सुप्रीम कोर्ट पहुंची दिल्ली सरकार, कहा- सिविल अधिकारी नहीं मान रहे आदेश
दिल्ली सरकार ने प्रशासनिक अधिकारियों के बर्ताव को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में कहा है कि सिविल सेवा के अधिकारी सरकार के निर्देश का पालन नहीं कर रहे हैं।
दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की है कि इस मामले को जल्द से जल्द सुनवाई के लिए लिस्ट किया जाए। दिल्ली सरकार ने केंद्र सरकार के एनसीटीडी एक्ट, 2023 को चुनौती दी है। इस एक्ट को संसद के दोनों सदन में हाल ही में पास किया गया है।

दिल्ली सरकार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार दोनों को इस मामले की रिपोर्ट चार हफ्तों के भीतर तैयार करने को कहा है। गौर करने वाली बात है कि हाल ही में संसद में जो बिल पास हुआ है उसके बाद दिल्ली के प्रशासनिक अधिकारी राज्य सरकार की बजाए केंद्र सरकार के निर्देश का पालन करेंगे।
बता दें कि दिल्ली सर्विस एक्ट का अरविंद केजरीवाल सरकार शुरुआत से विरोध कर रही है और इसे वापस लिए जाने की मांग कर रही है। अरविंद केजरीवाल ने इससे पहले कहा था कि इस अधिनियम को वापस लेना चाहिए, इस कानून की वजह से दिल्ली बर्बाद हो जाएगी।
केजरीवाल ने कहा था कि दिल्ली सर्विस एक्ट अधिकारियों को चुनी हुई सरकार के खिलाफ खुलकर विद्रोह करने का लाइसेंस देता है, जोकि कतई ठीक नहीं है। अधिकारी चुने हुए मंत्रियों के आदेश मानने से इनकार कर रहे हैं, क्या इस तरह से देश का कोई राज्य चल सकता है। इस कानून से दिल्ली बर्बाद हो जाएगी। भाजपा यही चाहती है, लिहाजा इस अधिनियम को बिना देर किए वापस लिया जाना चाहिए।
वहीं दिल्ली सरकार में मंत्री आतिशी कहा थआ कि अफसरों की बगावत की जो बात कही थी वो सच होता हुआ दिख रहा है। दिल्ली में मुख्य सचिव के बाद वित्त सचिव ने भी 40 पन्नों का पत्र लिखकर चुनी हुई सरकार का आदेश मानने से इनकार कर दिया है। दिल्ली सर्विस एक्ट का हवाला देकर सरकार के तमाम कामों को रोकने की लगातार कोशिश की जा रही है।












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