Chhattisgarh:महंगी दवाओं से मिला छुटकारा, संजीवनी साबित हो रही है " श्री धन्वंतरी जेनेरिक मेडिकल स्टोर योजना "

रायपुर, 08 अगस्त। छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार ने राज्य में कई आयमूलक योजनाएं चला रखी हैं। छत्तीसगढ़ सरकार की तमाम योजनाओं में से एक एक योजना ऐसी है,जो आय तो नहीं देती,लेकिन आय का बड़ा हिस्सा खर्च होने से बचा रही है। उस योजना का नाम श्री धन्वंतरी जेनेरिक मेडिकल स्टोर योजना है ,जो बड़ी सख्या में लोगों को अब लाभ पहुंचा रही है। दरअसल इस योजना के माध्यम से आम जनता को कम दरों पर जरूरी जेनेरिक दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

आधी से भी कम कीमतों पर मिल रही दवा

आधी से भी कम कीमतों पर मिल रही दवा


मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के मंशा अनुरूप धन्वंतरी जेनेरिक मेडिकल स्टोर योजना के तहत मेडिकल स्टोर्स से उपभोक्ताओं को सस्ती दर पर गुणवत्तापूर्ण दवाईयां उपलब्ध कराया जा रहा है। इन दुकानों में उपभोक्ताओं को दवाइयों की एमआरपी पर न्यूनतम 50.09 प्रतिशत और अधिकतम 71 प्रतिशत छूट का लाभ दिया जाना है। जिससे लोगों के घरों में दवाइयों का खर्चा भी कम हो गया है। लोग अब जेनेरिक मेडिसिन की दुकानों से ही दवाइयां खरीदना पसंद कर रहे हैं।

लगभग 2 साल पहले शुरू हुई थी योजना

लगभग 2 साल पहले शुरू हुई थी योजना

गौरतलब है कि आम जनता को रियायती दरों में उच्च गुणवत्ता वाली जेनेरिक दवाइयां उपलब्ध कराने के मकसद से मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सोच के मुताबिक छत्तीसगढ़ में 20 अक्टूबर 2020 से श्री धन्वंतरी जेनेरिक मेडिकल स्टोर्स योजना शुरू की गई थी। सरकार की तरफ से सस्ती दरों में जेनेरिक दवाइयां उपलब्ध कराने की पहल आम नागरिक के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो रही हैं। इस योजना से लोगों के दवाई में आने वाले अनियंत्रित खर्च पर लगाम लगा है, वही जेब को भी बड़ी राहत मिली है।

आम आदमी का बजट सुधरा

आम आदमी का बजट सुधरा

अक्सर देखा जाता है कि दुर्घटना या बीमारी की चपेट में आने के बाद चलने वाले इलाज के दौरान दवाओं का खर्च बजट से बाहर चला जाता है। इसी समस्या से निजात दिलाने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने सस्ती दवाइयां उपलब्ध कराने प्रदेशभर में श्री धन्वंतरी जेनेरिक मेडिकल स्टोर शुरू किए हैं। छत्तीसगढ़ में इस योजना के तहत 159 मेडिकल स्टोर सफलतापूर्वक चलाये जा रहे हैं। इन मेडिकल स्टोर्स के माध्यम से अब तक बेची की गई दवाईयों से करीब 17 लाख 92 हजार हितग्राहियों के 17 करोड़ 38 लाख रूपए की बचत हुई है।

सस्ती दवाएं मिलने से मेडिकल स्टोर में दवाई खरीदने वालों की संख्या दिनों दिन बढ़ती जा रही है। उदाहरण के लिए बाजार में 300 रूपए के मूल्य में मिलने वाली दवा इस स्टोर में केवल 126 रुपए में मिल जाती है। इसी तरह सर्दी बुखार समेत अन्य बीमारियों की भी दवाईयां अन्य मेडिकल स्टोर की तुलना में आधे से कम कीमत पर मिल रही है। इससे लोगों का ईलाज कम खर्च पर हो पा रहा है।

सीएम भूपेश खुद कर रहे हैं योजनाओं की मॉनिटरिंग

सीएम भूपेश खुद कर रहे हैं योजनाओं की मॉनिटरिंग

छत्तीसगढ़ सरकार की इस महत्त्वपूर्ण योजना को लागू करने के लिए प्रशासन को कुछ कड़े कदम भी उठाने पड़े हैं। हाल ही में प्रदेश के मुखिया भूपेश बघेल के निर्देश के बाद राज्य के सरकारी डॉक्टरों को चेतावनी देते हुए कहा गया था कि जेनेरिक दवाई की उपलब्धता होने के बाद भी ब्रांडेड दवाई लिखने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सीएम बघेल के निर्देश के बाद प्रदेशभर के सरकारी डॉक्टरों को सिर्फ जेनेरिक दवाईयां ही लिखने का आदेश जारी किया जा चुका है। दरअसल योजना के शुरुआती चरण में सीएम बघेल के पास जनता की तरफ शिकायतों के बाद यह सख्ती बरती गई थी।

जेनेरिक दवा क्या होती है?

जेनेरिक दवा क्या होती है?

दवा बनाने वाले वैज्ञानिक किसी एक बीमारी के इलाज के लिए कई प्रकार के शोध और अध्ययन के बाद एक रसायन यानी साल्ट तैयार करते हैं। इसी साल्ट को आगे आगे चलकर दवा का रूप दिया जाता है। अपने देखा होगा कि एक ही बीमारी के लिए अलग अलग कंपनियों की दवाये बाजार में आती हैं। इसी साल्ट और कम्पोजीशन की दवा को कंपनियां नामों से बेचती है। कोई दवा महंगी दर पर बेचती है तो कोई क कीमत में, लेकिन इस रसायन का जेनेरिक नामकरण एक विशेष समिति तय करती हैं। किसी भी साल्ट का जेनेरिक नाम पूरे विश्व में एक ही रहता है।

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