दिल्ली के गिरते तापमान के बीच चढ़ा सियासी पारा! चुनावी रण में AAP, कांग्रेस और BJP, क्या होगा आज खास?
Delhi Politics: दिल्ली की कंपकपाती ठंड में सियासी पारा गर्म है। फरवरी में विधानसभा चुनाव होने हैं और 15 दिसंबर को आम आदमी पार्टी (AAP) ने अपने कैंडिडेट्स की तीसरी और आखिरी लिस्ट जारी कर दी है। वहीं, दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी (BJP) भी चुनाव के लिए कमर कस चुकी है। दिल्ली भाजपा के नेता 2025 के दिल्ली विधानसभा चुनावों से पहले झुग्गीवासियों से जुड़ने और उनकी चिंताओं को दूर करने के लिए एक आउटरीच कार्यक्रम चला रहे हैं।
इस कार्यक्रम के एक पार्ट के रूप में दिल्ली बीजेपी के नेता शहर भर में 1,194 झुग्गी बस्तियों में रात भर रुके। दिल्ली पूरी तरह इलेक्शन मोड में आ चुकी है। INDIA ब्लॉक का गठबंधन की दिल्ली के सियासी पारे के सामने पिघलता नजर आ रहा है। केजरीवाल ने तो पहले ही अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया था अब कांग्रेस ने भी दो-दो हाथ करने की तैयारी कर ली है। कुल मिलाकर दिल्ली के लुढ़कते तापमान के बीच राजनीति बहुत तेजी से गरमा रही है।

आज भी इन मुद्दों को लेकर दिल्ली में सियासत तेज रहने की उम्मीद है। AAP, कांग्रेस और बीजेपी सभी अपने-अपने स्तर पर जनता का भरोसा जीतने की कोशिश में हैं। जहां AAP के लिए अपनी सत्ता बरकरार रखने का सवाल है तो वहीं कांग्रेस करीब एक दशक बाद दिल्ली की गद्दी पर वापसी चाहती है जबकि बीजेपी दिल्ली में खो चुके जनादेश को वापस पाने की जद्दोजहद में लगी है।
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AAP की तीसरी लिस्ट
आम आदमी पार्टी ने दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए 38 उम्मीदवारों की अंतिम सूची जारी कर दी है। मौजूदा मुख्यमंत्री आतिशी कालकाजी से चुनाव लड़ेंगी, जबकि पार्टी नेता अरविंद केजरीवाल नई दिल्ली से चुनाव लड़ेंगे। पर्यावरण मंत्री गोपाल राय बाबरपुर सीट पर अपना दबदबा बनाए रखना चाहते हैं। स्वास्थ्य मामलों की देखरेख करने वाले सौरभ भारद्वाज ग्रेटर कैलाश से चुनाव लड़ेंगे। पूर्व स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन भी शकूर बस्ती से चुनाव लड़ रहे हैं।
केजरीवाल को कड़ी चुनौती
अरविंद केजरीवाल को नई दिल्ली में कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। भाजपा ने पूर्व मुख्यमंत्री साहिब सिंह वर्मा के बेटे परवेश वर्मा को मैदान में उतारने की योजना बनाई है। वहीं, कांग्रेस ने शीला दीक्षित के बेटे संदीप दीक्षित को मैदान में उतारा है, जो शहर की सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहीं। 2013 में शीला दीक्षित को हराकर केजरीवाल यहां से विधायक चुने गए थे तब से वो लगातार नई दिल्ली सीट जीतते आ रहे हैं।
कांग्रेस ने संदीप दीक्षित को किया आगे
दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस पार्टी द्वारा अपने उम्मीदवारों की पहली सूची जारी करने के बाद, पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के बेटे संदीप दीक्षित चर्चा में हैं। उन्हें नई दिल्ली सीट से मैदान में उतारा गया है, जो वर्तमान में आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की सीट है।
संदीप दीक्षित के जरिए यूपीए सरकार से शुरू हुई थी बातचीत
कांग्रेस और केजरीवाल के बीच लड़ाई अन्ना आंदोलन से शुरू हुई, जिसके दौरान केजरीवाल ने भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाया था। अन्ना आंदोलन के खत्म होने के बाद केजरीवाल ने एक नई पार्टी बनाई। संदीप दीक्षित के जरिए ही केजरीवाल ने अन्ना आंदोलन के दौरान तत्कालीन यूपीए सरकार के साथ बातचीत शुरू की थी। राजनीति में आने से पहले केजरीवाल और दीक्षित दोनों ही एनजीओ क्षेत्र से जुड़े थे।
पहले से थी संदीप-केजरीवाल की जान पहचान
संदीप दीक्षित और केजरीवाल के बीच संबंध दीक्षित के पहले संसदीय कार्यकाल से ही हैं, जब केजरीवाल कभी-कभार उनके कार्यालय जाते थे। हालांकि, दीक्षित के करीबी सहयोगियों का दावा है कि दोनों के बीच कोई खास निकटता नहीं थी। दिल्ली कांग्रेस के मीडिया विभाग के उपाध्यक्ष परवेज आलम खान ने बताया कि केजरीवाल का उनसे मिलना उनके एनजीओ के काम से संबंधित था, जो पूर्वी दिल्ली में स्थित था, जहां संदीप दीक्षित सांसद के रूप में काम कर रहे थे। केजरीवाल के राजनीति में आने से पहले, संदीप दीक्षित 2004 में पूर्वी दिल्ली से सांसद चुने जा चुके थे और 2009 में फिर से चुने गए।
बीजेपी का चुनावी एजेंडा
विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही दिल्ली भाजपा नेताओं ने झुग्गी-झोपड़ियों में अपना प्रभाव बढ़ाने के लिए अपने प्रयास तेज कर दिए हैं। पांच महीने पहले शुरू किए गए इस अभियान में पार्टी के सदस्य झुग्गी-झोपड़ियों और जेजे क्लस्टरों में रातें गुजार रहे हैं। इसका उद्देश्य निम्न मध्यम वर्ग की आबादी के बीच समर्थन बढ़ाना है। इस पहल के दौरान, दिल्ली के सभी सातों सांसदों सहित वरिष्ठ भाजपा नेता पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ विभिन्न झुग्गी बस्तियों में रात भर रुककर निवासियों से सीधे जुड़ते हैं। अभी तक, ये गतिविधियां पूरे शहर में 1,194 झुग्गी बस्तियों में आयोजित की गई हैं।
इस रणनीति में सिर्फ रात भर रुकना ही नहीं बल्कि इन इलाकों में रहने वाले लोगों से नजदीकी से बातचीत करना भी शामिल है। यह सीधा जुड़ाव नेताओं को निवासियों के सामने आने वाली समस्याओं को समझने और उनके साथ तालमेल बनाने में मदद करता है। झुग्गी-झोपड़ियों पर भाजपा का ध्यान निम्न मध्यम वर्ग के बीच अपने मतदाता आधार को मजबूत करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। स्थानीय मुद्दों को संबोधित करके और निवासियों के साथ एकजुटता दिखाकर, पार्टी का लक्ष्य आगामी चुनावों के दौरान समाज के इस महत्वपूर्ण वर्ग से वोट हासिल करना है।
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