RBI ने भारी दबाव के बावजूद क्यों नहीं घटाई ब्याज दरें, ये है इसकी बड़ी वजह!
नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक ने मौद्रिक नीति की समीक्षा के बाद ब्याज दरों में कोई कटौती न करने का फैसला किया है। केन्द्रीय बैंक ने रेपो रेट को 5.75 फीसदी और बैंक रेट को 6.25 फीसदी पर स्थिर रखा है। अनुमान लगाया जा रहा था कि इस बार ब्याज दरों में कटौती कर के भारतीय रिजर्व बैंक दिवाली से पहले से देश के लोगों को बड़ा तोहफा देगा, लेकिन सभी की उम्मीदों पर केन्द्रीय बैंक ने पानी फेर दिया। अब यहां सवाल यह उठता है कि आखिर भारतीय रिजर्व बैंक ने ब्याज दरों में कोई कटौती क्यों नहीं की है? क्या इसके पीछे भारतीय रिजर्व बैंक या फिर मोदी सरकार की कोई और रणनीति है या फिर अभी ब्याज दरों में कोई कटौती करने की जरूरत नहीं समझी गई। भारतीय रिजर्व बैंक के इस फैसले से देशभर के लोग निराश तो हुए हैं, लेकिन उन्हें समझ नहीं आ रहा कि देश के आर्थिक संकट से जूझने के बावजूद बैंक ने ब्याज दरों में राहत क्यों नहीं दी गई है।

राहत न देने की ये हो सकती है बडी वजह
भारतीय रिजर्व बैंक ने मौद्रिक समीक्षा के बाद ब्याज दरों में कोई राहत नहीं दी है, इसकी बड़ी वजह यह हो सकती है कि केन्द्रीय बैंक थोड़ा रुक कर भारतीय अर्थव्यवस्था पर नोटंबदी और जीएसटी के प्रभाव को देखना चाहता है। नोटबंदी को लागू करते समय ही यह कहा गया था कि इसके परिणाम लंबी अवधि में देखने को मिलेंगे, जिसके चलते भी भारतीय रिजर्व बैंक ने ब्याज दरों में कोई कटौती न करने का फैसला लिया हो सकता है। जैसा कि अभी इस वित्त वर्ष की सिर्फ एक तिमाही के नतीजे सामने आए हैं और दूसरी तिमाही के नतीजे अभी आने बाकी हैं। हालांकि, अब 1 अक्टूबर से तीसरी तिमाही शुरू हो चुकी है।

महंगाई बढ़ने का था डर!
मॉर्गन स्टेनली ने एक रिसर्च नोट में कहा था कि भारतीय रिजर्व बैंक मौद्रिक नीति की समीक्षा के बाद दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा और स्थिर ही रखेगा। इसके पीछे तर्क यह दिया गया था कि अगर ब्याज दरें घटाई जाती हैं, तो इससे महंगाई बढ़ सकती है और भारतीय रिजर्व बैंक किसी भी हालत में महंगाई नहीं बढ़ने देना चाहता है। पहले माना जा रहा था आर्थिक संकट से निपटने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ब्याज दरों में कटौती कर सकता है। एसोचैम ने करीब 0.25 फीसदी की कटौती की उम्मीद जताई थी। यहां तक की नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने भी उम्मीद जताई थी कि भारतीय रिजर्व बैंक दरें घटाएगा।

ये हो सकता है सियासी गणित
सरकार की तरफ से भी किसी तरह की कोई कटौती ना किए जाने का सुझाव दिया गया हो सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि आने वाले दिनों में इसका कोई चुनावी फायदा मिलने की उम्मीद नहीं है। दरअसल, जिन राज्यों (गुजरात और हिमाचल प्रदेश) में चुनाव होने वाले हैं, उनमें पहले से ही भारतीय जनता पार्टी की जीत लगभग तय मानी जा रही है। इन राज्यों में भाजपा की स्थिति अच्छी होने से भी सरकार ने ब्याज दरों में कटौती न करने का सुझाव दिया हो सकता है। आखिरकार, आम जनता को दी जाने वाली राहत का भार सीधा सरकार पर ही पड़ता है।

इन्होंने कहा था नहीं घटेंगी ब्याज दरें
भारतीय स्टेट बैंक ने एक रिपोर्ट जारी की थी और उसके जरिए यह साफ कर दिया था कि भारतीय रिजर्व बैंक इस बार मौद्रिक समीक्षा के बाद ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा। बैंक ने यह साफ कर दिया था कि इस बार किसी भी तरह की राहत मिलने की उम्मीद काफी कम है। एचडीएफसी बैंक ने कहा था कि भारतीय रिजर्व बैंक ब्याज दरों में कटौती तो करेगा, लेकिन अक्टूबर महीने में ऐसा कुछ नहीं होगा। कटौती की गुंजाइश वित्त वर्ष के आखिरी महीनों में होगी।












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