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Delhi Chandni Chowk: चांदनी चौक से लटकते तार होंगे गायब,दिल्ली की बिजली पर CM रेखा गुप्ता का मेगा प्लान

Delhi Chandni Chowk: दिल्ली की सियासत में विकास और विरासत को साथ लेकर चलने का दावा अक्सर सुनने को मिलता है. लेकिन गुरुवार (26 फरवरी) को राजधानी में जो ऐलान और शिलान्यास हुए, उन्होंने इस दावे को जमीन पर उतारने की कोशिश की है. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने चांदनी चौक में ओवरहेड बिजली के तारों को भूमिगत करने की बड़ी परियोजना की शुरुआत की.

साथ ही मंडोली में नए 66/11 केवी जीआईएस ग्रिड सब-स्टेशन और चार बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम प्रोजेक्ट्स की नींव रखी. सरकार का संदेश साफ है. दिल्ली की बिजली व्यवस्था को आधुनिक, सुरक्षित और भविष्य के लिए तैयार बनाया जाएगा.

Delhi Chandni Chowk

चांदनी चौक में अंडरग्राउंड केबलिंग, विरासत भी सुरक्षित, सप्लाई भी मजबूत

पुरानी दिल्ली की पहचान माने जाने वाले Chandni Chowk में 28 ऐतिहासिक गलियों और सड़कों पर फैले झूलते तार अब इतिहास बनने वाले हैं. करीब 159.75 करोड़ रुपये की लागत से 52.5 किलोमीटर लंबी बिजली लाइनों को जमीन के नीचे डाला जाएगा. इस काम में 500 नए फीडर पिलर, सजावटी स्ट्रीट लाइट पोल और मॉनिटरिंग के लिए आधुनिक डिजिटल ट्विन तकनीक का इस्तेमाल होगा.

यह परियोजना दिल्ली सरकार और BSES Yamuna Power Limited के सहयोग से शुरू की गई है. काम चरणबद्ध तरीके से रात में होगा ताकि बाजार और ट्रैफिक पर असर कम पड़े. लगभग 10 हजार उपभोक्ताओं को सीधा फायदा मिलेगा. आग लगने के खतरे और मौसम के कारण होने वाली बिजली कटौती में कमी आने की उम्मीद है.

मुख्यमंत्री ने कहा कि चांदनी चौक सिर्फ बाजार नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत का प्रतीक है. वर्षों से लटकते तार इसकी खूबसूरती पर दाग थे और सुरक्षा के लिए भी खतरा थे. उन्होंने यह भी संकेत दिया कि पहले घोषित 100 करोड़ रुपये की विकास राशि जरूरत के अनुसार 1000 करोड़ रुपये तक बढ़ाई जा सकती है. 28 सड़कों के पुनर्विकास का काम शुरू हो चुका है.

मुख्यमंत्री ने शाहजहानाबाद पुनर्विकास बोर्ड की जिम्मेदारी अपने पास रखते हुए साफ किया कि सड़कों, पार्किंग, अतिक्रमण और मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं का समाधान प्राथमिकता रहेगा.

मंडोली में नया ग्रिड. 1.5 लाख लोगों को मिलेगा स्थिर वोल्टेज

उत्तर-पूर्वी दिल्ली के लिए मंडोली में 66/11 केवी जीआईएस ग्रिड सब-स्टेशन बनाया जा रहा है. 63 एमवीए क्षमता वाले इस प्रोजेक्ट पर करीब 55.5 करोड़ रुपये खर्च होंगे और इसे 18 महीने में पूरा करने का लक्ष्य है. मंडोली, हर्ष विहार, बैंक कॉलोनी और आसपास के इलाकों के करीब 1.5 लाख उपभोक्ताओं को स्थिर और भरोसेमंद बिजली मिलेगी.

Rajiv Gandhi Super Speciality Hospital, मंडोली जेल और डीटीसी ईवी बस डिपो जैसे अहम संस्थानों को भी बेहतर सप्लाई सुनिश्चित होगी. वोल्टेज में उतार-चढ़ाव और बार-बार होने वाली कटौती में बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है.

चार BESS प्रोजेक्ट. पीक आवर में नहीं जाएगी बिजली

गर्मी के दिनों में बढ़ती मांग को देखते हुए चार नए बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम प्रोजेक्ट्स की नींव रखी गई है. ये प्रोजेक्ट्स BSES Rajdhani Power Limited के तहत विकसित होंगे. कुल 55.5 मेगावाट और 111 मेगावाट आवर क्षमता जुड़ने से लगभग 2.22 लाख उपभोक्ताओं को लाभ मिलेगा.

शिवालिक, द्वारका के जी-5 और जी-7 सेक्टर तथा गोयला खुर्द में ये परियोजनाएं मार्च 2027 से पहले शुरू करने का लक्ष्य है. इन बैटरी सिस्टम से पीक आवर लोड शेडिंग कम होगी, वोल्टेज स्थिर रहेगा और ग्रिड मजबूत होगा. इसे स्वच्छ और टिकाऊ ऊर्जा की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है.

ऊर्जा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि 436 करोड़ रुपये की योजना के तहत चांदनी चौक समेत कई इलाकों में ओवरहेड वायरिंग को भूमिगत किया जा रहा है. उन्होंने यह भी बताया कि किलोखरी में 20 मेगावाट का बीईएसएस प्रोजेक्ट देश का पहला वाणिज्यिक स्टैंडअलोन प्रोजेक्ट है. इसके अलावा 3000 करोड़ रुपये की लंबित परियोजनाओं को मंजूरी और अगले तीन साल के लिए 17000 करोड़ रुपये का रोडमैप तैयार किया गया है.

सरकार का दावा है कि इन कदमों से दिल्ली का पावर सेक्टर राष्ट्रीय मॉडल के रूप में उभरेगा. विरासत की सुरक्षा और आधुनिक ऊर्जा ढांचे का यह मेल आने वाले वर्षों में राजधानी की नई पहचान तय कर सकता है।

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