UPI करने वालों की सबसे बड़ी चिंता खत्म! सरकार ने दी ऐसी Good News, जिसे सुनकर आप भी होंगे खुश!
GST on UPI Payment: सोचिए आप एक होटल में गए, वहां खाना खाया और 2000 रुपये UPI से दे दिया, अब अचानक स्क्रीन पर आए - "18% GST लागू"! तो आपका रिएक्शन कैसा होगा? भाई खाने का स्वाद ही कड़वा हो जाएगा।

अगर आपने भी हाल ही में ऐसी कोई खबर पढ़कर अपना सिर पीट लिया है, तो अब खुश हो जाइएं। क्योंकि ऐसा कुछ होने वाला नहीं है! इस पर अब सरकार ने अपना जवाब दे दिया है, जिसे सुनकर आप खटाखट यूपीआई पेमेंट करेंगे।
पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर एक जबरदस्त अफवाह हवा की तरह उड़ रही थी कि सरकार 2,000 रुपये से ज्यादा के UPI ट्रांजैक्शन पर 18% जीएसटी लगाने वाली है। लोगों ने ट्विटर (अब X) से लेकर फेसबुक तक पोस्ट उड़ाने शुरू कर दिए- "डिजिटल इंडिया को झटका!, छोटे व्यापारियों की कमर टूटेगी" वगैरह वगैरह...
सरकार का जवाब - बिल्कुल फेक न्यूज है ये!
18 अप्रैल को खुद वित्त मंत्रालय और CBIC (Central Board of Indirect Taxes & Customs) ने सामने आकर इस झूठी अफवाह की हवा निकाल दी। उन्होंने कहा- सरकार का ऐसा कोई प्लान नहीं है, ना ही ऐसा कोई प्रस्ताव विचार में है। जो भी इस तरह की बात फैला रहे हैं, वो बिना सिर-पैर की बातें कर रहे हैं।
CBIC ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके बताया कि केवल वही सेवाएं GST के दायरे में आती हैं, जिन पर कोई चार्ज यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगता है। लेकिन जनाब, सरकार ने तो जनवरी 2020 से ही UPI P2M ट्रांजैक्शन (यानी ग्राहक से व्यापारी) पर MDR ही हटा दिया था। जब कोई चार्ज ही नहीं, तो GST किस बात पर?
वायरल पोस्ट ने फैलाई खलबली
कुछ लोगों ने सोशल मीडिया पर इतने कॉन्फिडेंस के साथ पोस्ट डाले जैसे उन्हें बजट से पहले ही गुप्त दस्तावेज मिल गए हों!
एक यूजर ने लिखा- UPI पर टैक्स लगाएंगे, ताकि लोग फिर से कैश यूज़ करें!
दूसरे ने लिखा - डिजिटल पेमेंट को खत्म करने की साजिश है ये!
लेकिन असल में यह सब मनगढ़ंत था। सरकार ने न सिर्फ इसका खंडन किया, बल्कि यह भी कहा कि डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देना उनकी प्राथमिकता है।
UPI की रफ्तार- शहरों से गांव तक
वित्त मंत्रालय ने कहा कि UPI अब सिर्फ सुविधा नहीं, बल्कि एक क्रांति बन चुका है। गांवों में भी लोग QR कोड स्कैन करके चाय पी रहे हैं। 2019-20 में जहां UPI ट्रांजैक्शन 21.3 लाख करोड़ रुपये के थे, वहीं 2024-25 में ये आंकड़ा 260 लाख करोड़ रुपये पार कर गया। खास बात ये है कि व्यापारी लेन-देन (P2M) भी 59 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गए हैं।
सरकार दे रही है कैशबैक
डिजिटल पेमेंट को और आसान बनाने के लिए सरकार पिछले तीन साल से इंसेंटिव स्कीम चला रही है।
- 2021-22 में 1,389 करोड़ रुपये
- 2022-23 में 2,210 करोड़ रुपये
- 2023-24 में 3,631 करोड़ रुपये
ये पैसा छोटे दुकानदारों की मदद के लिए है, ताकि वो बिना झिझक QR कोड लगाएं और कहें- UPI है ना!
पहले भी उड़ी थी अफवाह
ऐसी अफवाहें कोई नई बात नहीं। सितंबर 2024 में भी GST काउंसिल की मीटिंग में पेमेंट एग्रीगेटर्स (जैसे PhonePe, Paytm, Razorpay) पर टैक्स को लेकर बात हुई थी- वो भी 2,000 से कम के ट्रांजैक्शन पर। लेकिन वो आम यूजर्स के लिए नहीं, कंपनियों के लेन-देन से जुड़ा मामला था, जो बाद में ठंडे बस्ते में चला गया।












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