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छत्तीसगढ़ में जनता चुनेगी महापौर, साय कैबिनेट ने भूपेश सरकार का बनाया नियम पलटा

Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ में आगामी नगरीय निकाय चुनावों से पहले राज्य की भाजपा सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। अब जनता खुद नगर पंचायत, नगरपालिका अध्यक्ष और नगर निगमों में महापौर का चुनाव करेगी। इसके साथ ही मतदाता दो वोट डालेंगे, एक पार्षद और दूसरा महापौर के लिए।

भाजपा ने भूपेश सरकार के 2019 के नियम को पलट दिया है, जिसके तहत महापौर का चुनाव पार्षदों से कराया जाता था। अब महापौर का चुनाव जनता द्वारा प्रत्यक्ष रूप से किया जाएगा।

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भूपेश सरकार ने 2019 में बदल दिया था नियम
भूपेश बघेल सरकार ने 2019 में महापौर और नगर पंचायत अध्यक्ष का चुनाव पार्षदों के माध्यम से कराने का नियम लागू किया था, जिससे विपक्षी भाजपा ने तीव्र विरोध किया था। इससे पहले, 1999 तक अविभाजित मध्य प्रदेश में नगर निगमों के महापौर और नगर पालिकाओं के अध्यक्ष का चुनाव प्रत्यक्ष रूप से किया जाता था। लेकिन बाद में तत्कालीन सरकार ने इसे अप्रत्यक्ष रूप से कराने का निर्णय लिया था।

महापौर का चुनाव अब होगा प्रत्यक्ष रूप से
अब छत्तीसगढ़ सरकार ने नगरीय निकायों के चुनावों में बड़ा बदलाव किया है। कैबिनेट की बैठक में यह निर्णय लिया गया कि प्रदेश के नगर पालिक निगमों के महापौर और नगर पालिकाओं के अध्यक्ष का निर्वाचन अब प्रत्यक्ष रूप से कराया जाएगा। इसके लिए छत्तीसगढ़ नगर पालिक निगम अधिनियम, 1956 (संशोधन) अध्यादेश 2024 और छत्तीसगढ़ नगर पालिका अधिनियम 1961 (संशोधन) अध्यादेश 2024 में आवश्यक संशोधन किए जाएंगे, जिनमें प्रत्यक्ष निर्वाचन और आरक्षण से संबंधित प्रावधानों का समावेश किया जाएगा।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने स्पष्ट किया कि आगामी नगरीय निकाय चुनाव में मतदाता दो वोट देंगे, एक पार्षद और दूसरा महापौर के लिए। इस फैसले से जनता को अपने महापौर के चयन में पुनः अधिकार मिलेगा।

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स्थानीय निकायों में आरक्षण में बदलाव
इसके अलावा, राज्य सरकार ने पिछड़ा वर्ग और अल्संख्यक समुदाय के लिए स्थानीय निकायों में आरक्षण के नियमों में भी बदलाव किया है। त्रिस्तरीय पंचायतों और नगरीय निकायों के चुनावों में अब अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण की सीमा 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत तक की जाएगी। यह निर्णय पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग की अनुशंसा पर आधारित है, जिससे अन्य पिछड़ा वर्ग के अधिक प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित किया जाएगा।

ओबीसी आरक्षण में संशोधन
छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम, 1993 में भी त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं के लिए ओबीसी के आरक्षण और प्रतिनिधित्व संबंधी प्रावधानों में संशोधन किए जाएंगे। इस संशोधन से राज्य में चुनावी प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता और प्रतिनिधित्व सुनिश्चित होगा।

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