पूरी लैंड रोवर कंपनी ही खरीद डाली, जब रतन टाटा का हुआ अपमान, दुनिया ने देखा भारत का टशन
भारत ही नहीं दुनिया के दिग्गज उद्योगपति रतन टाटा का निधन हो गया है। बुधवार की शाम उनके निधन की खबर सामने आते ही लोग रतन टाटा को श्रद्धांजलि अर्पित करने लगे। जिस तरह से रतन टाटा ने देश की अर्थव्यवस्था को एक नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में अपना योगदान दिया, उसे कोई नहीं भूल सकता है। रतन टाटा ऐसी शख्सियत थे, जिन्हें भुला पाना नामुमकिन है।
रतन टाटा को लोग एक बेहतरीन उद्योगपति के साथ जबरदस्त इंसान के तौर पर याद करते हैं। जिस तरह से उन्होंने समाज के लोगों के लिए दरियादली दिखाई, वैसी मिसाल शायद ही कोई देखने को मिले।

काफी शौकीन थे रतन टाटा
यूं तो रतन टाटा सादा जीवन जीने के लिए जाने जाते थे, लेकिन कुछ चीजों का उन्हें काफी शौक था, जिसमे पहले नंबर पर उनका कार प्रेम और दूसरे नंबर पर पियानो बजाना था। उन्हें विमान उड़ाना भी काफी पसंद था।
खुद रतन टाटा ने कहा था कि टाटा संस से रिटायरमेंट के बाद अब मैं अपना जीवन अपने शौक को पूरा करने में व्यतीत करना चाहता हूं।
रतन टाटा के नाम यूं तो कई उपलब्धियां हैं, जिसकी गिनती करना भी मुश्किल है, लेकिन आज हम आपके साथ टाटा मोटर्स की दशा और दिशा बदलने की कहानी को साझा करने वाले हैं।
रतन टाटा ने ना सिर्फ देश बल्कि दुनिया में भी अपनी काबिलियत का लोहा मनवाया था। टाटा मोटर्स को लग्जरी ब्रांड बनाने में रतन टाटा की काफी अहम भूमिका है।
जैगुआर को ही खरीद लिया
रतन टाटा को टाटा मोटर्स लग्जरी ब्रांड जगुआर और लैंड रोवर (जे) का अधिग्रहण करने की अपनी शानदार उपलब्धि के लिए जाना जाता है। दूरदर्शी रतन टाटा द्वारा 16 साल पहले किए गए इस साहसिक कदम ने देश की कॉर्पोरेट गाथा में एक महत्वपूर्ण अध्याय लिखने का काम किया।
ऐसे समय में जब फोर्ड मोटर कंपनी वित्तीय उथल-पुथल का सामना कर रही थी, अपने लग्जरी सेगमेंट को बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रही थी, टाटा मोटर्स ने इन प्रतिष्ठित ब्रांड्स को खरीदने के लिए कदम बढ़ाया।
इन फैसलों में रतन टाटा की दूरदर्शिता नजर आती है। टाटा की किफायती वाहनों के लिए जाना जाता था, लेकिन लैंड रोवर के अधिग्रहण ने टाटा को एक नई पहचान देने का काम किया और पूरी दुनिया में टाटा ग्रुप की धाक जमाने का काम किया।
अपमान का बदला लेना जानते थे रतन टाटा
एक दौर था जब टाटा मोटर्स संकट के दौर से गुजर रही थी, उस वक्त रतन टाटा इसकी यात्री कार यूनिट को बेचना चाहते थे। इसके लिए रतन टाटा ने फोर्ड के मालिक बिल फोर्ड से 1999 में मुलाकात की थी। लेकिन इस दौरान बिल फोर्ड ने कुछ ऐसा कहा जिसे रतन टाटा कभी नहीं भूले।
बिल फोर्ड ने कहा कि हम टाटा के कार के बिजनेस को खरीदकर बड़ा ऐहसान करने जा रहे हैं। इस बात को सुनकर रतन टाटा काफी आहत हुए थे, यही वजह है कि रतन टाटा ने टाटा मोटर्स को नए सिरे से खड़ा करना शुरू किया।
वर्ष 2008 में रतन टाटा ने भारत की सबसे सस्ती टाटा नैनो कार को लॉन्च किया। जबकि फोर्ड मोटर्स बुरे दौर से गुजर रही थी। ऐसे समय में रतन टाटा ने फोर्ड के लग्जरी कार ब्रांड जगुआर लैंड रोवर को खरीदने का फैसला लिया।
ऐसे में 10 साल के भीतर रतन टाटा ने ना सिर्फ टाटा मोटर्स को खड़ा किया बल्कि जैगुआर को खरीदकर अपने अपमान का भी बदला ले लिया।
दुनियाभर में जमाई धाक
जिस तरह से टाटा ग्रुप ने जैगुआर जैसे लग्जरी कार ब्रांड का अधिग्रहण किया, वह ना सिर्फ रतन टाटा बल्कि देशभर के लोगों के लिए गर्व का पल था। लोग जैगुआर जैसे ब्रांड को भारतीय होता देख काफी गौरवान्वित महसूस कर रहे थे। इसका पूरा श्रेय रतन टाटा की काबिलियत को जाता है।
रतन टाटा ने दुनिया को अलविदा कह दिया है, लेकिन इसके साथ ही उन्होंने लोगों को कड़ी मेहनत करके अपनी सफलता हासिल करने का संदेश भी दिया है। उन्होंने हमेशा शांत रहकर पर्दे के पीछे सा काम किया और टाटा ग्रुप को एक नई बुलंदियों तक पहुंचाने का कार्य किया।












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