तो क्या लोगों को नहीं मिल पाएगा पीएफ पर 8.65 फीसदी ब्याज?
श्रम मंत्री बंडारू दत्तात्रेय ने भले ही इस बात की घोषणा कर दी हो कि कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) डिपॉजिट की ब्याज दर 8.65 फीसदी हो जाएगी। पर वित्त मंत्रालय की तरफ से सवाल उठ गए हैं।

श्रम मंत्री बंडारू दत्तात्रेय ने कहा था कि श्रम मंत्रालय और वित्त मंत्रालय के बीच ईपीएफ की दर 8.65 फीसदी किए जाने को लेकर मतभेद नहीं हैं। इस मामले पर दोनों ही मंत्रालयों का सोचना एक जैसा है। उन्होंने कहा कि यह एक पूरी प्रक्रिया है और इस पूरी प्रक्रिया को खुद देखेंगे। पर वित्त मंत्रालय के अधिकारी के आए हालिया बयान से एक बार फिर पीएफ ब्याज दर को लेकर मतभेद सामने आने लगे हैं। आपको बताते चले इस समय देश में ईपीएफओ के 17 करोड़ खाता धारक हैं। इनमें से करीब चार करोड़ लोग अभी भी लगातार पीएफ खातों में अपना योगदान कर रहे हैं।

केंद्र सरकार फंड उपलब्ध कराने की स्थिति में नहीं
वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में बताया कि अगर ईपीएफओ ज्यादा कमाता है तो वो ज्यादा पैसा खर्च भी कर सकता है। पर असली चिंता यह कि क्या पीएफ खातों पर ब्याज दर 8.65 फीसदी ही मिलेगा या नहीं। क्योंकि अभी केंद्र सरकार फंड उपलब्ध कराने की स्थिति में नहीं है। वित्त मंत्रालय ने श्रम मंत्रालय से बंद पडे हुए पीएफ खाताधारकों के बारे में पूरी जानकारी मांगी है। वित्त मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि हम नहीं चाहते हैं कि उन खाताधारकों पर कोई भी असर पड़े जो अभी भी अपने पीएफ एकाउंट में योगदान कर रहे हैं। श्रम मंत्रालय को वित्त मंत्रालय के इन प्रश्नों के जवाब अभी देने हैं।

फिलहाल मामला वित्त मंत्रालय के पास
बंडारू दत्तात्रेय की अध्यक्षता वाली सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टी पहले ही ईपीएफ डिपॉजिट पर ब्याज दर 8.65 फीसदी करने के प्रस्ताव पर मुहर लगा चुका है। फिलहाल मामला वित्त मंत्रालय के पास है, जिसकी मुहर के बाद ही सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टी के फैसले को अमल में लाया जाएगा। आपको बता दें कि इससे पहले वित्त वर्ष 2015-16 के लिए ईपीएफ डिपॉजिट की ब्याज दर 8.8 फीसदी थी। इससे पहले वित्त वर्ष 2013-14 के लिए ब्याज दर 8.75 फीसदी और वित्त वर्ष 2014-15 के लिए ब्याज दर 8.5 फीसदी थी।

9.7 करोड़ कर्मचारियों पर असर पड़ेगा
वित्त वर्ष 2016-17 के लिए जिस ब्याज दर यानी 8.65 फीसदी पर विचार किया जा रहा है, वह पिछले चार सालों में पहली बार है, जब कम हुआ है। सरकार द्वारा तय की गई इस नई ब्याज से प्रोविडेंट फंड के 9.7 करोड़ कर्मचारियों पर असर पड़ेगा। हालांकि, ब्याज दर कम होने से लोगों को मिलने वाला ब्याज कम हो जाएगा, जिसकी वजह से सभी नौकरीपेशा लोगों को थोड़ी दिक्कत होगी। वहीं दूसरी ओर इस फैसले को राहत भरा भी माना जा रहा है कि क्योंकि वित्त मंत्रालय चाहता है कि श्रम मंत्रालय ईपीएफ ब्याज दर को अन्य लघु बचत योजनाओं के अनुरूप बनाए।













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