वित्त मंत्री ने MSMEs को दी है 3 लाख करोड़ की राहत, लेकिन उससे अधिक तो उसकी देनदारी है?

नई दिल्ली। केंद्र सरकार के राहत पैकेज की पहली किश्त के रूप में देश के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) को उबारने के लिए 3 लाख करोड़ रुपए का राहत पैकेज घोषित किया गया, लेकिन इन इकाइयों की कार्यशील पूंजी से संबंधित संकट के अधिकांश हिस्सों का एक प्रमुख स्रोत सरकारी मशीनरी में खोजा जा सकता है।

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सरकारी अनुमानों के अनुसार, 31 मार्च, 2020 तक एमएसएमई क्षेत्र की इकाइयों का कुल बकाया भुगतान 4.95 लाख करोड़ रुपए से अधिक था, जो घोषित राहत पैकेज से तकरीबन 2 करोड़ ज्यादा है।

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    सूत्रों ने संकेत दिया कि आधे से अधिक लंबित भुगतान राशि के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के तहत केंद्र सरकार के मंत्रालयों और विभागों, राज्य सरकारों और सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। गत बुधवार को एमएसएमई के लिए 3 लाख करोड़ रुपए की क्रेडिट गारंटी की घोषणा करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि केंद्र और केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रम 45 दिनों में एमएसएमई की लंबित बकाए को खत्म कर देंगे।

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    MSME समाधन वेबसाइट पर उपलब्ध एकमात्र आधिकारिक अनुमान है कि विलंबित भुगतानों के विवादों के निपटारे के लिए एक ऑनलाइन विलंबित भुगतान निगरानी प्रणाली ने गत 14 मई को 40,720 करोड़ रुपए के भुगतान दावों को सूचीबद्ध किया है, जो कुल बकाए का एक अंश है। इसमें से 11.6 फीसदी यानी 4,738 करोड़ रुपए केंद्र सरकार से बकाए का दावा है।

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    बताया जाता है कि गुरुवार को 288.54 करोड़ रुपए की कुल राशि के साथ म्युचुअली समाधान किए गए आवेदनों की कुल संख्या 3524 थी। हालांकि यह वास्तविक सरकारी बकाया राशि को प्रतिबिंबित नहीं करता है, यह MSME इकाई मालिकों के बीच अनिच्छा का द्योतक है, क्योंकि लंबित भुगतानों के लिए उन्हें सरकार के साथ संघर्ष करना पड़ता है, जिससे नए ऑर्डर प्रवाह पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

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    एमएसएमई और सड़क परिवहन मंत्री और राजमार्ग नितिन गडकरी ने गुरूवार को एक साक्षात्कार में कहा कि एमएसएमई बकाए पर कोई सटीक डेटा उपलब्ध नहीं है, जो डेटा राज्य सरकारों और प्रमुख उद्योगों और अन्य एजेंसियों से आ रहा है, उसके आधार पर MSME's का कुल बकाया 5 लाख करोड़ रुपए से अधिक होगा। हालांकि उद्योग का अनुमान इससे भी अधिक है।

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    अखिल भारतीय निर्माता संगठन के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष के ई रघुनाथन ने कहा कि कई केंद्र, राज्य सरकारें, सार्वजनिक उपक्रम, कॉरपोरेट्स का एमएसएमई पर लगभग 5.5 लाख करोड़ रुपए बकाया है और इसका लगभग 30 फीसदी बकाया 120 दिनों से अधिक का है, 45 फीसदी 60 से 120 दिनों के बीच का और 60 दिनों से नीचे का हैं। उन्होंने कहा, हम वित्त मंत्री से अनुरोध करते हैं कि वे ब्याज के साथ बकाया का निपटारा करने पर विचार करें, ताकि वो जल्द से जल्द भुगतान करने के लिए दबाव बनाए।

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    पिछले साल सितंबर में तत्कालीन व्यय सचिव जी सी मुर्मू ने कहा था कि गैर-मुकदमदित MSME का बकाया 60,000 करोड़ रुपए था, जिसमें से 40,000 करोड़ रुपए का भुगतान हो चुका है।

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    गौरतलब है भारत का एमएसएमई सेक्टर देश के कुल विनिर्माण का लगभग 45 फीसदी, निर्यात का 40 फीसदी, राष्ट्रीय सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 30 फीसदी का उत्पादन करता है और पूरे भारत की मूल्य श्रृंखला को संचालित करता है। यह अकेले 11 करोड़ लोगों को रोजगार देता है, लेकिन आंतरिक भंडार कमी और मांग की कमी के कारण आजकल वह संकट से गुजर रहा है।

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