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सीएम भूपेश बघेल ने ली गृह विभाग की बैठक, छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज की मांगों पर हुई चर्चा

रायपुर, 29 मार्च। मंगलवार को सीएम भूपेश बघेल के निवास कार्यालय में गृह विभाग की एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू, मुख्य सचिव अमिताभ जैन, अपर मुख्य सचिव गृह सुब्रत साहू, डीजीपी अशोक जुनेजा,महानिदेशक नगर सेना अरूण देव गौतम, पुलिस महानिरीक्षक आनंद छाबड़ा भी शामिल थे । बैठक में आदिवासी समाज के आंदोलन और उनकी मांगो का असर देखने को मिला।

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लगभग एक घंटे तक से भी अधिक चली इस बैठक में सीएम भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ की कानून व्यवस्था को लेकर अधिकारियों से विस्तार से बातचीत की हैं । मिली जानकारी के मुताबिक गृह विभाग की इस समीक्षा बैठक में नक्सल मामलों और आदिवासियों पर दर्ज मुकदमों को लेकर विशेष चर्चा हुई है। बैठक में अधिकारियों ने सीएम भूपेश को यह जानकारी दी कि राज्य में आदिवासियों के खिलाफ दर्ज प्रकरण वापसी के लिए गठित न्यायमूर्ति ए.के. पटनायक कमेटी की अनुशंसा पर 632 प्रकरणो में 752 आदिवासी अभियुक्तों के विरूद्ध मामले वापस लिए गए हैं ,जबकि साल 2019 के पूर्व के नक्सल अपराधों में गिरफ्तार आदिवासियों के कोर्ट में विचाराधीन प्रकरणों में भी शीघ्र कार्रवाई करने के निर्देश सीएम भूपेश ने दिए हैं । इस अवसर पर अफसरों ने सरकार के मुखिया को जानकारी दी कि 811 नक्सल प्रकरणो कुल 1244 स्थानीय आदिवासियों के लंबित मामले कोर्ट में खत्म हुए हैं ।

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विपक्ष ने दी प्रतिक्रिया

गृह विभाग की इस बैठक पर अपनी प्रतिक्रिया देने छत्तीसगढ़ विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने बयान जारी करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में नशाखोरी, आत्महत्या के मामले, बलात्कार , चाकूबाजी की वारदात बढ़ी हैं। सीएम भूपेश बघेल खुद गृह विभाग की समीक्षा कर रहे हैं,इसका मतलब यह है कि राज्य के गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू फेल साबित हो चुके हैं। राज्य में पुलिस कुछ भी संभाल नहीं पा रही है। अपराधिक मामलों के कारण से जनता भी परेशान है।

आदिवासी समाज ने की थी सीएम भूपेश बघेल से मुलाकात

गौरतलब है कि सर्व आदिवासी समाज के नेताओं ने शुक्रवार को रायपुर में सीएम भूपेश बघेल से मुलाकात करने के बाद अपना आंदोलन स्थगित कर दिया था। छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज के उपाध्यक्ष सुरजू टेकाम के मुताबिक मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आदिवासी समाज की सभी प्रमुख मांगों पर अपनी सहमति व्यक्त करते हुए उन्हें पूरा करने का आश्वासन दिया था । सर्व आदिवासी समाज को सीएम भूपेश बघेल से हाल ही में छत्तीसगढ़ विधानसभा में पेश हुई सारकेगुड़ा और एडसमेटा घटनाओं की न्यायिक जांच रिपोर्ट के आधार दोषियों पर कार्रवाई का आश्वास मिला था । मिली जानकारी के मुताबिक सर्व आदिवासी समाज ने सरकार को मांगे माने जाने के संबंध में महज 1 महीने का समय दिया है, अगर सरकार कोई कार्रवाई नहीं करती है,तो फिर से आंदोलन होगा।

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छत्तीसगढ़ के सर्व आदिवासी समाज की मुख्य मांगे हैं -

(1) एडसमेटा और सरकेगुड़ा घटना की न्यायिक जांच रिपोर्ट को सार्वजानिक करके दोषियों पर कार्रवाई की जानी चाहिए । (2) बस्तर में पुलिस कैंप बंद करने, फर्जी मुठभेड़ रोकने , आदिवासियों की गिरफ्तारी बंद करने की मांग । (3) जेलों में सजा भोग रहे निर्दोष आदिवासियों की तत्काल रिहाई करने की मांग (4 ) संविधान के मुताबिक पेसा कानून धारा कानून लागू करने की मांग (5 ) संविधान के 5वी अनुसूची तहत आंध्रप्रदेश के अनुसूचित क्षेत्र भूहस्तांतरण विनियम कानून की तर्ज पर छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता में संशोधन करने की मांग (6 ) संविधान के मुताबिक ग्रामसभा के निर्णय का पालन करवाने की मांग (7 ) छत्तीसगढ़ जनसुरक्षा अधिनियम 2005 को खारिज़ करने की मांग (8) अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम पंचायतों को बगैर आरक्षण के घोषणा बंद करने और पेसा कानून के तहत पंचायती राज व्यवस्था लागू करने की मांग ।

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