'दांत खट्टे करना' भी मंहगा! टमाटर के बाद इमली के दाम 100% बढ़े, कितने में बिक रही? जानिए
पिछले कुछ दिनों से फलों को खुदरा दामों में बढोत्तरी दर्ज की जा रही है। टमाटर के बाद इमली सबसे महंगी हुई है। इमली की कीमतें बढ़कर दुगनी हो गई हैंं।
फलों को खुदरा दामों को लेकर पिछले दो महीनों में काफी उथल पुथल रही। टमाटर ही नहीं अब इमली के दाम भी बढ़ गए हैं। इससे पहले तीखा फल दो महीने पहले खुदरा बाजारों में 80 से 100 रुपये प्रति किलोग्राम बिक रहा था। लेकिन अब इसकी कीमत 100 प्रतिशत तक बढ़ चुकी है। महंगे टमाटरों के विकल्प के रूप में इमली का उपयोग, जो 100 रुपये प्रति किलोग्राम को पार कर गया है, इमली की बढ़ती मांग और कीमत का मुख्य कारण बताया जा रहा है। उपज और कृषि क्षेत्र में कमी भी इमली की मूल्य वृद्धि की बड़ी वजह है।
इमली करीब दो महीने पहले खुदरा बाजार में 80 से 100 रुपये किलो बिक रही थी। अब इसके दाम 100 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। अब इसकी कीमत 120 से 200 रुपये के बीच है। कर्नाटक में तुमकुरु एपीएमसी के थोक व्यापारी शरथ कुमार के मुताबिक पिछले कुछ दिनों में फलों की मांग सामान्य से काफी अधिक देखी जा रही है। जुलाई के महीने में फलों की मांग 40 प्रतिशत अधिक है।

इमली की बात करें तो इसकी खरीद का मौसम जनवरी से अप्रैल के बीच का होता है। जिसके बाद इसे कोल्ड स्टोरेज में स्टोर किया जाता है। जिन किसानों ने इसका भंडारण किया है, वे इस समय बेहतर कीमत में बेंच रहे हैं। 19 जुलाई को 14,000 रुपये प्रति क्विंटल की दर से 98 क्विंटल की खरीद की गई। इससे पहले पिछले साल इमली 1,720 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदी गई थी।
इमली की कीमतें दो महीने पहले 80 से 100 रुपए के बीच थीं। लेकिन अब 120 से 200 रुपए प्रति किलो हो चुकी हैं। ऐसे में मौजूदा समय में इमली के दाम 100 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। इसकी वजह बागवानी क्षेत्र में कमी भी मानी जा रही है। बागवानी विभाग द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, 2018 में 12,173 हेक्टेयर में इमली की खेती की गई, जिसकी उपज 58,000 टन थी। 2021-22 में, राज्य ने 10,508 हेक्टेयर में इमली की खेती की और उत्पादन केवल 40,068 टन हुआ। इसमें कर्नाटक शीर्ष पांच इमली उत्पादक राज्यों में से एक है।












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