CG Election 2023: दंतेवाड़ा सीट पर अमूलकर नाग का कर्मा समीकरण, क्या तोड़ पाएंगे कांग्रेस का तिलिस्म?

CG Election 2023: दंतेवाड़ा विधानसभा से कांग्रेस से बगावत कर निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं। ब्लॉक अध्यक्ष ने कांग्रेस संगठन के साथ ही कर्मा परिवार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कर्मा परिवार पर परिवारवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया, वहीं कांग्रेस संगठन पर भी कर्मा परिवार के सदस्यों की नकारात्मक सर्वे रिपोर्ट के बावजूद उनके ही सदस्य को टिकट देने का आरोप लगाया है।

बताया जाता है कि कांग्रेस के बारसूर ब्लॉक अध्यक्ष अमूलकर नाग ने पहले कांग्रेस से टिकट मांगी थी, लेकिन छविंद्र कर्मा को टिकट देने के बाद अमूलकर ने निर्दलीय पर्चा दाखिल किया, जिसके बाद उन्हें कांग्रेस से 6 सालों के लिए निष्कासित कर दिया गया था।

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निर्दलीय चुनाव लड़ रहे अमूलकर ने खुद को बारसूर कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष बताते हुए कांग्रेस का सिपाही बताया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का सिपाही होने के बावजूद उन्हें पार्टी से बगावत करते हुए निर्दलीय चुनाव लड़ना पड़ रहा है, लेकिन अपने इस कदम से उन्होंने खुद को दु:खी बताते हुए पार्टी की खिलाफत को मजबूरी बताया। उन्होंने बस्तर टाइगर कहे जाने वाले स्व. महेंद्र कर्मा को सही मायनों में जननायक बताते हुए उनके बेटे स्व. दीपक कर्मा को भी अच्छा नेता कहा है।

अमूलकर ने कहा कि कर्मा परिवार के एक सदस्य को टिकट मिलती है और जनता उन्हें विधायक भी बनाती है, लेकिन चुनाव जीतने के बाद दंतेवाड़ा में उनके ही परिवार के 5 विधायक रहे हैं। देवती कर्मा के चुनाव जीतने के बाद उनके बेटे छविंद्र, बेटी तूलिका सहित अन्य सदस्य भी खुद को विधायक मानते हुए दंतेवाड़ा क्षेत्र में अपनी मनमानी करने पर उतारू रहे।

उन्होंने आरोप लगाते ये भी कहा है कि कांग्रेस की विचारधारा अब दंतेवाड़ा में बची ही नहीं है। बल्कि कांग्रेस की विचारधारा एक परिवार की विचारधारा बनकर रह गई है। यही कारण है कि क्षेत्र में कांग्रेस का जनाधार लगातार खत्म होता चला जा रहा है। यहां परिवार की विचारधारा ही कार्यकर्ताओं का भविष्य में पार्टी में तय किया जा रहा है।

अमूलकर ने खुद को कर्मा परिवार के क्रिया कलापों से त्रस्त बताते हुए विरोध के रूप में टिकट के लिए अपनी दावेदारी पार्टी में की थी। पार्टी ने दावेदारों के सर्वे रिपोर्ट को टिकट तय करने का सबसे बड़ा आधार माना, लेकिन दंतेवाड़ा विधानसभा के लिए उम्मीदवार तय करते समय कर्मा परिवार की नकारात्मक सर्वे रिपोर्ट थी, जिसे पार्टी के आला कमान ने दरकिनार कर दिया।बाकी दावेदारों की सर्वे रिपोर्ट सकारात्मक थी, लेकिन कर्मा परिवार के अलावा किसी को भी टिकट के लिए मान्य नहीं किया गया।

स्व. महेंद्र कर्मा व स्व. दीपक कर्मा को उन्होंने पार्टी, कार्यकर्ताओं व आम लोगों के साथ हमेशा खड़े रहने वाला बताया, लेकिन कर्मा परिवार के बाकी सदस्य केवल सत्ता का दुरूपयोग करते हुए आदिवासियों के शोषण में लगे होने का आरोप भी लगाया है। साल 2015 में नगर पंचायत चुनाव के दौरान पार्षद चुनाव के दौरान विधायक परिवार द्वारा उन्हें हराने का प्रयास करने और निर्दलीय प्रत्याशी को जीत दिलाने का काम करने का आरोप भी लगाया है। इसके बावजूद उनके खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की गई।

अमूलकर ने ये भी बताया कि कांग्रेस के वर्तमान प्रत्याशी छविंद्र कर्मा ने साल 2018 में अपनी मां देवती कर्मा के खिलाफ निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ने की तैयारी भी कर ली थी। इसके लिए नामांकन फॉर्म भी खरीद लिया था, लेकिन बाद में पार्टी के बड़े नेताओं की समझाईश के बाद उन्होंने नामांकन दाखिल नहीं किया।

संवाद सूत्र: ऋषि भटनागर, जगदलपुर/छत्तीसगढ़

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