Climate change: 2050 तक दिल्ली को 2.75 ट्रिलियन रुपए का हो सकता है नुकसान, जानिए सर्विस सेक्टर का हाल
Delhi Climate change impact: जलवायु परिवर्तन पर ड्राफ्ट ऐक्शन प्लान में राजधानी दिल्ली के लिए बहुत ही भयावह भविष्यवाणी की गई है। इसके मुताबिक जलवायु परिवर्तिन के प्रभावों की वजह से दिल्ली को इस सदी के मध्य तक 2.75 ट्रिलियन रुपए रुपए का नुकसान हो सकता है।
जलवायु परिपर्तन की वजह से यह नुकसान बारिश और तापमान के पैटर्न में बदलाओं की वजह से होने की आशंका है, जिससे कम आय वाली आबादी के एक बड़े वर्ग के जीवन के लिए बड़ा संकट खड़ा हो सकता है। ड्राफ्ट ऐक्शन प्लान के मुताबिक, 'कुल मिलाकर इस सदी के मध्य तक दिल्ली में जलवायु परिवर्तन की कुल लागत 2.75 ट्रिलियन रुपए रहने की संभावना है।'

सर्विस सेक्टर पर पड़ सकती है सबसे बड़ी मार
इस अनुमान के मुताबिक, 'कृषि और उससे जुड़े क्षेत्र को 80 बिलियन रुपए, मैन्युफैक्चरिंग को 330 बिलियन रुपए और सर्विस क्षेत्र को 2.34 ट्रिलियन रुपए का नुकसान' हो सकता है। मंजूरी के लिए लंबित ड्राफ्ट ऐक्शन प्लान के मुताबिक आने वाले वर्षों में राष्ट्रीय राजधानी को हीट वेव, बहुत ज्यादा तापमान और कुछ ही दिनों में बहुत ही भारी वर्षा की घटनाओं का सामना कर सकता है।

दिल्ली में तापमान बढ़ने को लेकर अनुमान
अनुमानों के मुताबिक सदी के मध्य तक आरसीपी (रिप्रेजेंटेटिव कंसंट्रेशन पाथवे) 4.5 परिदृश्य (स्थिरीकरण परिदृश्य) के अनुसार दिल्ली में अधिकतम तापमान 1.5 डिग्री सेल्सियस बढ़ेगा और आरसीपी 8.5 परिदृश्य के मुताबिक इसमें 2.1 डिग्री सेल्सियस बढ़ोतरी होगी।

सर्द दिन और रातों में कमी होगी
ड्राफ्ट ऐक्शन प्लान के एक्सपर्ट्स का संकेत है कि दिल्ली में आने वाले समय में सर्द दिन और रातों में कमी होगी। शुष्क दिनों में 8.4की कमी का अनुमान है, जबकि, लगातार बारिश वाले दिनों में 1.4 की वृद्धि होगी। वहीं पूर्व-औद्योगिक स्तर की तुलना में भारी बारिश वाले दिनों में 0.9 की बढ़ोतरी होगी।

8-9 जुलाई को एक दिन में सबसे ज्यादा बारिश
वहीं जिलों के हिसाब से जो खतरे का आकलन किया गया है, उसके हिसाब से दक्षिणी दिल्ली की पहचान सबसे ज्यादा असुरक्षित के रूप में की गई है और नई दिल्ली को सबसे कम। इस साल 8 और 9 जुलाई को दिल्ली में 1982 के बाद इस महीने में एक दिन में सबसे ज्यादा (153 मिलीमीटर) बारिश हुई। इसकी वजह एक साथ पश्चिमी विक्षोभ, मानसूनी हवाएं और उत्तर-पश्चिम भारत के ऊपर चक्रवाती प्रभाव शामिल था।

भारी बारिश के चलते बने बाढ़ के हालात
अगले 24 घंटे में राजधानी में 107 मिलीमीटर अतिरिक्त बारिश हुई। 8 जुलाई की सुबह 8.30 से लेकर अगले 36 घंटों में दिल्ली में अप्रत्याशित 260 मिलीमीटर बारिश हुई, जिसके बाद बाढ़ की चेतावनी जारी की गई और स्कूलों को अस्थायी तौर पर बंद करना पड़ गया। भारी बारिश ने शहर की पूरी व्यवस्था को अस्त-व्यस्त कर दिया। कई बाजारों में पानी भर गया।

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208.66 मीटर तक पहुंचा यमुना का जलस्तर
इसके अलावा हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और हरियाणा में यमुना के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में भारी बारिश ने नदी के जलस्तर को रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा दिया। 13 जुलाई को यह 208.66 मीटर पर पहुंच गया, जो कि 1978 के पिछले रिकॉर्ड 207.49 मीटर से कहीं अधिक था। इसकी वजह से कई तटबंध को नुकसान हुआ और चार दशकों में शहर के सबसे ज्यादा भीतर तक पानी घुस गया। बाढ़ के चलते 27,000 लोगों को उनके घरों से निकालकर सुरक्षित जगहों पर पहुंचाना पड़ा।













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