दिल्ली: मुख्य सचिव पिटाई मामले में Delhi CM केजरीवाल आरोप मुक्त, जानिए क्या था पूरा मामला
नई दिल्ली, 11 अगस्त: दिल्ली की एक अदालत ने दिल्ली के तत्कालीन मुख्य सचिव अंशु प्रकाश के साथ मारपीट करने के आरोप में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और 9 अन्य विधायकों को बरी कर दिया है। हालांकि कोर्ट ने इस मामले में आम आदमी पार्टी के 2 विधायकों अमानतुल्लाह खान और प्रकाश जरवाल को आरोपों से मुक्त नहीं किया है। दरअसल, फरवरी 2018 में तत्कालीन दिल्ली के मुख्य सचिव अंशु प्रकाश ने मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के विधायकों पर सीएम आवास में मारपीट का आरोप लगाया था।
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वहीं बुधवार को दिल्ली की कोर्ट ने इस मामले में सीएम अरविंद केजरीवाल को आरोपों से मुक्त कर दिया है। इसके साथ ही डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया और 9 विधायकों को भी राहत मिली है। वहीं इस पूरे मामले में मनीष सिसोदिया ने कहा कि यह न्याय और सच्चाई की जीत का दिन है। कोर्ट ने कहा कि मामले में सभी आरोप झूठे और निराधार थे। सीएम को आज उस झूठे मामले में बरी कर दिया गया। हम कह रहे थे कि आरोप झूठे थे। सीएम के खिलाफ साजिश रची गई थी।
बता दें कि मारपीट के मामले में दिल्ली पुलिस ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया के खिलाफ अगस्त 2018 में चार्जशीट दायर की थी। जिसमें सीएम केजरीवाल और डिप्टी सीएम सिसोदिया के अलावा 11 विधायकों को आरोपी बनाया गया था। पूरे मामले में कुल 13 लोगों के नाम चार्जशीट बनाई गई थी। पुराने घटनाक्रम पर एक बार फिर नजर डालें तो पूरा मामला 19 फरवरी 2018 का है।
जानकारी के मुताबिक तत्कालीन चीफ सेक्रेटरी अंशु प्रकाश रात मीटिंग में हिस्सा लेने सीएम आवास पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी के विधायकों ने सीएम के सामने उनके साथ मारपीट की। इस मामले में केजरीवाल के पूर्व सलाहकार वीके जैन को सरकारी गवाह बनाया था। यहां तक की पिटाई के आरोप में दो विधायक प्रकाश जरवाल और अमानतुल्लाह खान को जेल भी जाना पड़ा था, हालांकि बाद में जमानत पर रिहा हो गए। मामला इतना बढ़ गया था कि कई दिनों तक अफसर हड़ताल पर भी बैठे रहे थे।












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