दिल्ली के पेड़ों की कटाई मामले में एलजी-सरकार के बीच बढ़ सकता है विवाद! फैक्ट फाइंडिंग कमेटी कर रही जांच
दिल्ली के रिज इलाके में 1100 पेड़ों की कटाई को लेकर उपराज्यपाल और दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार आमने-सामने आ चुकी है। आने वाले दिनों में इस मुद्दें को लेकर विवाद बढ़ सकता है।
दरअसल, राजधानी के रिज इलाके में 1100 पेड़ों की कटाई के मामले में उपराज्यपाल की भूमिका की जांच दिल्ली सरकार के मंत्रियों की एक फैक्ट फाइंडिंग कमेटी कर रही है। ये कमेटी दिल्ली सरकार के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने बीते सप्ताह गठित की थी।

दिल्ली सरकार ने मंत्रियों ने 29 जून को एक बैठक की थी और इस बैठक के दौरान कमेटी का गठन किया गया था, जिसमें मंत्री आतिशी, सौरभ भारद्वाज और इमरान हुसैन को सर्वसम्मति से शामिल किया गया था। ये कमेटी गठन पेड़ों के कटान मामले की जांच कर रही है।
हालांकि पर्यावरण और वन विभाग के प्रधान सचिव ने इस समिति के गठन पर आपत्ति जताई है और इसे नियमों का उल्लंघन बताया है। उनका कहना है कि चूंकि ये मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है और इसलिए इस मामले पर कमेटी गठित करना कोर्ट की अवमानना है।
इसके साथ ही वन विभाग के प्रधान सचिव ने पर्यावरण एवं वन मंत्री इस समिति के सदस्य नहीं हैं, जिसमें केवल मंत्रियों का समूह शामिल है। इसका गठन कैबिनेट द्वारा या शहरी विकास मंत्री सौरभ भारद्वाज के हस्ताक्षरों के तहत मंत्रिपरिषद से उचित अधिकार या अनुमोदन के साथ नहीं किया गया है।
जानें दिल्ली सरकार ने क्या दिया है जवाब?
वन विभाग द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब दिल्ली सरकार ने यिा है। दिल्ली सरकार के सूत्रों ने दावा किया है कि अधिकारी उच्च अधिकारियों के दबाव के कारण जांच से बचे रहे हैं। उनका तर्क है रिज क्षेत्र दिल्ली के पर्यावरण के लिए लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। ये पेड़ शहर के लिए फेफड़े के रूप में कार्य करते हैं।
दिल्ली सरकार के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने इस कमेटी के गठन के समय ही कहा था कि दिल्ली में मौसम परिवर्तन के कारण लोग परेशान हैं, पेड़ों के कटान से राजधानी का पर्यावरण प्रभावित हुआ है। इसके साथ ही दिल्ली सरकार ने दावा किया था इस मामले की जांच के दौरान डीडीए के कुछ ईमेल से खुलाासा हुआ है कि सभी कार्रवाई एलजी के निर्देशों के तहत की गई थी।
गौरतलब है कि इस केस की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सवाल किया है कि पर्यावरण और वन विभाग के अधिकारियों ने अवैध पेड़ों की कटाई के बारे में पूरी जानकारी होने के बावजूद वनों की सुरक्षा क्यों नहीं की?












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