दिल्ली के सरकारी स्कूल में पढ़े बढ़ई के बेटे को मिला एम्स में दाखिला, बताई डॉक्टर बनने की वजह
नई दिल्ली, 11 नवंबर: दिल्ली सरकार के स्कूल में पढ़ने वाले 490 से ज्यादा बच्चों ने इस साल नीट पास किया है। इन हुनरमंद छात्रों में आरपीवीवी किशन गंज के कुशाल गर्ग और आरपीवीवी सूरजमल विहार की ईशा जैन भी शामिल हैं। जिन्होंने नीट के एग्जाम में 720 में से 700 अंक हासिल किए। कुशाल ने अखिल भारतीय रैंक 168 और ईडब्ल्यूएस श्रेणी में 9वीं रैंक हासिल की है। दिल्ली एम्स ने पिछले साल 11 ईडब्ल्यूएस सीटों जारी की थी।

कुशाल गर्ग के कारपेंटर पिता डिप्रेशन के दौर से गुजर रहे हैं। उनकी मां मिर्गी से पीड़ित हैं। अनगिनत लोगों की तरह उनके परिवार ने भी कोविड -19 और लॉकडाउन के कारण भारी कठिनाइयों का सामना किया। कुशल को ऑनलाइन कक्षाओं में कई बाधाओं का सामना करना पड़ा। लेकिन इन चुनौतियों से बेपरवाह, कुशाल ने बड़ा लक्ष्य रखा और अब वह एम्स में प्रवेश पाकर न्यूरोसर्जन बनने के अपने सपने को हासिल करने के करीब हैं।
कुशाल गर्ग ने राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा (नीट) में 720 में से 700 अंक प्राप्त किए और अखिल भारतीय रैंक 165 हासिल की। गर्ग ने अपनी स्कूली शिक्षा दिल्ली सरकार के राजकीय प्रतिभा विकास विद्यालय से की। कुशाल की इस सफलता पर सीएम अरविंद केजरीवाल और डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने बधाई दी है। मनीष सिसोदिया ने ट्वीट कर लिखा कि, दिल्ली सरकार के एक स्कूल के छात्र कुशाल गर्ग ने इतिहास रचा, अखिल भारतीय रैंक 165, एम्स में सुरक्षित सीट। पिता 10वीं पास, बढ़ई और मां 12वीं पास, हाउस वाइफ। बधाई कुशाल। तुम पर गर्व है।
कुशाल ने बताया कि 20 नवंबर से शुरू होने वाले काउंसलिंग सत्र में सीटें आवंटित की जाएंगी, लेकिन अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान उनकी पहली पसंद है। एम्स मेरा ड्रीम कॉलेज है और मेरे पास कॉलेज में प्रवेश पाने का एक उच्च मौका है क्योंकि मैंने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के तहत नौवीं रैंक हासिल की है। मैं निश्चित रूप से एम्स को तरजीह दूंगा। कुशाल ने अपने दूसरे प्रयास में नीट पास किया। कुशान को एनजीओ दक्षिणा फाउंडेशन ने एक साल तक कोचिंग दी थी।
कुशाल उत्तरी दिल्ली के शास्त्री नगर में एक संयुक्त परिवार में रहते हैं। कुशाल ने बताया कि, कोविड -19 महामारी के कारण मुझे मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी में कई बाधाओं का सामना करना पड़ा। मेरे पिता लकड़ी के बक्से बेचते हैं, लेकिन कोविड में उन्होंने अपना व्यवसाय खो दिया। आर्थिक तंगी के कारण, मुझे ऑनलाइन कक्षाओं में भाग लेने में समस्याओं का सामना करना पड़ा। लेकिन बाद में मुझे स्कॉलरशिप मिली और एक साल के लिए (कोचिंग के लिए) पुणे चला गया और परीक्षा पास कर ली।
कुशाल ने अपने परिवार की समस्याओं को देखते हुए कहा कि, मैंने देखा है कि मेरी मां को मिर्गी के दौरे पड़ते हैं और मेरे पिता की अवसाद की समस्या है ... वे अभी भी पीड़ित हैं ... और उचित इलाज नहीं मिल सका क्योंकि वे इसे वहन नहीं कर सके। इसलिए मैंने न्यूरोलॉजी में विशेषज्ञता के साथ डॉक्टर बनने का फैसला किया।












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