दिल्ली सरकार शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ ले सकती है बड़ा एक्शन, मंत्री आतिशी ने सीएम को सौंपी रिपोर्ट: सूत्र

दिल्ली सरकार द्वारका एक्सप्रेसवे के लिए अधिग्रहित 19 एकड़ भूमि के मुआवजे में हुए अचानक वृद्धि को लेकर बड़ा एक्शन ले सकती है। सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि मामल में दिल्ली के मुख्य सचिव नरेश कुमार के बेटे का नाम सामने आने के मामले में प्राथमिक जांच रिपोर्ट सतर्कता मंत्री आतिशी ने दिल्ली सरकार को सौंप दी है। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं मामले में कई अधिकारियों की संलिप्तता सामने आई है। जिसके चलते दिल्ली से शीर्ष अधिकारियों पर गाज गिर सकता है।

दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार ने भ्रष्टाचार के मामलों में जीरो टालरेंस की नीति पर आगे बढ़ने की बात बार- बार दोहराई है। ऐस में द्वारका एक्सप्रेसवे के लिए बामनोली गांव में भूमि अधिग्रहण और मुआवजे में भ्रष्टाचार के आरोप लगने के बाद सतर्कता मंत्री आतिशी ने विभागों को भ्रष्टाचार के इस मुद्दे से संबंधित कोई भी फाइल मुख्य सचिव के माध्यम से न पारित ना कराने के निर्देश दिया दिए हैं।

Atishi over Bamnoli village Land acquisition

दरअसल, बामनोली गांव में भूमि अधिग्रहण से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के मामले में आरोप लग रहे हैं कि दिल्ली के मुख्य सचिव ने अपने बेटे की कंपनी को 315 करोड़ का फायदा पहुंचाने का प्रयास किया। इस मामले की विस्तृत जांच के लिए शिकायत सतर्कता मंत्री को भेजी गई। मामले में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को एक शिकायत की गई थी। जिसे सीएम ने जांच के लिए मामला सतर्कता मंत्री को भेजा था। इसकी जांच के लिए मंत्रीआतिशी ने निदेशक सतर्कता और मंडलायुक्त को पत्र लिखा था। सूत्रों के मुताबिक मामले की प्राथमिक जांच रिपोर्ट मिलने के बाद मंत्री इसे दिल्ली के सीएम केजरीवाल को सौंप दी है।

रिपोर्ट में गंभीर आरोप: सूत्र
दिल्ली सतर्कता विभाग की रिपोर्ट में बामनोली गांव में भूमि अधिग्रहण से जुड़े कथित भ्रष्टाचार की जांच को लेकर प्रारंभिक रिपोर्ट 670 पृष्ठों की है। जिसमें कई आपत्तिजनक तथ्यों का जिक्र किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया कि प्रथम दृष्टया मुख्य सचिव नरेश कुमार की डीएम दक्षिण-पश्चिम हेमंत कुमार और भूमि मालिकों के साथ मिलीभगत लगती है। सूत्रों के अनुसार, रिपोर्ट में मुख्य सचिव नरेश कुमार सहित दिल्ली के सतर्कता विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा घोटाले के पैमाने को 312 करोड़ रुपये से कम आंकने की साजिश का भी खुलासा किया गया है। रिपोर्ट में आगे कहा कि वास्तविक मुआवजा पुरस्कार में गड़बड़ी के चलते लाभार्थियों को 850 करोड़ रुपये का अवैध रूप से लाभ दिया गया।

दरअसल, 2013 बैच के आईएएस अधिकारी व दक्षिण पश्चिम दिल्ली के मजिस्ट्रेट अश्विनी कुमार ने जिले में अपने कार्यकाल के दौरान भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा 19 एकड़ भूमि अधिग्रहण के लिए मुआवजा राशि 41.5 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 353.8 करोड़ रुपये कर दी थी। जिसको लेकर जांच रिपोर्ट में गंभीर आरोपों के चलते दावा किया जा रहा कि केजरीवाल सरकार बड़ा एक्शन ले सकती है। मामले में कई बड़े अधिकारियों पर कार्रवाई संभव है।

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