Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

छत्तीसगढ़ में है कुत्ते का मंदिर ! बड़ी रोचक है मंदिर निर्माण की कहानी और मान्यताएं

There is a dog temple in Chhattisgarh! The story and beliefs of temple construction is very interesting

दुर्ग, 31 मार्च। हिन्दू धर्म में वैसे तो कुदरत के हर स्वरुप में ईश्वर देखा जाता है। देवी देवताओ में मंदिरों में भी अपने कई पशुओ को सवारी के तौर पर देखा होगा, लेकिन क्या आपने किसी ऐसे मंदिर के बारे में सुना है ? जहां कुत्ते की पूजा होती है। यह जानकर आपको थोड़ा अटपटा जरूर लग सकता है, लेकिन यह सच है। छत्तीसगढ़ में एक ऐसा मंदिर है ,जहां कुत्ते ही पूजा की जाती है। स्थानीय लोग इस मंदिर को कुकुरदेव मंदिर के नाम से पहचानते हैं ।इस मंदिर की मान्यताएं जितनी रोचक हैं ,उससे अधिक मंदिर निर्माण की कहानी है ।

नंदी की तरह होती है कुकरदेव की पूजा

नंदी की तरह होती है कुकरदेव की पूजा

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से लगभग 132 किलोमीटर दूर दुर्ग जिले के खपरी गांव में कुकुरदेव का मंदिर है। इस मंदिर के गर्भगृह में एक कुत्ते की मूर्ति विराजमान है, इस मूर्ति उसके बगल में भगवान शिव का एक लिंग भी स्थापित है। सावन मास में बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस मंदिर में दर्शन के लिए आते हैं। भक्त भगवान शिव के साथ ही कुकुरदेव की भी पूजा अर्चना ठीक उसी तरह करते हैं ,जैसे शिवालयों में नंदी की पूजा होती है।

होता है रोगों से बचाव

होता है रोगों से बचाव

कुकुरदेव मंदिर 200 मीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है। इस मंदिर के गर्भगृह के अतिरिक्त यहां के मुख्य प्रवेशद्वार के दोनों तरफ भी कुत्तों की प्रतिमा लगाई गई है। स्थानीय लोगों के बीच यह मान्यता है कि कुकुरदेव का दर्शन करने और उनकी प्रतिमा के आस पास पड़ी मिट्टी खाने से लगातार होने वाली खांसी यानि कुकुरखांसी होने और कुत्ते के काटने का खतरा टल जाता है। लोगों का यह भी मानना है कि अगर किसी व्यक्ति को कुत्ते के काटने से रेबीज का संक्रमण हो गया है ,तो इस मंदिर में आने से उससे राहत मिलती है। इस मंदिर की मान्यताओं से प्रभावित होकर लोग छत्तीसगढ़ ही नहीं बल्कि महाराष्ट्र , मध्यप्रदेश से भी आते हैं।

रोचक है मंदिर निर्माण की कथा

रोचक है मंदिर निर्माण की कथा

बताया जाता है कि कुकुरदेव का मंदिर एक स्मारक है,जिसे एक बंजारे ने अपने वफादार कुत्ते की स्मृति में बनवाया था। एक कहानी के मुताबिक एक बंजारा अपने कुत्ते के साथ सदियों पहले अपने परिवार के साथ इस खपरी गांव में आया था। एक बार जब गांव में अकाल पड़ गया , तब उस बंजारे को गांव के साहूकार से कर्ज लेना पड़ा , लेकिन वह कर्ज चुका नहीं पाया। कर्ज न चुका पाने के वजह से उसने अपना पालतू कुत्ता साहूकार के पास गिरवी रख दिया।

स्थानीय ग्रामीण बताते हैं कि एक दफा साहूकार के घर बड़ी चोरी हो गई। चोरों ने साहूकार का सारा धन यह सोचकर जमीन के नीचे गाड़ दिया कि मामला शांत होते ही वह उसे बाद में निकाल लेंगे, लेकिन साहूकार के पास गिरवी रखे गए कुत्ते को जमींन के भीतर दबी संपत्ति के बारे में जानकारी लग गई। कुत्ता साहूकार को उस स्थान पर ले गया जहां चोरों ने धन गाड़ दिया था। साहूकार ने जब उस स्थान पर गड्ढा खोदा ,तो उसे अपना सारी दौलत वापस मिल गई ।

स्वामी भक्त कुत्ते की याद में बनवाया स्मारक

स्वामी भक्त कुत्ते की याद में बनवाया स्मारक

अपनी दौलत वापस पाकर साहूकार बहुत खुश हुआ। उसने कुत्ते की वफादारी से प्रसन्न होकर उसे आजाद करने का फैसला लिया। साहूकार ने बंजारे के नाम एक पत्र लिखकर उसे कुत्ते के गले में लटका दिया और उसे अपने मालिक के पास भेज दिया। जब कुत्ता बंजारे के पास पहुंचा, तब उसे लगा कि वह साहूकार के पास से भागकर वापस आ गया है,वह आपने आपे से बाहर हो गया और उसने गुस्से में अपने कुत्ते को पीट-पीटकर मार डाला।

कुत्ते के मृत हो जाने के बाद बंजारे ने उसके गले में लटकी चिट्ठी पढ़ी, तो वह स्तब्ध रह गया। निर्दोष स्वामी भक्त कुत्ते की हत्या करने का उसे बेहद अफ़सोस हुआ। आत्मग्लानि और शोक में डूबे बंजारे ने गांव में ही कुत्ते को दफना कर उसका स्मारक बनवा दिया। इसी आगे चलकर ग्रामीणों ने मंदिर का रूप दे दिया। आज इस मंदिर को लोग कुकुर मंदिर के नाम से जानते हैं।

यह भी पढ़ें छत्तीसगढ़ में निभाई जाती है अनोखी आदिवासी परम्परा ,परिजन की मौत के बाद पहाड़ी कोरवा करते हैं यह काम !


यह भी पढ़ें छत्तीसगढ़ में है डायन का मंदिर, सिर नहीं झुकाया तो सजा देती हैं परेतिन दाई, झुकाया तो मिलता है आशीर्वाद !

NOTE - मंदिर की कहानी और मान्यताएं स्थानीय ग्रामीणों से संकलित हैं। हम इस मंदिर से जुड़ी मान्यताओं की सत्यता की पुष्टि नहीं कर रहे हैं।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+