लोन लेने वालों पर मंगलवार को गिरेगा फाइनेंशियल बम

राजन ने चार सितंबर को गवर्नर पद संभालने के दो सप्ताह बाद ही रेपो दर में 25 आधार अंकों की वृद्धि कर इसे 7.5 फीसदी कर दिया था और महंगाई को चिंताजनक बताया था। रेपो दर वह दर है, जिस पर वाणिज्यिक बैंक आरबीआई से छोटी अवधि के लिए कर्ज लेते हैं। अधिकांश विश्लेषकों का अनुमान है कि महंगाई कम करना अब भी राजन की प्राथमिकता में शामिल है, इसलिए मौद्रिक नीति की समीक्षा में वह फिर से 25 आधार अंकों की वृद्धि कर सकते हैं।
दुन एंड ब्रॉडकास्ट इंडिया के वरिष्ठ अर्थशास्त्री अरुण सिंह ने कहा, "हम रेपो दर में 25 आधार अंक की वृद्धि और मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (एमएसएफ) में 25 आधार अंक की कटौती की उम्मीद करते हैं।"
पिछली बार 20 सितंबर की घोषणा में एमएसएफ को 75 आधार अंक घटाकर 9.5 फीसदी कर दिया गया था। एमएसएफ वाणिज्यिक बैंकों के लिए रिजर्व बैंक से उधार लेने की एक विशेष खिड़की है। एचडीएफसी बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री अभीक बरुआ ने कहा कि आरबीआई रेपो दर को 25 आधार अंक बढ़ाकर 7.75 फीसदी कर सकता है।
अभी रेपो दर 7.50 फीसदी और रिवर्स रेपो दर 6.50 फीसदी है। रिवर्स रेपो दर वह दर है, जिस पर वाणिज्यिक बैंक अपनी अतिरिक्त राशि को आरबीआई में रखते हैं। रेपो दर में जितनी वृद्धि की जाएगी, उतनी ही वृद्धि रिवर्स रेपो दर में की जाएगी।
भारतीय स्टेट बैंक के मुख्य आर्थिक सलाहकार सौम्य कांति घोष ने कहा कि रेपो दर में 25 आधार अंक की वृद्धि संभव है, लेकिन आरबीआई इसे यथावत रखने का भी फैसला कर सकता है।
आरबीआई पिछले करीब तीन साल से महंगाई में कटौती और विकास को संबल प्रदान करने के बीच संतुलित कदम उठाने के लिए संघर्ष कर रही है। सितंबर में थोक महंगाई दर बढ़कर 6.46 फीसदी हो गई। उधर, विकास दर पिछले कारोबारी साल में एक दशक के निचले स्तर पांच फीसदी पर पहुंच गई।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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