Delhi Dussehra: राष्ट्रपति मुर्मू ने प्रतीकात्मक रुप से किया रावण दहन, बारिश के कारण PM Modi का कार्यक्रम रद्द
Delhi Dussehra 2025: राजधानी दिल्ली में इस बार दशहरा का पर्व कुछ अलग ही नज़ारे के साथ मनाया जा रहा है। रावण दहन से ठीक पहले गुरुवार को दिल्ली-एनसीआर के कई इलाकों में हल्की बूंदाबांदी हुई, जिससे रामलीला मैदानों में लगे लंबे-लंबे और विशाल रावण के पुतले भीग गए।
इसके बावजूद लोगों का उत्साह ज़रा भी कम नहीं हुआ और शाम होते ही भव्य दशहरा समारोह की रौनक देखने लायक था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बारिश के कारण पूर्वी दिल्ली के पटपड़गंज स्थित इंड्रप्रस्थ रामलीला समिति द्वारा आयोजित दशहरा कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए। यहां 72 फीट उंचे रावण का दहन किया जाना था।
जानकारी के मुताबिक पीएम मोदी शाम आयोजन स्थल पर पहुंच कर पारंपरिक तरीके से रावण दहन करने वाले थे।दशहरा को अच्छाई की बुराई पर जीत का पर्व माना जाता है और हर साल इसकी भव्यता पूरे देश में देखने को मिलती है। इसके साथ ही राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी लवकुश रामलीला समीति में तीर चलाकर रावण का दहन किया।
सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद
पूर्वी दिल्ली के डीसीपी अभिषेक धनिया ने मीडिया को बताया कि इस बार विशेष सुरक्षा इंतज़ाम किए गए हैं। पूरे जिले में लगभग 2500 पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। आयोजन स्थलों और रूट्स का पूरा सुरक्षा ऑडिट कर लिया गया है।
अधिकारियों ने बताया कि भीड़ प्रबंधन और आपातकालीन इंतज़ामों पर विशेष ध्यान दिया गया है ताकि किसी तरह की अफरातफरी न हो। पूर्वी दिल्ली में कुल 25 रामलीला समितियों द्वारा दशहरा उत्सव का आयोजन किया जा रहा है। इनमें सबसे बड़े आयोजन इंड्रप्रस्थ रामलीला समिति और अन्य प्रमुख मैदानों पर हो रहे हैं।
प्रधानमंत्री का है खास जुड़ाव
यह पहला अवसर नहीं है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिल्ली के दशहरा उत्सव में शामिल हो रहे हों। पिछले वर्ष वे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ लालकिला मैदान में आयोजित लव-कुश रामलीला के भव्य आयोजन में पहुँचे थे। वहां उन्होंने रावण, मेघनाद और कुम्भकर्ण के पुतलों पर तीर चलाकर पारंपरिक रावण दहन किया था। उस मौके पर पीएम मोदी ने दशहरा के संदेश पर जोर देते हुए कहा था कि यह त्योहार साहस, शांति और सत्य की जीत का प्रतीक है।
दिल्ली में दशहरा उत्सव की भव्यता
दिल्ली में दशहरा का पर्व हमेशा से ही आकर्षण का केंद्र रहा है। इस मौके पर हर साल हजारों की संख्या में लोग विभिन्न रामलीला मैदानों में जुटते हैं और रावण दहन का नज़ारा देखते हैं। इस बार भी लोगों की भारी भीड़ उमड़ने की उम्मीद है। इंड्रप्रस्थ रामलीला समिति द्वारा बनाए गए रावण, मेघनाद और कुम्भकर्ण के विशालकाय पुतले खास आकर्षण का केंद्र रहा।
बूंदाबांदी से थोड़ी परेशानी ज़रूर हुई है, लेकिन आयोजकों का कहना है कि सुरक्षा और प्रबंधन की पूरी तैयारी है। पुतलों को भीगने से बचाने के उपाय किए गए हैं और समय पर रावण दहन सुनिश्चित किया जाएगा। दशहरा हर साल यह संदेश देता है कि चाहे बुराई कितनी भी बड़ी क्यों न हो, अच्छाई की जीत निश्चित है। रावण दहन इसी बात का प्रतीक है कि अहंकार, अन्याय और अत्याचार का अंत तय है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी से यह आयोजन और भी खास बन गया है।












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