Delhi Chunav Result 2025: दिल्ली में क्यों हारी AAP? ये 3 बातें गईं केजरीवाल के खिलाफ
Delhi Chunav Result 2025: दिल्ली विधानसभा चुनावों के लिए हुई वोटों की गिनती में सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (AAP) बुरी तरह हार गई है। वहीं मुख्य विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने उसके हाथ से सत्ता छीन ली है। इस हार के साथ आप का लगातार चौथी बार सरकार बनाने का सपना चकनाचूर हो गया। ऐसे में यह विश्लेषण का विषय है कि आम आदमी पार्टी और उसके सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल की नेतृत्व में हुई पार्टी की हार की वजहें क्या हैं?
दिल्ली में 1993 के बाद यह दूसरा मौका है जब बीजेपी दिल्ली की सत्ता में बैठेगी। पिछले 27 वर्षों (1998)से वह सत्ता से दूर रही है। इस दौरान दिल्ली विधानसभा के 6 चुनाव हुए और भाजपा को हर बार हार मिली। आइए समझते हैं कि अगर केजरीवाल की पार्टी को इस चुनाव में हार मिली है तो उसके पीछे की तीन मुख्य वजहें क्या हो सकती हैं?

Delhi Vidha Sabha Chunav result: पहला) AAP के खिलाफ जबरदस्त सत्ता-विरोधी लहर (Anti Incumbency)
दिल्ली चुनावों में आम आदमी पार्टी के पिछड़ने की सबसे बड़ी वजह 12 वर्षों की एंटी-इंकंबेंसी मानी जा सकती है। क्योंकि, 2013 में ही पहली बार कांग्रेस के समर्थन से आप को सरकार बनाने का मौका मिला था। फिर 2015 और 2020 के चुनावों में उसे बड़ी जीत मिली। 2022 से दिल्ली नगर निगम (MCD) भी आप के कब्जे में है, इसलिए उसके खिलाफ मतदाताओं की नाराजगी का दायरा भी बढ़ा है।
जिन बातों को लेकर आप सरकार के खिलाफ दिल्ली की आम जनता में नाराजगी बहुत ज्यादा दिखी है, उसमें गंदे सीवर की समस्या, प्रदूषण का जानलेवा संकट, खस्ताहाल हो चुकी सड़कें, यमुना की सफाई के बार-बार के गलत साबित हुए दावे, कई इलाकों में गंदे पानी की सप्लाई, फ्री बिजली के दावों के बीच भारी भरकम बिल शामिल हैं।
Delhi Chunav Result 2025: दूसरा) 'शीशमहल' वाला दाग!
दिल्ली में विपक्षी बीजेपी के आम आदमी पार्टी सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल के सरकारी आवास पर जनता के पैसों से हुए अप्रत्याशित खर्च के आरोपों ने भी पार्टी के खिलाफ माहौल बनाने में बहुत बड़ा रोल निभाया है।
जिस दौर में दिल्ली की आम जनता कोविड की वजह से जान बचाने के लिए संघर्ष कर रही थी, उस दौरान तत्कालीन सीएम के आवास को आलीशान बनाने के लिए उसपर कथित रूप से पानी की तरह पैसे बढ़ाए जाने की घटना ने आम आदमी पार्टी की पूरी राजनीति को ही सवालों के घेरे में ला दिया।
क्योंकि, केजरीवाल ने आम आदमी बनकर राजनीति शुरू की थी, लेकिन बीजेपी मतदाताओं को यह समझाने में सफल हुई कि इनके बताने और असलियत के चेहरे अलग हैं। यह आम आदमी बनकर वोट तो लेते हैं, लेकिन असल में आलीशान जीवन जीने के शौकीन हैं और जनता की तकलीफों से इन्हें कोई मतलब नहीं है।
उस दौरान केजरीवाल के घर के भीतर का एक शानदार डाइनिंग टेबल पर डिनर वाला वीडियो भी वायरल हुआ, जिसके दम पर विपक्ष इनपर कथनी और करनी में अंतर साबित करने में सफल हुआ। बाद में कांग्रेस ने भी आप और केजरीवाल को 'शीशमहल'वाले मुद्दे पर घेरकर उनकी जमीन कमजोर करने का काम किया।
Delhi Chunav Result 2025: तीसरा) शराब घोटाला और भ्रष्टाचार के अन्य मामले
आम आदमी पार्टी और केजरीवाल के खिलाफ शराब घोटाले और भ्रष्टाचार के अनेकों मामले ने भी खेल बिगाड़ने का काम किया। केजरीवाल मुख्यमंत्री रहते तिहाड़ जेल गए और फिर भी इस्तीफा नहीं दिया। उन्होंने कुर्सी तब छोड़ी जब सुप्रीम कोर्ट ने जमानत देते वक्त सख्त शर्तें लगा दीं, जिससे उन्हें सीएम की तरह काम करना नामुमकिन हो गया।
केजरीवाल के अलावा, उपमुख्यमंत्री रहते हुए मनीष सिसोदिया और मंत्री रहते हुए सत्येंद्र जैन भी जेल गए। पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह को भी जेल जाना पड़ा। आप भले ही करती रही कि केंद्र की बीजेपी सरकार उनके नेताओं को फंसाती रही, लेकिन शायद पार्टी वोटरों को यह समझाने में असफल रही कि अगर भाजपा फंसाती रही तो सुप्रीम कोर्ट से भी जमानत मिलने में महीनों की देरी क्यों हुई और फिर बेल के लिए कठोर शर्तें क्यों लगाई गईं?
इसके अलावा दिल्ली सरकार के विभागों में आम जनता को काम करवाने में परेशानियों का सामना करना पड़ा और कभी केजरीवाल के कट्टर सपोर्टर रहे ऑटो वालों ने भी इनके विभागों को माफिया का राज बताया। मुख्य रूप से यही तीन कारण रहे हैं, जिनसे आप की 'झाड़ू'बिखर गई है।












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