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'संतराम' को टक्कर देने चुनावी मैदान में 'नीलकंठ', जानिए केशकाल सीट से BJP ने पूर्व कलेक्टर पर क्यों खेला दांव?

Chhattisgarh assembly election 2023: बस्तर संभाग की 12 सीटों में से केशकाल को पर्यटन नगरी कहा जाता है। दरअसल यहां पर्यटन स्थलों की भरमार है, जिसके कारण लोग यहां पहुंचकर नैसर्गिक सुंदरता का आनंद उठाते हैं।

इसके साथ ही केशकाल विधानसभा बस्तर की राजनीति का अखाड़ा भी माना जाता है। वर्तमान में केशकाल विधानसभा में दो बार के विधायक संतराम नेताम काबिज हैं। कांग्रेस से संतराम तीसरी बार चुनाव लड़ रहे हैं।

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इधर भाजपा ने पूर्व आईएएस अफसर नीलकंठ टेकाम को चुनाव मैदान में उतारा है। इसके अलावा दूसरा कोई प्रत्याशी ऐसा नहीं है, जो यहां विधायक बनने की दौड़ में शामिल हो पाए। दोनों प्रत्याशियों को छोड़कर बाकी प्रत्याशी अपनी उपस्थिति दर्ज करवा रहे हैं।

दरअसल छत्तीसगढ़ गठन के बाद पहली बार 2003 में हुए विधानसभा चुनाव में ये सीट भाजपा के खाते में आई थी और 2008 में भी भाजपा का विधायक ही इस सीट पर काबिज हुआ। इसके बाद 2013 में हुए चुनाव में कांग्रेस ने ये सीट भाजपा के हाथों से छीन ली। बताया जाता है कि केशकाल विधानसभा में जिस तरह से चुनावी माहौल चल रहा है, उस पर कांग्रेस के पक्ष में हवा होने का दावा किया जा रहा है, लेकिन भाजपा उम्मीदवार पूर्व आईएएस अफसर के भी यहां मजबूत स्थिति में होने की बात कही जा रही है।

दरअसल संतराम नेताम इसी सीट से दो बार के विधायक हैं और तीसरी बार चुनाव का सामना कर रहे हैं, जबकि भाजपा के नीलकंठ पहली बार चुनाव लड़ रहे हैं। नीलकंठ कोंडागांव जिले के कलेक्टर भी रह चुके हैं। इन हालातों में उन्हें पूरे जिले की अच्छी समझ और जरूरतों के बारे में अच्छी जानकारी भी है। जबकि संतराम केवल अपने क्षेत्र में ही सक्रिय रहे हैं। नीलकंठ ने इसी साल फरवरी में वॉलेंटरी रिटायरमेंट के लिए आवेदन किया था, जिनका आवेदन तो स्वीकार नहीं किया गया, लेकिन 3 महीने तक इस पर कोई कार्रवाई भी नहीं हुई।

ऐसे में सिविल सेवा अधिनियम के तहत उनका आवेदन स्वत: स्वीकार हो गया। स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने के बाद नीलकंठ ने भाजपा की सदस्यता ली और इस चुनाव में केशकाल सीट से भाजपा ने उन्हें टिकट भी दे दी। चूंकि नीलकंठ सरकारी तंत्र से लंबे समय तक जुड़े रहे, ऐसे में उन्हें हर उस बात की जानकारी है, जो किसी क्षेत्र में जरूरी होने पर किस तरह सरकार से मांगी जा सकती है। ऐसे में लोग नीलकंठ को लेकर आशान्वित नजर आ रहे हैं।

दूसरी तरफ वर्तमान विधायक संतराम नेताम की स्थिति भी यहां मजबूत मानी जा रही है, लेकिन बतौर विधानसभा उपाध्यक्ष संतराम का अपने क्षेत्र में दौरा सतही तौर पर रहा है। पहले जहां संतराम अपने पहले कार्यकाल में विधायक के रूप में हर एक गांव में पहुंचते थे, वहीं दूसरे कार्यकाल में उनकी क्षेत्र से थोड़ी दूरी देखने को मिली। हालांकि कार्यकर्ता इस बात का दावा करते हैं कि वे जमीन पर काम करने वाले नेता हैं, लेकिन लोगों की मानें तो उनका ज्यादातर समय रायपुर में बीतता है।

इन हालातों में दोनों ही नेताओं की सीधी टक्कर केशकाल सीट पर मानी जा रही है। भाजपा और कांग्रेस का इस सीट पर भी कांटे की टक्कर होने के आसार हैं। एक तरफ जहां दो बार के विधायक तीसरी बार चुनावी दंगल में उतरे हुए हैं, वहीं दूसरी तरफ पूर्व आईएएस और पूर्व कलेक्टर खड़े हैं। इधर मतदाताओं की खामोशी लगातार बनी हुई है।

मालूम हो कि भाजपा से नीलकंठ टेकाम और कांग्रेस से संतराम नेताम के अलावा इस सीट पर आम आदमी पार्टी के जुगल किशोर बोध, बहुजन समाज पार्टी से दिनेश कुमार मरकाम, राष्ट्रीय जनसभा पार्टी से अक्षय कुमार नाग, सर्व आदि दल से जीवन लाल मातलाम, भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी से दिनेश कुमार मरकाम, हमर राज पार्टी से शिवकुमार गंगवाल, अंबेडकराइट पार्टी ऑफ इंडिया से सोनसिंह मरापी और निर्दलीय प्रत्याशी संतोष कुमार मंडावी चुनावी मैदान में हैं।

संवाद सूत्र: शेख सलीम, सुकमा/छत्तीसगढ़

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