बागेश्वरधाम के धीरेंद्र शास्त्री से मिलने पहुंची भाजपा नेत्री उमा भारती, बुंदेलखंड की राजनीति में हलचल शुरू
Uma Bharti and Dhirendra Shastri: भाजपा की फायर ब्रांड लीडर व पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने बीते रोज बुंदेलखंड के बड़ा मलहरा में बागेश्वरधाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री से मुलाकात की हैं। बुंदेलखंड के एक संत और साध्वी के बीच मुलाकात के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ गई है और चुनावी गणित को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं।

मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के बड़ा मलहरा में बागेश्वरधाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री द्वारा श्री हनुमंत कथा का आयोजन किया जा रहा हैं। बीते रोज यहां भाजपा नेत्री व पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती उनसे मिलने पहुंची थी। संत आवास में संंत धीरेंद्र शास्त्री और साध्वी उमा भारती के बीच काफी देर तक चर्चा होती रही। बताया जा रहा है कि दोनों के बीच धर्म, आध्यात्म सहित सनातन राष्ट्र के अभियान को लेकर लंबी चर्चा हुई है। चूंकी चुनाव माहौल है, इस कारण इस मुलाकात को राजनीति के चश्में से भी देखा जा रहा है। कारण बड़ा मलहरा उमा भारती की विधानसभा रहा है, वे यहीं से जीतकर मुख्यमंत्री की कुर्सी पर पहुंची थीं।
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धीरेंद्र शास्त्री मेरे छोटे भाई जैसे, उनमें शक्ति और प्रभाव विद्यमान
उमा भारती ने श्री हनुमंत कथा के मंच से कहा कि धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री उनके छोटे भाई जैसे हैं। उनके अंदर प्रभाव और शक्ति दोनों हैं। उनको देखकर लगता है कि बुंदेलखंड की धरती पर एक महान शक्ति का उदय हुआ है। उनमें वीरता और साधुता दोनों का मेल है। बुंदेलखंड के साथ पूरे भारत वर्ष का कल्याण होगा।
बुंदेलखंड की धरती से एक महान शक्ति का उदय हुआ है। धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के रूप में। बुंदेलखंड की धरती पहले ही शूरवीरों और संतों की भूमि रही हैं लेकिन वीरता और साधुता का जो मेल है वह हमारे धीरेंद्र शास्त्री में देखने को मिलती है। उनको देखकर मेरे मन में आशा जगी है कि अब न केवल बुंदेलखंड बल्कि पूरे भारत वर्ष का कल्याण होगा। सनातन और रामराज्य की स्थापना होगी। वे मेरे लिए कृष्ण के समान हैं। उनके अंदर सारी शक्तियां विद्यमान है। उमा भारती ने कहा कि मेरी उम्र भी आपको लग जाए, मेरी खुशियां भी आपको लग जाए। बुंदेलखंड की धरती का कल्याण करिए, राष्ट्र की एकात्मता को जगाईएं।
राम, गाय और तिरंगे के किए सिर भी कटा सकती हूं
उमा भारती ने मंच से कहा कि बड़ा मलहरा मेरी विधानसभा रहा हैं। मैं यहीं से जीतकर मुख्यमंत्री बनी थी। उन्होंने कहा कि तिरंगे के सम्मान के लिए उन्होंने सीएम की कुर्सी छोड़ दी थी। उन्होंने धीरेंद्र शास्त्री और जनता से मुखातिब होकर कहा कि वे राम, गाय और तिरंगे के लिए कुर्सी तो क्या अपना शीश भी कटा सकती हैं। {document1}












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