Delhi AQI Today: पराली ने बढ़ाया दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण का स्तर, गंभीर स्तर पर पहुंचा एयर क्वालिटी इंडेक्स
Delhi AQI Today: दिल्ली की हवाएक बार फिर से जहर बन चुकी है। नवंबर की ठंडी सुबहों में जहां लोगों को ताजी हवा की उम्मीद रहती है, वहीं राजधानी की फिज़ा अब धुएं और धुंध से घिर चुकी है। लगातार दूसरे दिन दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 'गंभीर' स्तर पर पहुंच गया, जिससे सांस लेना भी मुश्किल हो गया है।
इस बार सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पराली जलाने का असर बाकी सभी स्रोतों से ज्यादा पाया गया है। यानी, पंजाब, हरियाणा और आसपास के राज्यों से उठने वाला धुआं अब दिल्ली की हवा में घुलकर उसे जहरीला बना रहा है। मौसम विभाग के मुताबिक, धीमी हवाएं और गिरता तापमान प्रदूषकों को सतह के पास फंसा रहा है, जिससे हालात और भी खराब हो गए हैं।

राजधानी दिल्ली में औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 418 दर्ज किया गया, जो 'गंभीर' श्रेणी में आता है। यह लगातार दूसरा दिन है जब दिल्ली की हवा सांस लेने लायक नहीं रही। मंगलवार को भी AQI 428 पहुंच गया था, जो पिछले साल 19 दिसंबर के बाद सबसे खराब स्तर था।
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पराली जलाने का असर बढ़ा
भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM) के डिसीजन सपोर्ट सिस्टम (DSS) के आंकड़ों के अनुसार, बुधवार को दिल्ली में प्रदूषण के स्तर में पराली जलाने का योगदान सबसे ज्यादा 22.47% रहा। यह इस सीजन का अब तक का सबसे ऊंचा आंकड़ा है। वहीं, ट्रांसपोर्ट यानी वाहनों से निकलने वाले धुएं का योगदान 15.59% दर्ज किया गया। DSS के अनुमान के मुताबिक, गुरुवार को पराली का असर घटकर करीब 10.1% रह सकता है, जबकि ट्रांसपोर्ट से होने वाले उत्सर्जन में वृद्धि होकर 19.3% तक पहुंचने की संभावना है।
किन राज्यों में जली सबसे ज्यादा पराली
भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) के आंकड़ों के अनुसार, सोमवार को छह राज्यों में कुल 1,477 पराली जलाने की घटनाएं दर्ज हुईं। इनमें पंजाब में 155, हरियाणा में 29, उत्तर प्रदेश में 266, राजस्थान में 159 और मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा 868 मामले सामने आए। 15 सितंबर से 12 नवंबर तक इन राज्यों में कुल 13,793 खेतों में आग लगाने की घटनाएं दर्ज की गईं - इनमें पंजाब में 4,662, हरियाणा में 464, उत्तर प्रदेश में 2,490, दिल्ली में 4, राजस्थान में 1,736 और मध्य प्रदेश में 4,437 घटनाएं शामिल हैं।
दिल्ली के प्रदूषण में पराली का योगदान अक्टूबर के आखिरी हफ्ते से लगातार बढ़ रहा है। 26 अक्टूबर से 5 नवंबर के बीच यह सिर्फ 2-4% था, जो 6 नवंबर को 10% तक पहुंच गया। 10 नवंबर को यह 13.68%, 11 नवंबर को 15.45% और 12 नवंबर को बढ़कर 22.47% पर पहुंच गया।
मौसम की स्थिति भी बनी वजह
विशेषज्ञों के अनुसार, दिल्ली में हवा की गुणवत्ता खराब होने की बड़ी वजह स्थानीय मौसम की स्थिति भी है। पिछले कुछ दिनों से सतह पर हवा बहुत धीमी चल रही है, तापमान गिरा है और रात में इनवर्जन लेयर बन रही है, जिससे प्रदूषक जमीन के पास फंसे रह जाते हैं। वहीं, पश्चिमी दिशा से 10-17 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली हवाएं पंजाब और हरियाणा से धुआं दिल्ली की ओर ला रही हैं। इसके अलावा वाहनों का धुआं और सड़क की धूल भी हवा में मिलकर हालात और बिगाड़ रही है। IITM के पूर्वानुमान के मुताबिक, 13 से 15 नवंबर तक दिल्ली का AQI 'बहुत खराब' श्रेणी में रहने की संभावना है। अगले छह दिनों तक भी इसी तरह की स्थिति बनी रह सकती है।
तापमान में गिरावट, सुबह छाएगी धुंध
भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, बुधवार को न्यूनतम तापमान 10.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से करीब तीन डिग्री कम है। वहीं अधिकतम तापमान 27.7 डिग्री सेल्सियस रहा। बीते तीन दिनों से रात का तापमान लगातार 10 डिग्री के आसपास बना हुआ है, जो इस सीजन का सबसे कम स्तर है। IMD का अनुमान है कि 18 नवंबर तक आसमान साफ रहेगा, लेकिन सुबह के समय हल्की धुंध या कोहरा छाया रह सकता है।
GRAP का तीसरा चरण लागू, कई पाबंदियां
दिल्ली में वायु गुणवत्ता 'गंभीर' स्तर पर पहुंचने के बाद वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने मंगलवार को ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) का तीसरा चरण लागू कर दिया। इसके तहत गैर-जरूरी निर्माण और तोड़फोड़ की गतिविधियों पर रोक लगा दी गई है। प्राथमिक स्कूलों को हाइब्रिड मोड में पढ़ाई कराने के निर्देश दिए गए हैं, और बीएस-III पेट्रोल व बीएस-IV डीजल गाड़ियों के दिल्ली में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया गया है।
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