तेल की आसमान छूती कीमतों के बावजूद कंपनियों को पेट्रोल-डीजल पर हो रहा घाटा, जानिए वजह
पिछले 20 दिनों में तेल की कीमतों में स्थिरता रहने के कारण तेल कंपनियों को भारी नुकसान हो रहा है।
नई दिल्ली। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में पिछले 20 दिनों से कोई बदलाव नहीं हुआ है। आखिरी बार ईंधन की कीमतें 27 फरवरी को बदली गई थीं। इससे आम लोगों को कुछ हद तक राहत देने का काम किया है लेकिन इससे तेल कंपनियों को घाटा हुआ है। तेल विपरण (मार्केटिंग) कंपनियों को पिछले 20 दिनों में पेट्रोल पर 4 रुपए प्रति लीटर और डीजल पर 2 रुपए प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है।

इन बीस दिनों को छोड़ दें तो इससे पहले मुंबई में पेट्रोल 103 रुपए प्रति लीटर बिक रहा था जो अब 97.57 प्रति लीटर पर बेचा जा रहा है। मुंबई के अलावा देश के कई राज्यों में पेट्रोल 100 रुपए प्रति लीटर (20 दिनों से पहले) की दर से बिक रहा था, लेकिन जैसे ही पांच राज्यों में चुनावों की घोषणा हुई, तेल के दामों में दैनिक बदलाव को रोक दिया गया। जबकि इन 20 दिनों में भारत का कच्चे तेल पर खर्च 66.82 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है जो 26 फरवरी को 64.68 डॉलर प्रति बैरल था।
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वहीं, इस बीस दिनों में रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर हुआ है। आम तौर पर तेल मार्केटिंग कंपनियां कच्चे तेल के मूल्य निर्धारण के लिए औसतन 15 दिन का समय लेकर चलती हैं। चूंकि ब्रेंट क्रूड उच्च स्तर पर चल रहा है और पिछले कुछ दिनों में इसमें थोड़ी कमी आई है, इसलिए रिफाइनर्स के लिए औसत अभी भी अधिक है।
मालूम हो कि फरवरी में तेल की आसमान पर पहुंची कीमतों ने जनता के बीच तूफान ला दिया था। इसको लेकर तमाम राज्य सरकारों ने केंद्र पर हमला बोला था। तेल के दामों में आई तेजी के कारण कई राज्यों में पेट्रोल 100 रुपए से ज्यादा की कीमत पर बिका था। हालांकि असम, मेघालय और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों ने आम जनता को राहत देने के लिए तेल पर लगने वाले टैक्स में कमी करने की घोषणा की है।












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