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MP News: "प्यार को छिपाया नहीं, अपनाया", छतरपुर में दो युवतियों ने कैसे रचाई एक-दूसरे के साथ शादी, जानिए

MP News: "हम एक-दूसरे से प्यार करती हैं, समाज नहीं माने तो क्या? हम तो खुद को मान चुके हैं।" - यह कहने वाली वे दो युवतियां हैं जिन्होंने छतरपुर जिले में समलैंगिक रिश्ते को न केवल स्वीकारा, बल्कि कानूनी रूप से साथ रहने का निर्णय भी लिया है।

छतरपुर के नौगांव तहसील क्षेत्र के एक गांव की 21 और 24 वर्षीय युवतियों ने मंगलवार को शपथ-पत्र के ज़रिए यह ऐलान किया कि अब वे दोनों साथ रहना चाहती हैं और अपने परिवारों से संपर्क नहीं रखेंगी। परिवार ने दो दिन पहले उन्हें 'लापता' बताया था, लेकिन उनका जवाब था - "हम कहीं नहीं भागी थीं, हम बस आज़ादी की तलाश में थीं।"

A unique tale of love in Chhatarpur Two girls got married in a same marriage affidavit

प्यार की शुरुआत, दो दिल, एक रास्ता

यह कहानी नौगांव तहसील के मऊसहानियां गांव की है, जहां 21 वर्षीय शांति (बदला हुआ नाम) और 24 वर्षीय सावित्री (बदला हुआ नाम) की मुलाकात चार साल पहले एक सामुदायिक कार्यक्रम में हुई थी। शुरुआत में दोस्ती के रूप में शुरू हुआ यह रिश्ता धीरे-धीरे गहरे प्यार में बदल गया। दोनों ने अपने दिल की बात एक-दूसरे से साझा की और समाज की बंदिशों को नजरअंदाज कर साथ जीने का फैसला किया।

सावित्री, जो 12वीं पास है और खेती में परिवार की मदद करती है, ने बताया, "हमारी पहली मुलाकात तालाब किनारे हुई थी। शांति की हंसी और उसका बिंदास अंदाज मुझे भा गया। धीरे-धीरे हम एक-दूसरे के बिना अधूरे से लगने लगे।" शांति, जो शिक्षित और आत्मनिर्भर है, ने कहा, "मैं जानती थी कि समाज और परिवार इसे स्वीकार नहीं करेंगे, लेकिन प्यार के आगे सब फीका है।"

गुपचुप रचाई थी मंदिर में शादी

दोनों युवतियों ने अपने रिश्ते को गोपनीय रखा और 9 दिसंबर 2023 को गांव के पास एक मंदिर में गुपचुप शादी कर ली। सावित्री ने बताया, "हमने मंदिर में एक-दूसरे को माला पहनाई और भगवान के सामने सात जन्मों का वादा किया। उस समय हमने किसी को नहीं बताया, क्योंकि हमें डर था कि परिवार हमें अलग कर देगा।" शादी के बाद दोनों अपने-अपने घरों में रह रही थीं, लेकिन फोन और चोरी-छिपे मुलाकातों से उनका प्यार और गहरा होता गया।

हालांकि, यह गुप्त रिश्ता ज्यादा दिन तक छिपा नहीं रह सका। दो दिन पहले, 15 जून 2025 को दोनों युवतियां अचानक घर से गायब हो गईं। परिजनों ने नौगांव थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने मोबाइल लोकेशन और अन्य सुरागों के आधार पर दोनों को ढूंढ निकाला। थाने में दोनों ने बेबाकी से बताया कि वे एक-दूसरे से प्यार करती हैं और साथ रहना चाहती हैं। इस खुलासे ने परिजनों और पुलिस को चौंका दिया।

शपथ पत्र: परिवार से नाता तोड़ने का साहसिक कदम

17 जून 2025 को शांति अपने पिता के साथ नौगांव तहसील कार्यालय पहुंची और एक शपथ पत्र दाखिल किया। शपथ पत्र में उसने लिखा, "मैं 21 साल की हूं, शिक्षित हूं, और मानसिक रूप से सक्षम हूं। मैंने अपनी मर्जी से सावित्री से समलैंगिक विवाह किया है। अब मैं परिवार से कोई संबंध नहीं रखना चाहती। अगर भविष्य में कोई विवाद होता है, तो उसकी जिम्मेदारी मेरी होगी।" सावित्री ने भी अपने शपथ पत्र में कहा, "हम दोनों बालिग हैं और दो साल पहले मंदिर में शादी कर चुके हैं। परिवार हमें साथ रहने नहीं दे रहा, इसलिए हमने कानूनी रास्ता चुना।"

हालांकि, स्टांप वेंडर ने शपथ पत्र पर विवरण तो लिख दिए, लेकिन समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता न होने के कारण किसी नोटरी ने इसे रजिस्टर नहीं किया। इसके बाद दोनों युवतियां शपथ पत्र लेकर नौगांव थाने पहुंचीं, लेकिन पुलिस ने भी इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया। नौगांव थाना प्रभारी सटीक सिंह ने बताया, "दोनों युवतियां सुरक्षा की मांग लेकर आई थीं। उनके परिजनों ने गुमशुदगी की शिकायत की थी, लेकिन अब तक इस मामले में कोई औपचारिक शिकायत नहीं आई है।"

परिवार का विरोध: "हमारी बेटी अब हमारी नहीं"

दोनों युवतियों के इस फैसले से उनके परिवार सकते में हैं। शांति के पिता ने कहा, "हमें नहीं पता था कि वह ऐसा कदम उठाएगी। हमने उसे समझाने की कोशिश की, लेकिन वह नहीं मानी। अब हमने उससे सारे रिश्ते तोड़ लिए।" सावित्री के परिवार ने भी यही रुख अपनाया। उनकी मां ने रोते हुए कहा, "हमारी बेटी ने समाज में हमारी नाक कटवा दी। अब वह हमारे लिए मर चुकी है।"

परिवारों के इस कड़े रवैये के बावजूद, दोनों युवतियां अपने फैसले पर अडिग हैं। शांति ने कहा, "हमें पता था कि परिवार और समाज हमें स्वीकार नहीं करेंगे। लेकिन हमने अपने प्यार को चुना। अब हम नया जीवन शुरू करेंगे।" सावित्री ने हंसते हुए कहा, "हमारे लिए एक-दूसरे का साथ ही सबकुछ है। दुनिया चाहे जो कहे, हमें फर्क नहीं पड़ता।"

छतरपुर में दूसरा समलैंगिक विवाह: एक उभरता ट्रेंड?

यह छतरपुर में तीन महीने के भीतर समलैंगिक विवाह का दूसरा मामला है। इससे पहले, मार्च 2025 में नौगांव के दौरिया गांव की 23 वर्षीय सोनम यादव और असम की 22 वर्षीय मानसी वर्मन ने पुलिस की मौजूदगी में थाने के बाहर समलैंगिक विवाह रचाया था। उनकी मुलाकात इंस्टाग्राम पर हुई थी, और दोनों ने परिवार की सहमति से शादी की थी। सोनम और मानसी की शादी को उनके परिवारों ने स्वीकार कर लिया था, और दोनों अब असम में एक फैक्ट्री में काम सीख रही हैं।

कानूनी स्थिति: प्यार को मान्यता का इंतजार

भारत में समलैंगिक विवाह को अभी तक कानूनी मान्यता नहीं मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने 17 अक्टूबर 2023 को समलैंगिक विवाह को वैध करने से इनकार कर दिया था, यह कहते हुए कि यह मामला संसद के दायरे में है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि समलैंगिक जोड़े साथ रह सकते हैं, और उनकी निजी स्वतंत्रता को संरक्षण मिलेगा, लेकिन उन्हें विवाह के कानूनी अधिकार, जैसे संपत्ति, गोद लेना, या उत्तराधिकार, नहीं मिल सकते।

केंद्र सरकार ने 2023 में सुप्रीम कोर्ट में दायर हलफनामे में कहा था कि विवाह की अवधारणा "विपरीत लिंग के दो व्यक्तियों" के बीच होती है, और समलैंगिक विवाह भारतीय परिवार की पारंपरिक परिभाषा के खिलाफ है। इस कानूनी स्थिति के कारण शांति और सावित्री का शपथ पत्र नोटरी द्वारा रजिस्टर नहीं हो सका, लेकिन यह उनके प्यार और साहस का प्रतीक बन गया।

समर्थन और विरोध का मिश्रण

इस घटना ने छतरपुर में मिली-जुली प्रतिक्रियाएं बटोरी हैं। कुछ लोग इसे प्यार की जीत मान रहे हैं, तो कुछ इसे सामाजिक मूल्यों के खिलाफ बता रहे हैं। स्थानीय निवासी रामकिशोर ने कहा, "यह प्यार का मामला है। अगर दोनों बालिग हैं और साथ रहना चाहती हैं, तो इसमें गलत क्या है?" वहीं, एक अन्य निवासी ममता देवी ने कहा, "यह हमारे संस्कारों के खिलाफ है। ऐसी शादियां समाज में अराजकता फैलाएंगी।"

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