध कराई जा सके। एक रिपोर्ट के मुताबिक 70 फीसदी बच्चे प्राइवेट स्कूल की ओर चले गए हैं। इसकी वजह सरकारी स्कूलों में शिक्षा की घटती क्वालिटी है।
सरकारी स्कूलों में बेहतर शिक्षा नाम मिल पाने की वजह अभिभावक अब अपने बच्चों के निजी विद्यालयों में बढ़ाने का मजबूर हैं। ऐसे सरकारी स्कूल शिक्षा के प्रबंध में बड़े खर्चों के बाद भी जरूरत मंत परिवारों को बच्चों को फ्री और गुणवत्तायुक्त शिक्षा की सुविधा नहीं मिल पा रही है। ऐसे में दिल्ली सरकार की शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार बेहद अहम हैं।
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