Delhi Air quality: दिल्ली की हवा बेहद खराब, 'Red Zone' में पहुंची वायु की गुणवत्ता, जानिए ताजा स्थिति
नई दिल्ली, 04 नवंबर। देश के 'दिल' यानी कि दिल्ली की एयर क्वालिटी एक बार फिर से खराब हो गई है। मंगलवार को दिल्ली की एयर क्वालिटी पहली बार 'रेड जोन' में पहुंच गई। दिवाली से पहले ही राजधानी की आबो-हवा खराब होना अच्छा संकेत नहीं है। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने पहले ही कह रखा है कि दिवाली के बाद दिल्ली की वायु की गुणवत्ता काफी खराब रहेगी लेकिन यहां तो दिवाली से पहले ही हवा खराब हो गई है।
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आपको बता दें कि दिल्ली के जंतर मंतर में बुधवार की सुबह वायु की गुणवत्ता 222.28 दर्ज की गई, जो कि अनहेल्दी है। वैसे तो दिल्ली में हर साल सर्दियों के मौसम में हवा की गुणवत्ता बिगड़ती है, दिवाली के पर्व के बाद तो इसका स्तर वैसे भी काफी गिर जाता है लेकिन इस बार तो दिवाली के पहले ही प्रदूषण का स्तर उच्चतम स्तर पर है।

पराली जलाने से दिल्ली में प्रदूषण केवल छह प्रतिशत
स्थानीय अधिकारियों ने कहा है कि खराब वायु गुणवत्ता के लिए प्रदूषकों का फैलाव जिम्मेदार है। SAFAR ने कहा है कि आस-पास के राज्यों में पराली जलाने से दिल्ली में प्रदूषण केवल छह प्रतिशत है और बाकी प्रदूषण स्थानीय स्रोतों के कारण है। इसलिए लोगों को ये बात बखूबी समझनी होगी और इसके प्रति सचेत रहना होगा। आने वाले दिनों में जब ठंड बढ़ेगी और तापमान में गिरावट आएगी तो हवा की गुणवत्ता में काफी गिरावट देखने को मिलेगी इसलिए अभी से ही सबको इसकी रोकथाम के बारे में सोचना होगा और उन चीजों से दूर रहना होगा जो कि वायु को प्रदूषित करते हैं।
वायु गुणवत्ता सूचकांक 303
गौरतलब है कि भारतीय मौसम विभाग ने भविष्यवाणी की है कि दिवाली के एक दिन बाद दिल्ली की वायु गुणवत्ता 'बहुत खराब' श्रेणी में रहेगी। तो वहीं केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने भी कहा कि कल दिल्ली में 24 घंटे का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक 303 दर्ज किया गया। फरीदाबाद, गुरुग्राम और नोएडा जैसे NCR क्षेत्रों में AQI भी रिकॉर्ड ऊंचाई पर रहा, जो प्रत्येक क्षेत्र में 300-अंक को पार कर गया है। आपको बता दें कि एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 0 से 50 के बीच 'अच्छा', 51 से 100 के बीच संतोषजनक, 101 से 200 के बीच मध्यम, 201 से 300 के बीच खराब श्रेणी, 301 से 400 के बीच AQI 'बहुत खराब' और 401 से 500 के बीच AQI 'गंभीर' श्रेणी में आता है। AQI एक संख्या है, जिसका इस्तेमाल सरकारी एजेंसियों द्वारा वायु प्रदूषण के स्तर का आकलन के लिए किया जाता है।












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