Dream 11को मिला GST चोरी का नोटिस, वसूले जाएंगे हजारों करोड़, ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों में मची खलबली
Dream11 Tax Notice: ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म ड्रीम-11 की पैरेंट कंपनी ड्रीम स्पोर्ट्स को GST चोरी करने को लेकर नोटिस मिला है। मनी कंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक ड्रीम-11 कंपनी को 40 हजार करोड़ का नोटिस मिला है।
मनी कंट्रोल की रिपोर्ट में सूत्रों का हवाला देते हुए कहा गया है कि ड्रीम 11 के खिलाफ कर के आरोप चौंका देने वाले हैं, कुल मिलाकर 40,000 करोड़ रुपये की भारी रकम है। यदि इसकी पुष्टि हो जाती है, तो यह भारत में अप्रत्यक्ष कराधान के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा दावा होगा।

हालांकि इकॉनमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी से 25 हजार करोड़ रुपये की मांग की गई है। इकॉनमिक टाइम्स रिपोर्ट के मुताबिक DGGI (Directorate General of GST Intelligence) ने GST चोरी के मामले में 12 ऑनलाइन रियल मनी गेमिंग कंपनियों को 55 हजार करोड़ रुपये के टैक्स बकाए को लेकर नोटिस जारी किया है।
सरकार के इस कदम से ऑनलाइन गेमिंग इंडस्ट्री में हड़कंप मच गया है। इसेक बाद ड्रीम 11 (स्पोर्टा टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड) की मूल कंपनी ड्रीम स्पोर्ट्स ने कथित वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) चोरी और 28 का भुगतान न करने के लिए कर अधिकारियों द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस को चुनौती देते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट में एक रिट याचिका दायर की है।
इस याचिका का उद्देश्य अधिकारियों द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस का विरोध करना है, जिसमें उन पर जीएसटी चोरी करने और दांव के अंकित मूल्य पर 28% जीएसटी का भुगतान करने में विफल रहने का आरोप लगाया गया है। फिलहाल ड्रीम-11 ने इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है।
इससे पहले अब तक का सबसे बड़ा कारण बताओ नोटिस बेंगलुरु स्थित कंपनी गेम्सक्राफ्ट को 2022 में जारी किया गया था। यह रकम लगभग 21,000 करोड़ रुपये की थी।
यह नोटिस 2017 से जून 2022 तक की अवधि को कवर करते हुए कुल 77,000 करोड़ रुपये की सट्टेबाजी राशि पर कथित अप्रत्यक्ष कर चोरी से संबंधित थी। इसके जवाब में, गेम्सक्राफ्ट इस मामले को कर्नाटक उच्च न्यायालय में ले गया, जिसने बाद में नोटिस को खारिज कर दिया।अब सुप्रीम कोर्ट आने वाले हफ्तों में इस मामले पर फिर से सुनवाई करने के लिए तैयार है।
अधिकारियों और कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक शीर्ष अदालत का कोई भी प्रतिकूल फैसला कौशल-आधारित गेमिंग उद्योग के लिए ताबूत में आखिरी कील हो सकता है, जो पहले से ही जीएसटी परिषद की हाल ही में घोषित 28 प्रतिशत जीएसटी व्यवस्था के तहत संकट में है।












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