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Success Story: Ambikapur में शूकर पालन से महिलाओं के जीवन में आई आर्थिक क्रांति, बिहान योजना ने बढ़ाया हौसला

Ambikapur के मैनपाट के वनांंचल ग्राम चिड़ापारा की महिलाएं Pig Farming के माध्यम से आत्मनिर्भर बन रही है। महिलाओं ने शूकर पालन को अपनी आजीविका का एक महत्वपूर्ण साधन बना लिया है। छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले मे गुलाब महिला स्वसहायता समूह की महिलाएं सरकार की बिहान योजना के माध्यम से अपनी आर्थिक स्थिति में बदलाव ला रहीं है।

छोटे स्तर पर शुरू किया काम, बिहान ने दिया प्रशिक्षण

छोटे स्तर पर शुरू किया काम, बिहान ने दिया प्रशिक्षण

गुलाब स्व सहायता समूह की अध्यक्ष बतातीं हैं कि समूह के सदस्यों के बिहान से जुड़ने के बाद विकासखंड मिशन प्रबंधन इकाई के माध्यम से अपनी आर्थिक स्थिति को सुधारने एवं आय प्राप्त करने के लिए एक ऐसे काम की तलाश में थी। जिसके माध्यम से उन्हें कम समय में अच्छी आमदनी हो सके। अपने आर्थिक सशक्तिकरण के लिए महिलाओं ने शूकर पालन का काम चुना। जिसके लिए बिहान द्वारा इन्हें प्रशिक्षण दिया गया। समूह ने 11 सूत्रों का नियम का पालन करते हुए। चक्रीय निधि राशि 15 हजार रुपए, सामुदायिक निवेश कोष राशि 60 हजार रुपए की राशि प्राप्त कर शूकर पालन का कार्य प्रारंभ किया।

समूह को एक से दो लाख रुपयों तक हो रही आमदनी

समूह को एक से दो लाख रुपयों तक हो रही आमदनी

मैनपाट विकासखंड के ग्राम पंचायत चिड़ापार की गुलाब स्व सहायता समूह में 10 महिला सदस्य हैं। जो बिहान योजना द्वारा संचालित है समूह का गठन साल 2018 में किया गया था। समूह की अध्यक्षा बताती हैं कि शुरुआती दौर में सदस्यों द्वारा स्थानीय बाजारों में लगभग 4 लाख 50 हजार रुपए के शूकर बिक्री की गई है। अब धीरे-धीरे समूह के आय में वृद्धि हो रही है। शूकर पालन से महिलाओं को सालाना एक से दो लाख रुपये तक की आमदनी हो रही है। गुलाब स्वच्छता समूह की महिलाएं आपसी सामंजस्य से शूकर पालन एवं बिक्री कर आर्थिक रूप से सशक्त बन रही हैं। वही एक स्वावलंबी समूह होने की मिसाल भी पेश कर रही हैं।

NGGB योजना में किया जा रहा शामिल

NGGB योजना में किया जा रहा शामिल

छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान से जुड़कर स्व सहायता समूह की महिलाएं अपने जीवन में आर्थिक क्रांति ला रही हैं। समूह की सदस्यों को राज्य शासन की महत्वकांक्षी योजना नरवा गरवा घुरवा और बारी के माध्यम से सूक्ष्म उद्यम के रूप में विकसित करने का काम किया जा रहा है। समूह से जुड़ने से पहले महिलाओं की आर्थिक स्थिति बहुत कमजोर थी और जीवन सामान्य मेहनत मजदूरी पर निर्भर था। इसके साथ ही कम आय की वजह से समूह की महिलाएं घर एवं परिवार की समस्या से हमेशा जूझ रही थी।

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