Delhi Election 2025: दिल्ली की वो 9 सीटें जहां हो सकता है बड़ा उलटफेर, कांग्रेस की वजह से दिलचस्प हुआ मुकाबला?
Delhi Election 2025: दिल्ली विधानसभा चुनाव में इस बार 8 फरवरी को क्या नतीजे आएंगे, अभी कुछ भी कह पाना बहुत मुश्किल है। चुनाव मैदान में उतरीं तीनों प्रमुख पार्टियों ने वादे ताबड़-तोड़ किए हैं। चुनावी रेवड़ियों की झरी लगा दी गई है। आम आदमी पार्टी (AAP) मुख्य विपक्षी बीजेपी से अपना मुकाबला मान रही है, लेकिन कांग्रेस इस चुनाव को त्रिकोणीय बनाने में जुटी हुई है। तीन दलों के इस महामुकाबले में अगर 2020 के चुनाव के नतीजे देखें तो 70 में से 9 सीटों पर नतीजे चौंकाने वाले हो सकते हैं।
हम जिन 9 विधानसभा सीटों की बात कर रहे हैं, वो ऐसी सीटें हैं जहां पिछले चुनाव में 4 हजार से भी काफी कम वोटों के अंतर से हार और जीत तय हुई थी और बड़ी बाजी सत्ताधारी आम आदमी के हाथ लगी थी, जिसने 9 में से सबसे ज्यादा सीटों पर कब्जा किया था।

Delhi Election 2025: कम मार्जिन वाली 9 सीटों पर इस बार क्या होगा?
2020 के दिल्ली विधानसभा चुनावों में कम मार्जिन वाली 9 सीटों में आप को 7 सीटें मिली थीं। ये सीटें हैं, बिजवासन, छतरपुर, शालीमार बाग,आदर्श नगर,कस्तूरबा नगर,कृष्णा नगर और पटपड़गंज। बाकी 2 सीटें- लक्ष्मीनगर और बदरपुर बीजेपी के खाते में गई थी। इन 9 सीटों में से 6 में जीत या हार का अंतर कांग्रेस को मिले वोट से कम था और एक पर बीएसपी को इससे काफी ज्यादा वोट मिले थे।
कांग्रेस को जिन सीटों पर हार या जीत की मार्जिन से ज्यादा वोट मिले थे,वे हैं- बिजवासन,आदर्शनगर,कस्तूरबा नगर,कृष्णानगर,छतरपुर और लक्ष्मीनगर, वहीं बीएसपी को बदरपुर में हार-जीत के अंतर से ज्यादा वोट मिले थे।
Delhi Election 2025: 2020 में दो सीटों पर बीजेपी ने किया था बड़ा उलटफेर
इन 9 सीटों में से लक्ष्मीनगर में 2015 के चुनाव में भी बहुत नजदीकी मामला रहा था और आम आदमी पार्टी तब यहां सिर्फ 4,846 वोटों से बीजेपी से जीती थी। जबकि, 2020 में यहां बीजेपी सिर्फ 880 वोटों से जीती। इसी तरह से बदरपुर में भी भाजपा ने आप से मात्र 3,719 वोटों से यह सीट छीन ली थी। बीएसपी को यहां 10,436 वोट मिले थे। 2015 में आप बदरपुर में 47,583 वोटों के विशाल अंतर से चुनाव जीती थी।
Delhi Election 2025: 7 सीटों पर आम आदमी पार्टी बड़ी मुश्किल से जीत सकी थी चुनाव
2020 में सबसे नजदीकी मुकाबला बिजवासन में देखने को मिला था, जहां आम आदमी ने सिर्फ 753 वोटों से बीजेपी को हराया था। ऐसे ही आप के जीत का अंतर आदर्श नगर में बहुत ज्यादा गिर गया था। 2020 में वह यह सीट 1,589 वोटों से जीती, जबकि यहीं 2015 में उसकी जीत का अंतर 20 हजार से ज्यादा वोटों का था।
यही हाल आप के साथ पटपड़गंज में हुआ, जहां 2015 में मनीष सिसोदिया 28 हजार से अधिक वोटों से जीते थे, लेकिन 2020 में वह बीजेपी को मात्र 3,207 वोटों से आगे निकल सके। इन दो चुनावों में इस सीट पर भाजपा का वोट शेयर 5 साल में 33% से बढ़कर 47% पहुंच गया। यही वजह है कि अबकी बार सिसोदिया ज्यादा सेफ सीट की तलाश में जंगपुरा पहुंच गए हैं, जहां पिछली बार उनकी पार्टी 16 हजार से भी ज्यादा वोटों से जीती थी।
आप का ग्राफ दो चुनावों में छतरपुर और कस्तूरबा नगर में भी जबरदस्त तरीके से गिरा है। छतरपुर में जहां 2015 में पार्टी 20 हजार से ज्यादा वोटों से जीती थी, वहीं 2020 में जीत का अंतर सिर्फ 3,720 वोटों का रह गया।
कस्तूरबा नगर में आप 2015 में 15,896 वोटों से जीती थी और 2020 में वह घटकर 3,165 रह गया। इन पांच वर्षों में कांग्रेस ने अपना वोट शेयर यहां 11% से बढ़ाकर 21% के पार कर लिया और आप का रंग फीका पड़ता नजर आया।
शालीमार बाग और कृष्णा नगर में भी आप की बढ़त कम पड़ती नजर आई। शालीमार बाग में उसकी जीत का अंतर 10 हजार से ज्यादा से घटकर सिर्फ 3,440 वोटों पर अटक गया और कृष्णा नगर में भी यह जहां 4 हजार से अधिक वोटों से जीती थी, 2020 में सिर्फ 2,277 वोटों से ही बीजेपी पर बढ़त बना सकी।












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