रिकॉर्ड निचले स्तर पर रुपया, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 42 पैसे टूटकर 80.38 पर पहुंचा
नई दिल्ली, 22 सितंबर: भारतीय रुपये में बड़ी गिरावट आई है, जहां गुरुवार सुबह कारोबार शुरू होते ही वो अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 42 पैसे टूटकर 80.38 पर आ गया। इसके साथ ही रुपया अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। इससे पहले बुधवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 79.9750 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि बुधवार सुबह 79.79 पर कारोबार शुरू हुआ था। रुपये के निचले स्तर पर पहुंचते ही विपक्ष को केंद्र सरकार पर हमला करने का मौका मिल गया है।

दरअसल बुधवार को डॉलर इंडेक्स 110.87 पर पहुंच गया था, जो दो साल का उच्चतम स्तर है। इसके बाद अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरें 0.75 फीसदी बढ़ाने की घोषणा की। ये कदम उसने महंगाई को कंट्रोल में करने के लिए उठाया है। लगातार तीसरी बार बढ़ोतरी के बाद बैंक का बेंचमार्क फंड दर बढ़कर 3% से 3.25% तक हो गया है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक 2023 तक ब्याज दरें 4.6 प्रतिशत तक जा सकती हैं, जिसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
क्यों मजबूत हो रहा डॉलर?
दरअसल कोरोना महामारी के बाद अमेरिका की अर्थव्यवस्था बेहतरीन प्रदर्शन कर रही। वहां पर महंगाई दर ज्यादा है और रोजगारी की स्थिति भी मजबूत है। इसके अलावा अन्य सेक्टर भी अच्छा काम कर रहे हैं। फेडरल रिजर्व भी महंगाई काबू करने के लिए कई कड़े कदम उठा रहा, जिस वजह से डॉलर लगातार मजबूत होता जा रहा है।
क्या है डॉलर की मजबूती का मतलब?
अगर आप अमेरिका जाते हैं तो आपको उससे पहले डॉलर खरीदना होगा। डॉलर की मजबूती के बाद अब आपको एक डॉलर खरीदने के लिए 80.38 रुपये देना होगा। वहीं कोई अमेरिकी भारत आता है, तो वो एक डॉलर के बदले 80.38 रुपये पाएगा। डॉलर की मजबूती से अंतरराष्ट्रीय व्यापार सबसे ज्यादा प्रभावित होता है, क्योंकि भारत ज्यादातर देशों से डॉलर में ही व्यापार करता है।












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