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पुरानी पेंशन पर केंद्र और छत्तीसगढ़ के बीच गतिरोध बरकरार, सीएम भूपेश बघेल ने फिर मांगे NPS के 17,240 करोड़

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बार फिर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से एनपीएस की 17,240 करोड़ की राशि लौटने की मांग की है।

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बार फिर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से एनपीएस की 17,240 करोड़ की राशि लौटने की मांग की है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने शुक्रवार को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और देश के सभी राज्यों के वित्त मंत्रियों की बैठक के दौरान अपनी मांग दुहराई।

वित्त मंत्री से एनपीएस की 17,240 करोड़ की राशि लौटने की मांग

वित्त मंत्री से एनपीएस की 17,240 करोड़ की राशि लौटने की मांग

गौरतलब है कि आम बजट 2023-24 की तैयारियों को लेकर केंद्रीय वित्त मंत्रालय द्वारा राज्यों से सुझाव और प्रस्ताव आमंत्रित करने राज्यों के वित्त मंत्रियों की बैठक रखी गयी है। इस बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल राज्यहित से जुड़े आर्थिक मुद्दों पर अपने प्रस्ताव प्रस्तुत किया। यह बात पूर्व से स्पष्ट कर दी गई थी कि मुख्यमंत्री बघेल पहले से लंबित पड़ी मांगों पर वित्त मंत्री का ध्यान आकृष्ट कराएंगे।

बजट पूर्व बैठक में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने केंद्रीय वित्त मंत्री से एनपीएस की 17,240 करोड़ की राशि लौटने की मांग करते हुए कहा कि राज्य का अंश पृथक पेंशन निधि में जमा किया जाएगा।

इसलिए फंसा है पेंच

इसलिए फंसा है पेंच

यह भी जानना जरुरी है कि कुछ दिनों पहले ही वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने एक बयान में कहा था कि राष्ट्रीय पेंशन योजना यानि NPS में जमा रकम इसमें योगदान करने वाले व्यक्तियों की है और कानूनन राज्य सरकारें इसपर अपना अधिकार नहीं जता सकती हैं। वित्त मंत्री ने कहा था कि जिन राज्यों ने पुरानी पेंशन प्रणाली में वापस चालू किया हैं, वह राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली में जमा कोष को वापस नहीं ले सकते क्योंकि यह धन कानून के अनुसार कर्मचारियों के हैं। सीतारमण ने कहा था कि राजस्थान और छत्तीसगढ़ की सरकार केंद्र से पैसा लौटाने की मांग कर रही हैं, लेकिन कानून के तहत ऐसा नहीं किया जा सकता है।

 NPS के पैसों पर हक को लेकर टकराहट देखने

NPS के पैसों पर हक को लेकर टकराहट देखने

बहरहाल छत्तीसगढ़ सरकार और केंद्र सरकार के बीच NPS के पैसों पर हक को लेकर टकराहट देखने को मिल रही है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पहले ही यह कह चुके हैं कि वह सरकारी कर्मियों को पुरानी पेंशन योजना का लाभ दिलाकर रहेंगे।

ज्ञात हो कि भूपेश बघेल सरकार ने छत्तीसगढ़ में पुरानी पेंशन योजना को बहाल करते हुए इसे लागू तो कर दिया है,लेकिन पैसों को लेकर केंद्र और राज्य के बीच विवाद बना हुआ है। कांग्रेस का आरोप है कि मोदी सरकार की कांग्रेस के वादे को पूरा ना होने देने के लिए जानबूझकर कर्मचारियों को पुरानी पेंशन दिलाने में अड़ंगा लगा रही है।

अदालत का दरवाजा खटखटा सकती है भूपेश सरकार

अदालत का दरवाजा खटखटा सकती है भूपेश सरकार

सीएम भूपेश बघेल ने बीते जून में ही केंद्र सरकार को पत्र लिखकर नई पेंशन योजना में फंसे अपने 17 हजार 500 करोड़ रुपये की वापसी की मांग की थी, लेकिन केंद्र सरकार ने असमर्थता जता दी थी। चर्चा है कि अगर केंद्र सरकार सहयोग नहीं करती है,तो भूपेश सरकार शीघ्र ही इस मामले को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटा सकती है। राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली की निगरानी करने वाली पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथारिटी ने भी जमा राशि को छत्तीसगढ़ सरकार को वापस करने से इंकार कर दिया है।

बड़ा चुनावी एजेंडा बनकर उभर सकता है पेंशन का मुद्दा

बड़ा चुनावी एजेंडा बनकर उभर सकता है पेंशन का मुद्दा

माना जा रहा है कि 2023 के अंत में छत्तसीगढ़,मध्यप्रदेश और राजस्थान में होने वाले विधानसभा चुनाव में पेंशन एक बड़ा चुनावी एजेंडा बनकर उभर सकता है। छत्तीसगढ़ और राजस्थान की कांग्रेस सरकार ने पेंशन योजना लागू की है। अगर केंद्र सरकार से सहयोग नहीं मिलता है,तो कांग्रेस इस मुद्दे को शासकीय कर्मचारियों के बीच ले जाकर एक बड़ा वोट बैंक अपने पक्ष में करने की कोशिश करेगी।

यह भी पढ़ें श्रीराम की शरण में कांग्रेस सरकार, 2023 के चुनाव से पहले छत्तीसगढ़ के हर गांव में होगा रामायण पाठ

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