आसान नहीं है 'बायकॉट चीन', मार्केट में मुकाबले के लिए भारत को बहुत तैयारी की जरूरत
आसान नहीं है 'बायकॉट चीन', भारत को बहुत तैयारी की जरूरत
नई दिल्ली। भारत के साथ हाल ही में एक झड़प में 20 भारतीय सैनिकों के शहीद होने के बाद देश में कई जगहों पर प्रदर्शन हो रहे हैं। खासतौर से सोशल मीडिया से सड़क तक लोग मांग कर रहे हैं कि चीन में बने सामानों को इस्तेमाल में ना लाया जाए और उनका बहिष्कार किया जाए। ऐसा कर चीन को आर्थिक तौर पर चोट देने की बात कही जा रही है लेकिन ये इतना आसान नहीं है। इसकी वजह है खासतौर से इलेक्ट्रोनिक्स आयटम पर चीन की मजबूत पकड़ का होना।

मोबाइल, लॉपटॉप बनाने में चीन काफी आगे
मोबाइल, लॉपटॉप बनाने जैसे क्षेत्रों में चीन काफी आगे है। जहां तक पहुंचने में भारत को सालों लगेंगे। हाल ही में भारत सरकार इलेक्ट्रोनिक्स मैन्युफैक्चरिंग के लिए 48 हजार करोड़ की स्कीम लाई है। एचपी इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर इसको लेकर ईटी से कहते हैं कि इलेक्ट्रोनिक्स के क्षेत्र में चीन का इतना मजबूत हो जाना एक लंबी यात्रा है। रात भर में सब नहीं बदल जाता है। ना ही यह कुछ घोषणाओं के कारण हो जाता है। इसके लिए यह एक गंभीर दीर्घकालिक प्रतिबद्धता होनी चाहिए। भारत को काफी मेहनत और प्रतिबद्धता दिखाना की जरूरत है।
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चीन भारत का सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर
आज चीन भारत का सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर यानी व्यापारिक साझीदार है। भारत के कुल विदेशी व्यापार में चीन का हिस्सा करीब 10 फीसदी है। भारत चीन से आयात ज्यादा चीजों करता है, उसका निर्यात चीन से कम है। डिपार्टमेंट ऑफ कॉमर्स की रिपोर्ट बताती है कि साल 2018-19 में भारत की तरफ से चीन के लिए निर्यात केवल 16.7 बिलियन डॉलर यानी करीब 1.27 लाख करोड़ रुपए था। भारत ने चीन से 70.3 बिलियन डॉलर यानी 5.35 लाख करोड़ रुपए का आयात किया।

चीन और भारत की सेनाओं में हुई है झड़प
पूर्वी लद्दाख में एलएसी के पास चीन और भारत की सेनाएं आमने-सामने हैं। बीते एक महीने से ज्यादा समय से दोनों देशों के बीच तनाव है। दोनों सेनाओं में जारी तनातनी के बीच सोमवार रात को हिंसक झड़प हुई। जिसमें एक कर्नल सहित 20 भारतीय सैनिक शहीद हो गए। जिसके बाद भारत में ना सिर्फ आम लोग बल्कि केंद्रीय मंत्री और सांसद तक चीनी सामान का बहिष्कार कर देने का आह्वान लोगों से कर रहे हैं।












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