जेटली बोले- केन्द्रीय कर्मचारियों को मिलेगा दो साल का बोनस

नई दिल्ली। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने दिल्ली में मीडिया से बात करते हुए सरकार द्वारा लिए गए कई बड़े फैसलों के बारे में बताया। ये फैसले इंटर मिनिस्टीरियल कमेटी द्वारा लेबर और इकोनॉमिक पॉलिसी से जुड़े मुद्दों के संबंध में लिए गए हैं। आपको बता दें कि इस कमेटी में अरुण जेटली के साथ लेबर मिनिस्टर, पावर मिनिस्टर, पेट्रोलियम मिनिस्टर और मिनिस्टर ऑफ स्टेट के लोग थे।

jaitley

बोनस को लेकर फैसला

उन्होंने कहा कि सभी केन्द्रीय कर्मचारियों को दो साल का बोनस मिलेगा, जो अब तक नहीं मिल पाया था। यह बोनस 2014-15 और 2015-16 का है और अब सरकार ने इस समयावधि के बोनस देने का फैसला किया है। इसके बाद के बोनस सातवें वेतन आयोग कमीशन के अधिकार में आएंगे, क्योंकि बोनस को लेकर सातवें कमीशन में काफी बदलाव किए गए हैं।

लंबित केसों को लेकर फैसला

उन्होंने कहा कि बोनस के संबंध में कुछ इस्टेबलिशमेंट के कई केस हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग हैं। इन केसों के फैसले कानून के हिसाब से हों, इसके लिए सरकार पूरी कोशिश करेगी। जेटली ने कहा कि भले ही यह फैसले सीधे सरकार से जुड़े नहीं हैं, लेकिन क्योंकि कानून सरकार ने बनाया है तो यह जरूरी है कि कानून का पालन हो।

वर्कर्स की वेज पर फैसला

तीसरा निर्णय वर्कर्स के वेज (प्रतिदिन कमाई जाने वाली राशि) को लेकर लिया गया है। अलग-अलग कैटेगरी की न्यूनतम वेज अलग-अलग समय में तय हुई थी। एग्रिकल्चरल वर्कर्स की वेज 2005 में और नॉन एग्रिकल्चरल वर्कर्स की वेज 2008 में तय हुई थी। इसके बाद इसमें डीए जुड़ता गया, लेकिन कभी भी इसका रिवीजन नहीं हुआ।

केन्द्र सरकार एक न्यूनतम सीमा तय करती है, जिसे मानकर राज्यों को अपने यहां पर किसी वर्कर की वेज तय करनी होती है। सरकार को मिले सुझावों के आधार पर अकुशल नॉन एग्रिकल्चर कैटेगरी के सी (c) एरिया का न्यूनतम वेज 350 रुपए प्रति दिन तय किया गया है। कुशल और एग्रिकल्चरल वर्कर्स के लिए यह न्यूनतम वेज अपग्रेड हो जाता है।

कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स को लेकर फैसला

इसके बाद अगला निर्णय कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स को लेकर लिया गया है। कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स के संबंध में जो कानून है, उसके अनुपालन के लिए सरकार राज्यों को पत्र लिखेगी।

वॉलिंटियर्स को लेकर फैसला

वॉलिंटिर्स और सरकार के बीच में कोई इंप्लाई और इंप्लायर का रिलेशन नहीं होता है, लेकिन ये लोग भी सरकार के कई काम करते हैं। इनकी कुछ मांगे थीं, जिनमें से एक मांग थी कि सरकार की सोशल सिक्योरिटी स्कीम में से कोई इन वॉलिंटिर्स तक लागू की जाए। आपको बता दें कि इन वॉलिंटियर्स में आंगनबाड़ी, आशा वॉलिंटियर्स, मिड डे मील वॉलिंटियर्स आदि आते हैं।

जेटली ने कहा कि इस संबंध में एक कमेटी का गठन किए जाने का फैसला किया गया है। यह कमेटी इस बात का निर्धारण करेगी कि सोशल सिक्योरिटी स्कीम वॉलिंटियर्स तक पहुंचाने में राज्यों की कितनी हिस्सेदारी होगी और वॉलिंटियर्स की कितनी।

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