जयललिता: ग्लैमरस अभिनेत्री से राजनीति की 'आयरन लेडी' बनने तक का सफर
जयललिता ने जहां भी हाथ रखा, वहां न सिर्फ सफलता के नये आयाम बनाये, बल्कि लोगों के दिलों में अपनी जगह बनाई।
नई दिल्ली। जयललिता, एक ऐसी शख्सियत, जिसने एक खूबसूरत अभिनेत्री से लेकर राजनीति के अखाड़े तक हर जगह अपना वर्चस्व कायम किया।
जयललिता ने जहां भी हाथ रखा, वहां न सिर्फ सफलता के नये आयाम बनाये, बल्कि लोगों के दिलों में अपनी जगह बनाई।
तो आईए आपको हैं बॉलीवुड अभिनेत्री से 'अम्मा' बनकर लोगों के दिलों में छा जाने वाली जयललिता के राजनीतिक जीवन के उतरा-चढ़ाव के बारे में विस्तार से बताते हैं।


जयललिता का परिचय
जयललिता का जन्म 24 फरवरी 1948 में एक अय्यर परिवार में कर्नाटक के मैसूर शहर में हुआ था। घर का माहौल पढ़ाई-लिखाई वाला था। जयललिता के दादा मैसूर राज्य में सर्जन थे। जयललिता का पूरा नाम जयललिता जयराम है, लेकिन जब वो मात्र 2 साल की थी तभी उनके पापा चल बसे, जिसके बाद ही उनके जीवन में गरीबी और दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।

गरीबी में बीता बचपन इसलिए फिल्मों में काम करना पड़ा
माली हालत पतली होने पर उनकी मां बैंगलोर अपने मां-बाप के पास चली आयीं और पेट पालने के लिए उन्होंने तमिल सिनेमा में 'संध्या' के नाम से काम करने का फैसला किया। यह वो वक्त था जब फिल्मों में काम करने वाली महिलाओं को लोग इज्जत से नहीं देखते थे। फिल्मों में काम करने वालों को इज्जत नहीं मिलती थी लेकिन अपनी मजबूरी की वजह से जयललिता की मां ने फिल्मों में काम तो किया लेकिन बेटी जयललिता को फिल्मी माहौल से दूऱ रखने के लिए चेन्नई भेज दिया।
बला की खूबसूरत जयललिता को पढ़ाई के साथ संगीत में रूचि थी, वो बहुत अच्छा नृत्य कर सकती थीं। वह काफी मेधावी थी उन्होंने अपनी सारी पढाई सरकारी वजीफे पर की। लेकिन जब वो 13 साल की हुईं तभी उनकी लाइफ ने करवट बदली, जो उनके जीवन का अहम मोड़ बन गया। 'संध्या' की फिल्म के एक निर्माता की नजर जयललिता पर पड़ी और उन्होंने उन्हें हिरोईन बनने का ऑफर दिया। जिसे उनकी मां ने स्वीकार कर लिया और जयललिता ने ना चाहते हुए भी फिल्मों के लिए हां बोल दिया और वो हिरोईन बन गईं।

15 साल की उम्र में फिल्मों में एंट्री
मात्र 15 साल की उम्र में जयललिता ने 'एपिसल' नाम की अंग्रेजी फिल्म में काम किया। 15 साल की उम्र में बनीं अभिनेत्री उनके खूबसूरत अदायगी और मदमस्त काया की खबर दूसरे राज्यों में पहुंची और जयललिता देखते-देखते ही तमिल के अलावा तेलुगू, कन्नड और हिंदी फिल्मों की पॉपलुर हस्ती बन गईं। लेकिन तभी उनकी मुलाकात सुपरस्टार एमजी रामचंद्रन से हुई, जिनकी नजदीकियों की वजह से जयललिता का जितना नाम हुआ उससे कहीं ज्यादा उन्हें बदनामी भी झेलनी पड़ी।
एमजीआर के साथ रिश्तों को लेकर झेली जलालत कहा जाता है कि एमजी रामचंद्रन और जयललिता एक-दूजे से प्रेम करते थे लेकिन एमजी रामचंद्रन विवाहित थे और दो बच्चों के पिता थे, जिसकी वजह से उनकी और जयललिता की शादी नहीं हो सकती थी, इसलिए दोनों के रिश्तों को नाम नहीं मिला।

लगभग 300 फिल्मों में किया काम
कन्नड़, तमिल, अंग्रेजी और हिंदी भाषा में जयललिता ने लगभग 300 फिल्मों में काम किया। कन्नड भाषा में उनकी पहली फिल्म 'चिन्नाडा गोम्बे' है जो 1964 में प्रदर्शित हुई। जयललिता तमिल की पहली ऐसी अभिनेत्री थीं जिन्होंने स्कर्ट पहनकर भूमिका निभाई थी। जयललिता तमिल फिल्मों में सबसे लोकप्रिय अदाकारा थीं। यह कम लोग ही जानते होंगे कि 20 साल के अपने फिल्मी सफर में जयललिता ने सिर्फ एक ही हिंदी फिल्म की और वह थी निर्देशक टी प्रकाशराव की फिल्म इज्जत।
जयललिता की यह सबसे चर्चित फिल्म थी और इस फिल्म में उनके साथ हीरो की भूमिका में बॉलीवुड के सुपरस्टार धर्मेंद्र थे। इस फिल्म में जयललिता एक आदीवासी लड़की के किरदार में नजर आईं। हालांकि यह फिल्म कमाल नहीं दिखा पाई और फ्लॉप हो गई। इसके साथ ही जयललिता ने हिंदी फिल्मों को अलविदा कह दिया। मगर अपने 20 के फिल्मी करियर में जयललिता ने अन्य भाषाओं में सुपर-डुपर हिट फिल्म दीं।

एमजी रामचंद्रन मेरे मेंटर
सार्वजिनक रूप से जयललिता हमेशा कहती रही थीं कि एमजी रामचंद्रन उनके मेंटर थे और इससे ज्यादा और कुछ नहीं। वो जब 16 साल की थीं तब उनसे मिली थीं और उस समय एमजी रामचंद्रन की उम्र 42 साल थी। ऐसे में हमारे बीच में अफेयर जैसी बातें कहां आ सकती थीं। हालांकि तत्कालीन समय में मीडिया ने जयललिता के लिए एमजी रामचंद्रन की 'mistress' जैसे शब्द का प्रयोग किया था।एमजी रामचंद्रन को हमेशा बताया मेंटर लेकिन राम चंद्रन की मौत के वक्त जिस तरह से एमजीआर की पत्नी जानकी रामचंद्रन ने जयललिता के साथ व्यवहार किया था
और उन्हें उनके पार्थव शरीर से दूर रखा था उससे साफ हो गया था कि वाकई में जयललिता और राम चंद्रन के रिश्ते में वो नजदीकियां थीं जिन्हें उनकी पत्नी स्वीकार नहीं कर सकती थीं। अपने अपमान के बाद भी जयललिता ने एमजीआर के पार्थव शरीर के दर्शन किये थे और ऐसा रूप धारण किया था जैसे कि किसी विधवा का होता है।

जयललिता का राजनीतिक सफर
माना जाता है कि एमजी रामचंद्रन ने जयललिता की राजनीति में एंट्री करवाई थी। एम करुणानिधि की पार्टी द्रमुक से टूटने के बाद एमजीआर ने अन्नाद्रमुक का गठन किया। साल 1983 में एमजीआर ने जयललिता को पार्टी का सचिव नियुक्त किया और राज्यसभा के लिए मनोनित किया। इस बीच जयललिता और एमजीआर के बीच मतभेद की खबरें भी आईं लेकिन जयललिता ने 1984 में पार्टी के प्रचार अभियान का नेतृत्व किया।एमजीआर के निधन के बाद जयललिता साल 1987 में पूरी तरह से उभर कर सामने आईं। उन्होंने खुद को उनकी विरासत का वारिस घोषित कर दिया।
सबसे कम उम्र की मुख्यमंत्री बनीं जयललिता
जयललिता 24 जून 1991 से 12 मई तक तमिलनाडु की पहली निर्वाचित मुख्युमंत्री और राज्य की सबसे कम उम्र की मुख्यमंत्री बनीं। इसके बाद 1996 में उनकी पार्टी चुनावों में हार गईं और वे खुद भी चुनाव हार गईं। इस हार के बाद सरकार विरोधी जनभावना और उनके मंत्रियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के कई मामले उजागर हुये। पहली बार मुख्यमंत्री रहते हुए उनपर कई गंभीर आरोप लगे। भ्रष्टाचार के मामलों और कोर्ट से सजा होने के बावजूद वे अपनी पार्टी को चुनावों में जिताने में सफल रहीं। हालांकि गंभीर आरोपों के कारण उन्हें इस दौरान काफी कठिन दौर से गुजरना पड़ा, पर 2001 में वे फिर एक बार तमिलनाडु की मुख्यमंत्री बनने में सफल हुईं।

वर्ष 2002 में फिर संभाली सीएम की कुर्सी
जब जयललिता को मद्रास हाईकोर्ट से राहत मिली तो एक बार फिर 2002 में मुख्यमंत्री बनीं। इसके बाद अप्रैल 2011 में जब 11 दलों के गठबंधन ने 14वीं राज्य विधानसभा में बहुमत हासिल किया तो वे तीसरी बार मुख्यमंत्री बनीं। उन्होंने 16 मई 2011 को मुख्यीमंत्री पद की शपथ लीं और तब से वे राज्य की मुख्यमंत्री हैं।
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