मिशन 2023-24 के मद्देजनर बदले सकते हैं छत्तीसगढ़ कांग्रेस प्रभारी ?
Chhattisgarh Congress in-charge may change in view of mission 2023-24
रायपुर, 28 मार्च । छत्तीसगढ़ में 2023 के अंत में विधानसभा चुनाव का बिगुल बज जायेगा। हाल ही में 5 राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों में करारी शिकस्त झेलने वाली कांग्रेस ने पंजाब से सत्ता गंवा दी है। अब उसके पास छत्तीसगढ़ में अपनी सत्ता बचाने की जिम्मेदारी है। कांग्रेस के अंदरूनी हलकों में इस बात की चर्चा तेज है कि चुनाव से ठीक पहले छत्तीसगढ़ में कांग्रेस अपना प्रदेश प्रभारी बदल सकती है, क्योंकि मौजूदा प्रभारी पीएल पुनिया का नेतृत्व उतना प्रभावशाली नजर नहीं आता है,जबकि मुख्यमंत्री होते हुए भी भूपेश बघेल पार्टी में भी सबसे ताक़तवर नेता बने हुए हैं।

छत्तीसगढ़ के प्रदेश प्रभारी पद से मुक्त किया जा सकता है पीएल पुनिया को
छत्तीसगढ़ की राजनीति में यही चर्चा ज़ोरों पर है कि पीएल पुनिया को छत्तीसगढ़ के प्रदेश प्रभारी पद से मुक्त किया जा सकता है। हाल ही में कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी ने देश के सभी प्रदेशों के प्रभारियों की बैठक ली थी, इस बैठक में साफ़ संकेत दिए गए थे कि कांग्रेस सभी राज्यों में प्रभार बदल सकती है ,क्योंकि छत्तीसगढ़ और राजस्थान वह राज्य हैं,जहां कांग्रेस अभी सरकार में है,इसलिए इन राज्यों में पार्टी किसी प्रकार का रिस्क नहीं लेना चाहेगी। हाल ही में पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव परिणाम में हार झेलने के बाद कांग्रेस संगठन को नए सिरे से खड़ा करने की कवायद शुरू हो चुकी है।

कई प्रदेशों के प्रभारी बदल सकती है कांग्रेस
जिन राज्यों में कांग्रेस सत्ता से बाहर है ,उन राज्यों में नेतृत्व परिवर्तन तो होना ही है, बल्कि इससे कहीं आगे बढ़कर जिन राज्यों में अभी कांग्रेस बची हुई है,वहां भी पार्टी बड़ी सर्जरी के मूड में दिखाई दे रही है। सूत्र बताते है कि पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी ने सभी राज्यों के प्रदेश प्रभारियों के कामकाज की समीक्षा की हैं पार्टी का केंद्रीय संगठन कभी भी कई प्रदेशों के प्रभारी बदल सकती है,जिसमे छत्तीसगढ़ का नाम काफी ऊपर है।

कई वरिष्ठ नेताओं से भरा एक बड़ा खेमा पीएल पुनिया से चल रहा है नाराज
दरअसल जब छत्तीसगढ़ में बीते साल जब मुख्यमंत्री बदले जाने के संबंध में ढाई-ढाई साल का विवाद दिल्ली तक पहुंचा था, तब छत्तीसगढ़ कांग्रेस के प्रभारी होते हुए भी पीएल पुनिया कुछ विशेष नहीं कर सके थे। पूरी पार्टी दो खेमो में बंट गई थी और विवाद को सुलझाने के लिए खुद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को मशक्कत करनी पड़ी थी। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं से भरा एक बड़ा खेमा पीएल पुनिया से नाराज चल रहा है।
बताते है कि पुनिया संगठन से अधिक करीब सत्ता के हैं ,वह कई मामलों को केवल सुनकर टाल देते हैं, जिसको लेकर पार्टी में उपेक्षा झेल रहे कई नेता आहत हैं। चर्चा है कि उत्तर प्रदेश चुनाव निपट जाने के बाद केंद्रीय नेतृत्व का पूरा फोकस छत्तीसगढ़ और राजस्थान में हैं। ऐसे में इन राज्यों के असंतुष्ट नेताओं को उम्मीद है कि पंजाब से सीख लेकर पार्टी आलाकमान इस बार उनको मिलने बात करने का अवसर जरूर देंगी, इसलिए अगले कुछ दिनों में छत्तीसगढ़ से कांग्रेस के कई नेताओं का दिल्ली दौरा बढ़ेगा।
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