भारत-बांग्लादेश रेल परियोजना 2017 तक पूरी होगी
अगरतला। राष्ट्रीय भारत परिवर्तन सस्थान (नीति) आयोग ने 15 किलोमीटर लंबी भारत-बांग्लादेश रेल परियोजना को 2017 तक पूरी करने का फैसला किया है। यह जानकारी शुक्रवार को राज्य के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दी।

575 करोड़ रुपये की इस परियोजना पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 6-7 जून की बांग्लादेश यात्रा के दौरान बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना के साथ बातचीत हुई थी। परियोजना को जनवरी 2010 में हसीना और तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बीच नई दिल्ली में हुई वार्ता में मंजूरी दी गई थी।
त्रिपुरा के परिवहन सचिव समरजीत भौमिक ने कहा, "नीति आयोग ने गुरुवार को नई दिल्ली में हुई बैठक में परियोजना को 2017 तक पूरी करने का फैसला किया।"
बैठक में भौमिक भी थे, जो शुक्रवार को यहां वापस लौटे हैं। परियोजना के तहत त्रिपुरा की राजधानी अगरतला और बांग्लादेश के अखौरा के बीच रेलमार्ग बनाया जाएगा।
बैठक की अध्यक्षता आयोग के सलाहकार अनिमेश सिंह ने की, जिसमें रेलवे, पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास और विदेश मंत्रालय तथा त्रिपुरा सरकार के अधिकारियों ने हिस्सा लिया।
बैठक परियोजना की बाधा दूर करने के लिए की गई थी। परियोजना के तहत पांच किलोमीटर रेलमार्ग भारतीय सीमा में और शेष बांग्लादेश की सीमा में बनेगा।
271 करोड़ रुपए का खर्च
राज्य सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "केंद्र सरकार ने अभी कोष जारी नहीं किया है, जिसके कारण भूमि अधिग्रहण और दूसरे कामों में देरी हो रही है।"
परियोजना पर 271 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इसके अतिरिक्त भारतीय सीमा में भूमि अधिग्रहण पर 302 करोड़ रुपये और खर्च होने का अनुमान है।
भौमिक ने कहा कि भारतीय विदेश मंत्रालय बांग्लादेश सीमा में बनने वाले 10 किलोमीटर रेलमार्ग का खर्च उठाएगा।
अधिकारी ने कहा कि पहले भारतीय सीमा के पांच किलोमीटर रेलमार्ग का खर्च पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय उठा रहा था, लेकिन गुरुवार की बैठक में मंत्रालय ने इसपर अपनी असमर्थता जताई, जिसके बाद अब रेल मंत्रालय द्वारा यह खर्च उठाने की उम्मीदी की जा रही है।
बांग्लादेश से गुजरने वाले इस रेलमार्ग के बन जाने से फिलहाल कोलकाता से अगरतला तक की 1,650 किलोमीटर दूरी घटकर 515 किलोमीटर रह जाएगी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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