बीजापुर अटैक: नक्सलियों ने पत्रकारों को की कॉल, कहा-लापता जवान हमारे कब्जे में, लेकिन सुरक्षित

बीजापुर। छत्तीसगढ़ के बीजापुर और सुकमा जिले के बॉर्डर पर शनिवार को सुरक्षाबलों पर हुए नक्सली हमले में अब तक 23 जवानों की मौत हो चुकी है। वही कई अभी भी घायल बताए जा रहे हैं। लपाता जवानों को लेकर सर्च ऑपरेशन जारी है। इसी बीच ऐसी खबरें सामने आ रही हैं कि, लापता जवान नक्सलियों के कब्जे में हैं। नक्सलियों ने माडियाकर्मियों को फोन कर यह दावा किया है। वे जवान को कोई नुकसान नहीं पहुंचाएंगे, लेकिन उसकी रिहाई के लिए शर्त रखी है।

पत्रकारों के पास आई कॉल

पत्रकारों के पास आई कॉल

नक्सलियों की ओऱ से कुछ पत्रकारों को वॉट्सऐप कॉल के जरिए लपाता जवान अपने पास होने की बात कही है। उन्होंने कहा कि जवान उनके पास है, पर उसे किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा। वह सुरक्षित है। कोबरा बटालियन के इस जवान का नाम राजेश्वर सिंह मनहास है। वे जम्मू-कश्मीर के निवासी हैं। बीजापुर एसपी कमल लोचन ने इस जवान की लोकेशन नहीं मिलने की बात कही थी। नक्सलियों ने पत्रकारों को फोन पर शर्त रखी है कि जवान पुलिस की नौकरी छोड़े और कोई दूसरा काम करे, तभी उसे रिहा किया जाएगा।

नक्सली बोले-2-3 दिन में छोड़ दूंगा

नक्सली बोले-2-3 दिन में छोड़ दूंगा

जिन पत्रकार के पास नक्सलियों ने फोन किया है उनका नाम गणेण मिश्रा है। वे बीजापुर प्रेस क्लब के अध्यक्ष हैं। उन्होंने कहा कि, वाट्सऐप कॉलर ने खुद की पहचान नहीं बताई है। उसने कहा कि, वह दो-तीन दिन जवान को छोड़ देंगे। सुकमा में नवभारत के एक पत्रकार राजा सिंह राठौड़ ने कहा कि उन्हें भी फोन आया था, लेकिन उन्होंने कहा कि फोन करने वाले ने खुद को हिडमा बताया।

कॉल करने वाले ने खुद को बताया हिडमा

कॉल करने वाले ने खुद को बताया हिडमा

उन्होंने कहा कि लापता जवान उनकी गिरफ्त में था। मैंने जवान का हाल पूछा, तो उन्होंने बताया गया कि वह सुरक्षित है। राठौड़ ने कहा कि इस व्यक्ति ने हिडमा के होने का दावा किया है। इस मामले में वह अधिक विवरण और तस्वीरों को जल्द ही साझा करेगा। नक्सलियों से मुठभेड़ के दौरान 23 जवान शहीद हुए थे। इनमें से 20 के शव नहीं मिल पाए थे। एयरफोर्स की मदद से 20 जवानों के शव रिकवर किए गए थे। एक जवान लापता था।

 700 नक्सलियों ने घेरकर की थी फायरिंग

700 नक्सलियों ने घेरकर की थी फायरिंग

हमला में घायल एक जवान ने बताया कि, हमारे साथ 450 जवानों की पार्टी थी। जिस ऑपरेशन के लिए भेजा गया था, उसे खत्म कर लौट रहे थे। जब ऑपरेशन के लिए गए थे, तब कोई नक्सली हलचल नहीं थी। लौटे तो करीब 700 नक्सलियों ने घेरकर फायरिंग शुरू कर दी। सुबह 11 बजे मुठभेड़ शुरू हुई जो दोपहर 3 बजे तक चलती रही। इस हमले का मास्टरमाइंड नक्सलियों की पिपुल्स लिब्रेशन गोरिल्ला आर्मी बटालियन 1 का कमांडर हिडमा है। बस्तर रेंज के आईजी सुदंरराज पी ने बताया कि हिडमा की मौजूदगी की जानकारी हमें मिली थी। मुठभेड़ के दौरान मारे गए नक्सलियों के शव को 3 ट्रैक्टरों में भरकर ले भागे हैं।

हिडमा दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी का बड़ा नक्सल लीडर है

हिडमा दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी का बड़ा नक्सल लीडर है

हिडमा दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी का बड़ा नक्सल लीडर है। चार साल पहले सुकमा में चलाए गए ऑपरेशन प्रहार में उसे गोली लगी थी, लेकिन बताया जाता है कि वह बच गया। उस पर 25 लाख रुपए का इनाम है। हिडमा बस्तर का रहने वाला इकलौता ऐसा आदिवासी है जो नक्सलियों की सबसे खूंखार बटालियन को लीड करता है। इससे पहले सुकमा के भेज्जी में हुए हमले के पीछे भी हिडमा ही था, इसमें सीआरपीएफ के 12 जवान शहीद हुए थे। 2013 में झीरम घाटी में कांग्रेस नेताओं के काफिले पर हुए हमले में भी हिडमा शामिल था, इस हमले में कांग्रेस नेताओं समेत 30 लोगों की हत्या कर दी गई थी। 2010 से अब तक वह 76 से अधिक जवानों को मौत के घाट उतार चुका है।

सभी फोटो सोशल मीडिया से

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