टाटा को 'मिस्त्री' में दिखता था 'रतन', इसलिए मिली थी चेयरमैन की कुर्सी
सायरस मिस्त्री को जब चेयरमैन की कुर्सी मिली थी तो उन्होंने रतन टाटा को एक आदर्श और महान व्यक्ति बताया था।
नई दिल्ली। आज टाटा समूह के चेयरमैन पद से हटाए जाने के बाद सायरस मिस्त्री जमकर रतन टाटा को गरिया रहे हैं। उन पर संगीन आरोप लगा रहे हैं, लेकिन जब उन्होंने चेयरमैन की कुर्सी मिली थी तो इन्होंने ही रतन टाटा को एक आदर्श और महान व्यक्ति बताया था।
आपको बता दें कि सायरस को चेयरमैन की कुर्सी रतन टाटा के ही कारण नसीब हुई थी क्योंकि उनके और रतन टाटा के बीच फैमिली रिलेशन थे।
रतन टाटा के कारण सायरस को मिली थी कुर्सी
कंपनी में सायरस के लेकर काफी विचार विमर्श किया गया था क्योंकि टाटा संस अपनी कंपनी के लिए बाहर के किसी शख्स को चेयरमैन नहीं बनाना चाहती थी लेकिन रतन टाटा के ही कारण सायरस को कंपनी में एंट्री मिली थी। ये पहला मौका था जब कंपनी का उत्तराधिकारी उसे बनाया गया था जिसका सरनेम 'टाटा' नहीं था हालांकि मिस्त्री का इस कंपनी से काफी पुराना नाता रहा है।
सायरस मिस्त्री का परिचय
- सायरस मिस्त्री का पूरा नाम सायरस पलोनजी मिस्त्री है।
- जिस समय उन्होंने कंपनी की कमान संभाली थी उस वक्त उनकी उम्र 44 साल थी।
- इससे पहले एक साल तक उन्होंने रतन टाटा के साथ कंपनी के लिए काम किया था।
- सायरस 2006 में बोर्ड के मेम्बर चुने गए थे।
- सायरस मिस्त्री अगस्त 2006 से ही टाटा सन्स के निदेशक मंडल में भी शामिल थे।
- तब टाटा ने मिस्त्री की तारीफ करते हुए कहा था कि निदेशक मंडल में उनके साथ काम करते समय मैं उनकी विनम्रता से काफी प्रभावित हुआ हूं।
- मिस्त्री की शिक्षा-दीक्षा लंदन में हुई है।
- वह लंदन के इम्पीरियल कालेज से सिविल इंजीनियरिंग में स्नातक होने के अलावा लंदन बिजनेस स्कूल से प्रबंधन में मास्टर्स भी हैं।
- सायरस मिस्त्री टाटा संस के सबसे बड़े शेयरधारक पलोनजी मिस्त्री के बेटे हैं और वे शपूरजी पालोंजी के प्रमुख भी हैं।













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