बैंकों के KYC फॉर्म में पूछा जा सकता है आपका धर्म, जानिए क्या है आने वाला नया नियम
बेंगलुरु। अगर आपका खाता भारत के किसी भी निजी या सरकारी बैंक में है तो अब नो योर कस्टमर (केवाईसी) फॉर्म्स भरते समय आपको अपना धर्म बताना पड़ सकता है। जी हां, जल्द ही बैंकों के केवाईसी में धर्म का एक कॉलम जोड़ा जा सकता है जिसमे खाता धारक को अपने धर्म की जानकारी देना होगा। मिली जानकारी के मुताबिक ऐसा करने की वजह बैंको ने विदेशी मुद्रा विनिमयन अधिनियम के नियमों में बदलाव को बताया है। इस नियम में मुसलमानों को छोड़कर देश के अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों को एनआरओ खोलने जैसी सुविधाएं देने के लिए कहा गया है।
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क्या है NRO अकाउंट
काफी लोगों को पता नहीं होता कि एनआरओ अकाउंट दरअसल है क्या? तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अनिवासी साधारण रुपया बचत खाता को एनआरओ अकाउंट कहा जाता है। इस खाते में कोई भी अनिवासी भारतीय या शरणार्थी भारत के बैंकों में अपना बचत या चालू खाता खोल सकता है। जिसमें वह भारत में कमाई गई रकम को जमा कर सकता है। आने वाले नए नियम में ऐसे लोगों को ही सुविधा देने के लिए धर्म की जानकारी मांगी गई है। इसमें खाता धारको को भारत में संपत्ति खरीदने की सुविधा भी दी गई है।

इन देशों के प्रवासियों को नहीं मिलेगी सुविधा
हाल ही में लागू किए गए नागरिकता संशोधन कानून की तरह ही भारतीय रिजर्व बैंक ने 2018 में फेमा में संशोधन किया। बदलाव के बाद यह सुविधा भी सिर्फ पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई धर्म के लोगों को ही दी जाएगी। वहीं भारत के पड़ोसी देश श्रीलंका, म्यांमार और तिब्बत से भारत आने वाले नागरिकों को यह सुविधा नहीं दी गई है।

पहले क्या थे नियम
फेमा नियमों में बदलाव से पहले एक विदेशी नागरिक, चाहे वे किसी भी धर्म या देश का हो, लंबी अवधि के लिए एफए रेसिडेंट खाता और छह महीने की छोटी अवधि के लिए एनआरओ खाता खुलवा सकता था। पिछले साल किये गये इन बदलावों पर वित्त मंत्रालय के एक सूत्र का कहना है कि वित्तीय जानकारों का ध्यान वित्तीय संकट की तरफ था, मगर किसी ने भी बैंकिंग नियमों में धार्मिक भेदभावपूर्ण नियम की अपेक्षा नहीं की होगी।

पिछले साल बदला गया नियम
फेमा नियमों के मुताबिक पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के अल्पसंख्यक समुदाय के लोग जो लॉन्ग टर्म वीजा से भारत आए हैं उन्हें यह सुविधा देने के लिए नियमों में पिछले साल ही बदलाव किया गया है। गृह मंत्रालय के सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक नौकरशाह और राजनीतिज्ञों का ध्यान वित्तिय संकट पर था। बताया गया कि, उम्मीद नहीं थी बैंकिंग से जुड़े नियमों में धार्मिक भेदभाव किया जाएगा।
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