Sovereign Gold Bonds scheme: आखिर क्यों बंद हो सकती है गोल्ड बॉन्ड स्कीम, सामने आई वजह

Sovereign Gold Bonds scheme: भारत सरकार की सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड योजना लोगों में काफी लोकप्रिय हुई। लोगों ने खूब-बढ़ चढ़कर इसमे निवेश किया। लेकिन अब सरकार इस योजना को बंद करने पर विचार कर ही है।

यह योजना मुख्य रूप से इस उद्देश्य के साथ शुरू की गई थी ताकि सोने का आयात को कम किया जा सके और गोल्ड बॉन्ड यानि कागजी सेना को बढ़ावा मिले। लेकिन जिस तरह से सरकार को गोल्ड बॉन्ड पर अनुमान से अधिक ब्याज देना पड़ रहा है, उसकी वजह से सरकार को काफी नुकसान उठाना पड़ा है। इसी को देखते हुए सरकार इस योजना को बंद करने पर विचार कर रही है।

Sovereign Gold Bonds scheme

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम में लाभ

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम की बात करें तो इसपर सरकार हर वर्ष 2.5 फीसदी की ब्याज देती है। यह योजना 8 वर्ष की है, इस अवधि के पूरा होने पर मौजूदा गोल्ड के रेट पर लोगों को भुगतान किया जाता है।

ऐसे में पिछले 8 वर्षों गोल्ड बॉन्ड में किया गया निवेश डबल हो गया है, जिसकी वजह से सरकार को लोगों को अधिक ब्याज देना पड़ रहा है। यही वजह है कि सरकार इसे बंद करने पर विचार कर रही है।

8 साल में पैसा डबल

सामान्य तौर पर म्युचुअल पर लोगों को औसतन 12 फीसदी का रिटर्न हर वर्ष मिलता है। लेकिन सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम में लोगों को 14 फीसदी से अधिक का औसतन रिटर्न मिला है। 2016 में जिन लोगों ने इस स्कीम में निवेश किया था,उन्हें अगस्त माह की शुरुआत में ही मैच्युरिटी मिलनी है।

लेकिन इससे ठीक पहले सरकार ने सीमा शुल्क को घटाकर गोल्ड के दाम को गिरा दिया है। जिससे निवेशकों को घाटा होगा लेकिन सरकार को लोगों को कम रिटर्न देना पड़ेगा।

8 साल में 126.4 फीसदी का रिटर्न

इस साल मार्च में भुनाए गए 2016 के एसजीबी सीरीज II बॉन्ड ने आठ वर्षों में अपने निवेश मूल्य और ब्याज पर 126.4 प्रतिशत का रिटर्न दिया। सीमा शुल्क में कटौती के बाद सोने की कीमतों में कमी ने एसजीबी, भौतिक सोने और ईटीएफ सहित सभी सोने के निवेशों पर रिटर्न को प्रभावित किया है।

सरकार ने पहले ही दिए थे संकेत

सरकार ने पहले ही 2024-2025 वित्तीय वर्ष में गोल्ड बॉन्ड जारी करने के अपने लक्ष्य को घटा दिया। सरकार की ओर से इसके लिए बजट में आवंटन को 38% घटा दिया गया। इसके बाद 23 जुलाई को बजट ऐलान के बाद घरेलू सोने की कीमतों में लगभग 5 प्रतिशत की गिरावट आई है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोने पर सीमा शुल्क 15 प्रतिशत से घटाकर 6 प्रतिशत कर दिया था, जो पिछले दस वर्षों में सबसे कम दर है। इस कटौती से सोने की कीमतों में काफी गिरावट आई और गोल्ड की मांग बढ़ गई।

सीमा शुल्क में कटौती के कारण सोने की कीमतों में भारी गिरावट आई। एक दिन में 5% से अधिक की गिरावट आई। इस गिरावट के कारण व्यापारियों द्वारा अपने स्टॉक को बेचने के कारण धन का काफी नुकसान हुआ।

भारतीय परिवारों के पास सबसे अधिक गोल्ड

भारतीय परिवार के पास दुनिया के सोने के भंडार का लगभग 11% हिस्सा है। यही वजह है कि उनको सरकार के फैसले की वजह से काफी नुकसान उठाना पड़ा है। सरकार ने बजट में सोने और चांदी पर सीमा शुल्क में कटौती का ऐलान किया, जिसके बाद भारतीय परिवारों के पास रखे गोल्ड की कीमत एक ही दिन में 10 लाख करोड़ रुपये कम हो गई।

तश्करी रोकने के लिए सीमा शुल्क घटा

कुछ विश्लेषकों का मानना ​​है कि सीमा शुल्क में कटौती का उद्देश्य सोने की तस्करी पर अंकुश लगाना है, जो सोने की ऊंची कीमतों के कारण बढ़ गई थी। हालांकि इससे एसजीबी की मांग कम हो सकती है, लेकिन अभी भी 2.5 प्रतिशत की निश्चित वार्षिक ब्याज दर के कारण यह काफी आकर्षक स्कीम बनी हुई है।

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