दिल्ली सरकार और राज्यपाल के बीच फिर ठनी, डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया बोले- शिक्षकों का मजाक उड़ा रहे एलजी
दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने उपराज्यपाल वीके सक्सेना पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने एलजी के एक बयान को दिल्ली के शिक्षकों का मजाक उड़ाने वाला बताया।

दिल्ली के सरकारी स्कूलों में एक दशक के भीतर विद्यार्थियों की संख्या को लेकर दिल्ली सरकार और उपराज्यपाल एक बार फिर आमने- सामने हैं। दिल्ली के एलजी ने एक बयान में कहा कि सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों औसत उपस्थिति हर साल गिर रही है। साल 2012-2013 में 70.73 प्रतिशत से गिरकर 2019-2020 में 60.65 प्रतिशत हो गई है।
एलजी के इस बयान के बाद दिल्ली (Delhi) के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया (Manish Siosoia) ने शनिवार को उपराज्यपाल वीके सक्सेना (VK Saxena) पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने उपराज्यपाल वीके सक्सेना पर शिक्षा विभाग के खिलाफ 'झूठे आरोप' लगाने और दिल्ली में कार्यरत शिक्षकों का 'मजाक' उड़ाने का आरोप लगाया।
डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने कहा कि एलजी ने सीएम अरविंद केजरीवाल को शुक्रवार को एक पत्र लिखा, जो कि राजनीतिक मकसद से लिखा गया। सिसोदिया ने कहा कि पत्र में उन्होंने शिक्षा विभाग के खिलाफ झूठा आरोप लगाया जो दिल्ली के शिक्षकों और विद्यार्थियों का अपमान है। दिल्ली के डिप्टी सीएम ने कहा, "एलजी ने एक राजनीतिक मकसद से पत्र लिखा और कहा कि दिल्ली के शिक्षा विभाग में कोई काम नहीं किया गया है। उनके आरोप दिल्ली के छात्रों और शिक्षकों का अपमान है। मैं एलजी (Delhi LG) से अनुरोध कर रहा हूं कि हमारे शिक्षकों के काम का मजाक न उड़ाएं।"
डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने कहा कि इस बात की चर्चा है कि दिल्ली के सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या 16 लाख से घटकर 15 लाख हो गई, जबकि हकीकत यह है कि छात्रों की संख्या बढ़कर 18 लाख हो गई। हमारे शिक्षा विभाग ने स्कूलों के बुनियादी ढांचे में भी बदलाव किया है।' टेंट वाले स्कूल अब 'टैलेंट वाले स्कूल' में बदल गए हैं।
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