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Delhi Exit poll: दिल्‍ली चुनाव में एग्जिट पोल से पहले सामने आया हार-जीत का नया अनुमान, AAP-BJP को कितनी सीटें?

Delhi Election Prediction 2025: दिल्‍ली विधानसभा चुनाव 2025 में एक फेज में सभी 70 सीटों पर 5 फरवरी को वोट डाले गए। दिल्‍ली में कुल 57.70 प्रतिशत मतदान हुआ। एग्जिट पोल व वोटिंग से पहले हार-जीत को लेकर नया अनुमान सामने आया है, जिसमें आम आदमी पार्टी की सरकार बनती तो दिख रही है, मगर साल 2015 और 2020 जैसे जीत मिलती नहीं दिख रही।

दिल्‍ली विधानसभा चुनाव 2025 में आम आदमी पार्टी को 10 साल की एंटी इंनकम्‍बेंसी, पार्टी के अंदर नाराजगी का नुकसान उठाया पड़ सकता है। उधर, भाजपा ने भी अपनी चुनाव स्‍ट्रैटेजी में बदलाव कर मजबूत स्थिति बना ली है। ऐसे में दिल्‍ली चुनाव 2025 में भाजपा-आप के बीच सीधी टक्‍कर होने वाली है।

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Delhi Election Prediction 2025

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दैनिक भास्‍कर ने अपनी टीम की ग्राउंड रिपोर्ट, पॉलिटिकल एक्‍सपर्ट और सीनियर पत्रकारों से बातचीत के आधार पर दिल्‍ली विधानसभा चुनाव 2025 के संभावित परिणाम को लेकर रिपोर्ट प्रकाशित की है, जिसके अनुसार दिल्‍ली की सभी 70 सीटों में से आम आदमी पार्टी को 43 से 47 सीटों पर जीत मिल सकती है। मतलब आप की सरकार बनने की संभावना है। वहीं, भाजपा 23-27 सीटें जीत सकती है।

दिल्‍ली विधानसभा चुनाव 2015 में आदमी पार्टी ने 67 और भाजपा ने 3 सीटें जीती थीं। इसी तरह साल 2020 के चुनाव में आप ने 62 और भाजपा ने 8 सीटों पर जीत दर्ज की थी। दिल्‍ली चुनाव 2025 में सरकार को भाजपा बनने का अनुमान है, मगर आप सीटें 60 पार से घटकर 43-47 व भाजपा की सीटें सिंगल आंकड़े से बढ़कर 20 पार बताई जा रही है।

आम आदमी पार्टी की सीटें घटने की वजह

  • 10 साल की सत्‍ता विरोधी लहर
  • केजरीवाल की ईमानदार वाली छवि को नुकसान
  • शीशमहल व करप्‍शन जैसे आरोप
  • चुनाव से पहले 8 विधायकों का इस्‍तीफा
  • आम आदमी पार्टी के अंदरखाने नाराजगी
  • कांग्रेस दिल्‍ली चुनाव 2025 में काट सकती आप के वोट

Delhi Election 2025: वोटों का समीकरण और संभावित रुझान

दिल्ली की राजनीति में वोटिंग समीकरणों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। 2015 से दिल्ली की सत्ता पर काबिज आम आदमी पार्टी (AAP) और लंबे समय से सत्ता से बाहर रही भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच इस बार भी कांटे की टक्कर मानी जा रही है। 2015 में AAP ने प्रचंड जीत दर्ज करते हुए 67 सीटें जीती थीं, जबकि BJP मात्र 3 सीटों पर सिमट गई थी। 2020 में AAP ने 62 सीटें जीतीं और BJP 8 सीटों तक पहुंच सकी। कांग्रेस का प्रदर्शन दोनों चुनावों में निराशाजनक रहा, जबकि 2008 में कांग्रेस ने 43 सीटों पर जीत दर्ज की थी। तब उसे 40.3% वोट मिले थे, जो 2020 में घटकर 4.3% रह गए।

प्रमुख वोट बैंक और उनका असर

दिल्ली की कुल जनसंख्या में मुस्लिम समुदाय की भागीदारी लगभग 12.9% है। नॉर्थ ईस्ट दिल्ली, ईस्ट दिल्ली, चांदनी चौक और नई दिल्ली की विधानसभा सीटों पर इनका खासा प्रभाव है। वहीं, जाट और गुर्जर समुदाय के वोटर्स की हिस्सेदारी 17 से 20% के बीच मानी जाती है, जो दिल्ली की लगभग 50 विधानसभा सीटों को प्रभावित करते हैं।

पूर्वांचली वोटर्स दिल्ली में एक बड़ा वोट बैंक हैं, जिनकी आबादी कुल मतदाताओं का 25% मानी जाती है। इनका बुराड़ी, बादली, संगम विहार, पालम, करावल नगर और पटपड़गंज जैसी 25 सीटों पर सीधा असर पड़ता है। दिल्ली में दलित वोटर्स की हिस्सेदारी भी महत्वपूर्ण है, जो कुल जनसंख्या का करीब 18% हैं। ये वर्ग चुनाव परिणामों को निर्णायक रूप से प्रभावित कर सकता है।

दिल्‍ली चुनाव 2025 में जनता किस पर करेगी भरोसा?

AAP सरकार ने महिलाओं के लिए फ्री बस यात्रा जैसी योजनाएं चलाई हैं, जिससे महिलाओं के बीच उसकी लोकप्रियता बरकरार है। शशि गार्डन की रहने वाली राधिका सोनी इस सुविधा से खुश हैं, लेकिन महंगाई से चिंतित भी हैं। वे कहती हैं, "बस में सफर फ्री है, लेकिन सरकार राशन और अन्य जरूरी सामान पर राहत नहीं दे रही। सब्जियों के दाम बहुत बढ़ गए हैं। मैं हमेशा से केजरीवाल को वोट देती आई हूं, इस बार भी वही विकल्प है।"

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, अरविंद केजरीवाल की जेल से रिहाई के बाद AAP कमजोर स्थिति में थी, लेकिन चुनावी रणनीति बदलने से पार्टी ने फिर से मजबूती हासिल कर ली। BJP भी इस बार आक्रामक प्रचार अभियान चला रही है।

जाट, गुर्जर और पूर्वांचली वोटर्स का झुकाव किस ओर?

राजनीतिक विश्लेषक सुनील कश्यप बताते हैं कि AAP में पूर्वांचली नेताओं की संख्या ज्यादा है। पार्टी की लीडरशिप में दुर्गेश पाठक, सौरभ भारद्वाज, गोपाल राय और संजय सिंह जैसे बड़े नाम शामिल हैं। इस वजह से पिछले तीन चुनावों से पूर्वांचली वोटर्स का समर्थन AAP को मिलता आया है।

हालांकि, BJP ने भी पूर्वांचली वोटर्स को साधने के लिए संगठनात्मक स्तर पर प्रयास तेज कर दिए हैं। दिनेश कुमार ठाकुर, जो बुराड़ी में रहते हैं, कहते हैं, "केजरीवाल सरकार ने दिल्ली के विकास के लिए कुछ नहीं किया। पहले की सरकारें बेहतर थीं। अब तो पूरी दिल्ली में बाहरी लोग आकर बस गए हैं, जिससे अपराध बढ़ा है। BJP इस मुद्दे को सही तरीके से उठा रही है।"

इसके अलावा, दिल्ली में उत्तराखंडी वोटर्स की भी अच्छी खासी संख्या है। यहां लगभग 12 से 14 लाख उत्तराखंडी वोटर्स हैं, जो कुल मतदाताओं का 8 से 10% हिस्सा बनाते हैं।

दिल्‍ली विधानसभा चुनाव 2025 में कौन किस पर भारी?

दिल्ली का चुनावी माहौल गर्म हो चुका है। AAP जहां अपने काम के दम पर चुनाव लड़ रही है, वहीं BJP हिंदुत्व और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों को जोर-शोर से उठा रही है। कांग्रेस अभी भी अपना जनाधार वापस पाने की कोशिश में लगी है। अब देखना होगा कि दिल्ली के मतदाता किस पर भरोसा जताते हैं और किस पार्टी को सत्ता की चाबी सौंपते हैं।

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