CHHATTISGARH: पीसीसी चीफ दीपक बैज ने उठाया सवाल, 2024 में महिला आरक्षण क्यों लागू नहीं हो सकता?
CHHATTISGARH: छत्तीसगढ़ कांग्रेस अध्यक्ष और सांसद दीपक बैज ने शनिवार को बयान जारी करके कहा कि महिलाओं का आरक्षण के लिए बहुत लंबा होने की वजह से उनको मायूसी ही झेलनी पड़ी है। इस दफा जब महिला आरक्षण बिल आया, तो सशक्तिकरण और सियासी भागीदारी की उम्मीद एक बार फिर जागी है, लेकिन देश की आधी आबादी अपने आप को ठगा सा महसूस कर रही है। महिलाओ का लग रहा है कि मुह तक आया निवाला ही छीन लिया गया है।

कांग्रेस सांसद और पीसीसी चीफ दीपक बैज ने कहा कि महिला आरक्षण बिल आनन-फ़ानन में लाया गया है, इससे महिलाओं को आरक्षण कब मिलेगा, यह कोई नहीं जानता। मोदी सरकार ख़ुद कह रही है कि जनगणना और परिसीमन से महिला आरक्षण को जोड़कर, महिलाओं को कहा गया है,इंतज़ार करना होगा, 2029 से पहले संभव ही नहीं।
बैज ने आगे कहा कि केंद्र सरकार के मंत्रियों और सांसदों ने संविधान के अनुच्छेद 82 - 81(3) का हवाला दिया है, जिसके मुताबिक 2026 का परिसीमन उसके बाद वाली जनगणना मतलब 2031 वाली जनगणना पर ही संभव है। इसका सीधा सा मतलब है कि महिला आरक्षण संभवतः 2039 तक ही हो सकता है।
दीपक बैज ने कहा कि महिला आरक्षण संबंधी बिल महिलाओं को हक देता है कि वह ना सिर्फ़ सार्वजनिक जीवन में, बल्कि संसद के पटल से महिला सशक्तिकरण, महिलाओं के विरुद्ध हो रहे अपराधों की और महिला सुरक्षा की पुरज़ोर योद्धा बनें। बैज ने आशा व्यक्त करते हुये कहा कि इस क़ानून के बन जाने के बाद महिला सांसद निडर होकर महिलाओं के खिलाफ बढ़ते हुए जघन्य अपराधों पर अपनी आवाज़ बुलंद करके अपराधियों को सज़ा दिलाने के लिए बेखौफ होकर मांग करेंगी।












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